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डिजिटल इंफ्रा और इंजीनियरिंग टैलेंट का कमाल, AI आधारित इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बनने की राय पर भारत

मजबूत डिजिटल आधार और इंजीनियरिंग टैलेंट का बड़ा पूल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बनाने की राह पर अग्रसर है। देश को सिर्फ नौकरियां पैदा करने पर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा इनोवेशन-आधारित इकोसिस्टम बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
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Sep 21, 2026
AI Innovation
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

मजबूत डिजिटल सार्वजनिक आधारभूत ढांचा और इंजीनियरिंग टैलेंट का विशाल पूल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इनोवेशन में वैश्विक नेता बनाने के साथ-साथ उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने की मजबूत स्थिति में लाता है। टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों ने यह बात अलग-अलग इंटरव्यू में कही है। रिदम्स (Rhythms) के CEO और को-फाउंडर वेट्री वेल्लोर तथा वीम (Veeam) के CEO आनंद ईश्वरन ने इस बात पर जोर दिया कि देश को सिर्फ नौकरियां पैदा करने पर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा इनोवेशन-आधारित इकोसिस्टम बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए। जिससे लाखों भारतीय अपना बिजनेस शुरू कर सकें और उसे बढ़ा सकें।

आनंद ईश्वरन ने कहा कि भारत ने अपनी डिजिटल पहचान (आधार) और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI) के जरिए बड़े पैमाने पर तकनीकी बदलाव के लिए जरूरी आधार पहले ही तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा- अभी भारत के पास एआई का इस्तेमाल करके ऐसे नतीजे दिखाने का मौका है, जिनका इस्तेमाल करके दुनिया मानवता के भले के लिए एआई के फायदे हासिल कर सकती है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना बड़ी उपलब्धि

आनंद ईश्वरन ने ग्लोबल इनोवेशन में भारत की स्थिति को मजबूत करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए काम करने वाला डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना बहुत बड़ी उपलब्धि थी। ईश्वरन के अनुसार, भारत में खेती, हेल्थकेयर और पब्लिक सर्विस जैसे क्षेत्रों में एआई-आधारित समाधान विकसित करने की अपार क्षमता है। इससे फसल की पैदावार बढ़ाने, संक्रामक बीमारियों से लड़ने और समाज को स्पष्ट लाभ पहुंचाने वाले एप्लिकेशन बनाए जा सकते हैं।

देश का टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा करने का मौका देता है, बल्कि ऐसे समाधान भी बनाने का अवसर देता है जिन्हें दुनिया भर में अपनाया जा सके। वेट्री वेल्लोर ने इनमें से कई विचारों से सहमति जताई, लेकिन जोर दिया कि भारत को रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ उद्यमी तैयार करने पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास की चर्चाओं में अक्सर नौकरियों के सृजन पर फोकस रहता है, लेकिन देश को ऐसा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में काम करना चाहिए जो लोगों को बिजनेस शुरू करने में मदद करें।

टेक्नोलॉजी, टैलेंट और AI की क्षमता का जिक्र

टेक्नोलॉजी, टैलेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच के साथ भारत में लाखों एंटरप्रेन्योर तैयार करने की क्षमता है। वेल्लोर के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी समुदाय इस बदलाव में अहम भूमिका निभा सकता है। वे अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा कर सकते हैं, फाउंडर्स को मेंटरिंग दे सकते हैं। ऐसे पॉलिसी आइडिया सुझा सकते हैं जो भारत को उभरते तकनीकी बदलावों को समझने और अपनाने में मदद करें।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारतीयों के एंटरप्रेन्योरशिप सफर से मिली सीख भारत में पॉलिसी बनाने वालों और नए फाउंडर्स के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। एआई पर चर्चा करते हुए वेल्लोर ने इसे एक शक्तिशाली माध्यम बताया जो जानकारी और ज्ञान तक पहुंच को सबके लिए सुलभ बना सकता है। जानकारी की कमी के कारण अतीत में कई लोग अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाए। एआई विशेषज्ञता और जानकारी को ज्यादा सुलभ बनाकर उस कमी को दूर करने में मदद कर रहा है।

सरकार की नीतियां

भारत AI मिशन को मार्च 2024 में मंजूरी दी गई थी, जिसकी कुल लागत 5 वर्षों में लगभग 10,372 करोड़ रुपये है। इसके तहत स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल, कंप्यूट क्षमता और डेटासेट तैयार किए जा रहे हैं। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रिपोर्ट (2025) में भारत AI प्रतिस्पर्धा और इकोसिस्टम वाइब्रेंसी में विश्व में तीसरे स्थान पर है। साथ ही गिटहब एआई प्रोजेक्ट्स में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।

स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, एआई पेशेवरों की संख्या में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। नैसकॉम का अनुमान है कि 2030 तक भारत एआई-संबंधित सेवाओं में 8-10 मिलियन पेशेवरों को तैयार और पुनःकुशल कर सकता है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) जैसे आधार और यूपीआई दुनिया भर में मॉडल के रूप में उद्धृत किए जाते हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट्स में भी भारत के डीपीआई और स्थानीय एआई एप्लिकेशन्स (खासकर कृषि में) को विकासशील देशों के लिए उदाहरण बताया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि भारत को 2047 तक वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन एआई महाशक्तियों में शामिल होना चाहिए

क्या है विशेषज्ञों की राय?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत नौकरी सृजन के साथ-साथ उद्यमिता इकोसिस्टम, नीतिगत समर्थन, कौशल विकास और नैतिक एआई पर फोकस बनाए रखे, तो वह घरेलू चुनौतियों का समाधान कर सकता है। साथ ही वैश्विक स्तर पर एआई इनोवेशन का नेतृत्व भी कर सकता है।

भारत की ताकत महज हार्डवेयर या फ्रंटियर मॉडल बनाने में नहीं, बल्कि AI इंजीनियरिंग, फाइन-ट्यूनिंग, एप्लिकेशन डेवलपमेंट और पॉपुलेशन-स्केल समाधानों में है। खेती में एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान से किसानों को लाभ, स्वास्थ्य सेवाओं में डायग्नोस्टिक्स और सार्वजनिक सेवाओं में बेहतर टारगेटिंग जैसे उदाहरण पहले से मौजूद हैं।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। हाल ही में सीएटल में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित Ideas4India फोरम में Microsoft के सत्य नडेला सहित 40 से अधिक भारतीय मूल के टेक सीईओ/सीटीओ शामिल हुए, जहां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर और स्किलिंग पर चर्चा हुई।

Updated on:
21 Sept 2026 07:51 pm
Published on:
21 Sept 2026 07:51 pm