
भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि बचत, निवेश और सामाजिक परंपरा का हिस्सा है। शादी-ब्याह से लेकर संकट के समय तक, भारतीय परिवारों ने पीढ़ियों से सोने को सुरक्षित संपत्ति माना है। यही वजह है कि दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड भंडार वाले देशों में भारत का नाम अलग पहचान रखता है। हालांकि इस सोने का बड़ा हिस्सा सरकार के पास नहीं, बल्कि लोगों के घरों और धार्मिक संस्थानों में है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास 880.52 टन सोना है। यह आंकड़ा सरकार ने खुद संसद (राज्यसभा) में जून 2026 में दिया है। पिछले कुछ वर्षों में यह भंडार लगातार बढ़ा है:
यह सोना भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का अहम हिस्सा है, और मार्च 2026 तक इसकी डॉलर वैल्यू करीब 113.5 अरब डॉलर आंकी गई थी।
आम धारणा के उलट, अब RBI का ज़्यादातर सोना भारत के अंदर ही रखा जाता है, बाहर नहीं।
एक साल पहले (सितंबर 2025) तक घरेलू हिस्सेदारी सिर्फ 65.4% थी। यानी RBI लगातार अपना सोना विदेश से वापस भारत ला रहा है।
यहां एक जरूरी बात साफ कर देना जरूरी है। भारत सरकार के पास इसका कोई आधिकारिक, सत्यापित आंकड़ा नहीं है। संसद में दिए गए जवाब में सरकार ने खुद स्वीकार किया कि RBI, वित्त मंत्रालय (DEA) या सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) - किसी ने भी घरों या धार्मिक स्थानों में रखे सोने पर कोई अध्ययन नहीं किया है।
इसका मतलब यह नहीं कि अनुमान गलत हैं, लेकिन इन्हें RBI के सटीक 880.52 टन के आंकड़े जितना भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज जैसी संस्थाओं के निजी अनुमानों के अनुसार भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000–35,000 टन सोना हो सकता है। जनवरी 2026 तक इस सोने की कीमत 5 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुकी थी। जो भारत की कुल GDP का लगभग 125% है। यह रकम भारतीयों के बैंक डिपॉज़िट और शेयर बाज़ार निवेश के संयुक्त मूल्य से भी करीब 175% ज़्यादा है। अनुमानित तौर पर, भारतीय परिवारों के पास दुनिया के टॉप 10 केंद्रीय बैंकों के कुल सोने से भी ज़्यादा सोना है।
मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों के पास भी भारी मात्रा में सोना होने की बात कही जाती है, लेकिन इसका भी कोई अलग, सत्यापित सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। जिन मंदिरों की सबसे ज़्यादा चर्चा होती है, उनमें शामिल हैं:
केंद्रीय बैंक के आधिकारिक गोल्ड रिजर्व के मामले में भारत 2026 में दुनिया में लगभग 8वें स्थान पर है। भारत से ऊपर हैं:
लेकिन अगर सिर्फ आधिकारिक रिज़र्व की बजाय भारतीय परिवारों और मंदिरों के अनुमानित सोने को भी जोड़ लिया जाए, तो भारत निजी तौर पर दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड धारकों में गिना जाता है। हालांकि, जैसा ऊपर बताया गया, यह आंकड़ा अनुमान पर आधारित है, गिनती पर नहीं।
फायदा
आर्थिक संकट में सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता है
परिवारों की बचत का बड़ा और भरोसेमंद साधन है
गोल्ड लोन के ज़रिए आसानी से ऋण मिल जाता है
ज्वेलरी उद्योग लाखों लोगों को रोज़गार देता है
चुनौती
भारत अपनी ज़रूरत का अधिकांश सोना आयात करता है
सोने के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है
ज्यादा आयात होने पर व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) बढ़ सकता है
हाल में गोल्ड टैरिफ बढ़ने से ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिला है, जिससे संगठित कारोबार को नुकसान हो रहा है