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एमपी में सहारा की 75 फाइलें खुलीं, लोगों का फंसा पैसा वापस दिलाने एक्शन में सीआईडी

CID Opens Sahara Files- पीएचक्यू: सीआइडी विंग की 12 टीमों ने शुरू की पड़ताल, मप्र में सहारा समेत अनेक चिटफंड कंपनियों का अंतरराज्यीय नेटवर्क
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cid opens 75 sahara related files in mp (PC: Patrika)

Sahara- मोटे मुनाफे का लालच देकर आम आदमी के जीवन की गाढ़ी कमाई को ठगने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ एमपी पुलिस एक्शन में है। इन मामलों में पुलिस मुख्यालय की सीआइडी शाखा की जांच जारी है। इनमें सहारा भी शामिल है जिसकी कई बंद फाइलें अब खोली गई हैं। एमपी में अनेक चिटफंड कंपनियों का अंतरराज्यीय नेटवर्क सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक करीब 11 प्रकरणों पर सीआइडी द्वारा गठित अलग-अलग टीमें जांच कर रही है। इसमें कई प्रकरणों में अंतरराज्यीय कनेक्शन सामने आया है। मप्र में चिटफंड कंपनी संचालित करने वाली कई कंपनियों का ठिकाना मुंबई, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली मिला है। यानी ये लोग मप्र में अपने आदमी नियुक्त कर फर्जीवाड़े का गिरोह संचालित करते थे।

सीआइडी अब सहारा में फंसे लाखों निवेशकों की दर्ज फाइलों को भी दोबारा खोलने की तैयारी में है। सीआइडी शाखा फाइलें तलब कर रही है।

मप्र में ठगी के मामले: इन कंपनियों के नाम

परिवार डेयरी कंपनी: इस कंपनी ने डेयरी और कृषि क्षेत्र में निवेश के नाम पर लोगों को बड़े रिटर्न का झांसा दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किया, लेकिन कुछ समय बाद कंपनी धोखाधड़ी में फंस गई।

सन इंडिया कंपनी: इस कंपनी ने भी लोगों को उच्च रिटर्न का झांसा दिया, लेकिन धोखाधड़ी के बाद यह बंद हो गई।

केएमजे कंपनी: इस कंपनी ने दोगुना मुनाफा का वादा कर बड़ी संख्या में लोगों से पैसे जुटाए, लेकिन जब निवेशकों को पैसा वापस करने का समय आया तो वह भाग निकली।

सक्षम कंपनी: कंपनी ने लोगों को डेयरी और रियल एस्टेट में निवेश के नाम लोगों से बड़ी रकम एकत्रित की। फिर गबन के चलते सारी रकम फंस गई। फर्जीवाड़ा का यह गिरोह संचालित करते थे।

मध्यप्रदेश में सहारा पर 123 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। करीब 9 लाख निवेशकों का सहारा ग्रुप में पैसा फंसा है। धोखाधड़ी के इन मामलों में करीब 6689 करोड़ रुपए फंसे हैं। इनमें से अभी तक केवल 5 प्रतिशत राशि ही वापस मिली है। प्रदेश में सहारा ग्रुप की संपत्तियों की कम कीमत पर अवैध बिक्री व ईओडब्ल्यू (EOW) की जांच के बड़े मामले भी सामने आए हैं। सहारा समूह के प्रबंधन और अधिकारियों पर करोड़ों की हेराफेरी व धोखाधड़ी के आरोप हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इनपर शिकंजा कसा है।

रिफंड से जुड़ी समस्याएं

निवेशकों को पैसा पाने के लिए सहारा-सेबी रिफंड पोर्टल पर आवेदन करना होता है, लेकिन सर्वर और दस्तावेजों के सत्यापन में तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है।

जमीन घोटाला और ईओडब्ल्यू (EOW) की कार्रवाई

एमपी की राजधानी भोपाल के साथ ही सागर, जबलपुर, कटनी और ग्वालियर में महंगी जमीनों को औने-पौने दामों में बेचने और सेबी (SEBI) के रिफंड खाते में पूरी रकम जमा न करने के मामले सामने आए हैं।

एमपी में सहारा के आंकड़े

फंसा हुआ पैसा: करी 6689 करोड़ रुपए
कुल निवेशक: करीब 9 लाख शिकायतकर्ता व निवेशक
दर्ज मामले: 123 से ज्यादा एफआईआर दर्ज