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बीजेपी को भारी पड़ रहा ग्वालियर-चंबल संभाग, पहले मंत्री को हराया, फिर दिया बड़ा झटका

Gwalior-Chambal Division-विजयपुर उपचुनाव में मंत्री रहते हारे थे रावत, अब दतिया में नरोत्तम से टिकट छीनने के बाद भी हार, नसीहत या भितरघात!
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Gwalior-Chambal division proving costly for the BJP

MP BJP President Hemant Khandelwal- (Photo Source: X हैंडल)

MP BJP- हरिचरण यादव भोपाल. ग्वालियर व चंबल संभाग में दतिया उपचुनाव में मिली हार बीजेपी सत्ता व संगठन के लिए दूसरा बड़ा झटका है। पहला झटका नवंबर 2024 में मंत्री रहते रामनिवास रावत के विजयपुर सीट हारने के बाद लगा था। अब पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने के बाद आशुतोष तिवारी की दतिया में हार से लगा है। यह हार या तो जनता की नसीहत है या भितरघात का नतीजा। हालांकि इस हार से भाजपा व सरकार का कुछ बिगडऩे वाला नहीं है लेकिन 22 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस के लिए यह एक संजीवनी है, जो आगामी चुनावों में जीत का कारण भी बन सकती है।

बुदनी-अमरवाड़ा जीते विजयपुर-दतिया हारे:

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी राज्य में जब भी कोई उपचुनाव होते हैं तो वे अघोषित रूप से सत्ताधारी दल की ओर से सरकार भी मैदान में होती है। पहले सरकार ने विजयपुर और अब दतिया उपचुनाव लड़ा, सीएम डॉ. मोहन यादव ने यहां प्रचार भी किया। हालांकि भाजपा बुदनी और अमरवाड़ा सीट पर हुए उपचुनाव में जीती भी।

हेमंत खंडेलवाल के बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद ये पहला उपचुनाव

वहीं हेमंत खंडेलवाल के बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद ये पहला उपचुनाव था। प्रत्याशी चयन और भितरघात पर उठे सवालों पर समीक्षा में क्या परिणाम आता है, ये देखना होगा। हालांकि प्रत्याशी की घोषणा के बाद जो स्थिति दतिया में खड़ी हो गई थी उसमें खंडेलवाल ने ही आगे आकर मोर्चा संभाला था।

यहां के कई बड़े नेताओं के हिस्से भी आएगी हार

हार के ये रेकार्ड सत्ता व संगठन के अलावा ग्वालियर-चंबल संभाग से आने वाले बड़े नेताओं के हिस्से भी आनी तय मानी जा रही है। इस इलाके में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया बड़े नेता माने जाते रहे हैं। इनके अलावा भी कई नाम हैं। इनमें से नरेन्द्र सिंह तोमर का खुले तौर पर राजनीति से सीधा कोई वास्ता नहीं है, क्योंकि वे अब मप्र विधानसभा के अध्यक्ष है।

बता दें कि दतिया में त्रिकोणीय मुकाबले की बात कही जा रही थी। कांग्रेस और बीजेपी के अलावा आजाद समाज पार्टी ने भी टाइट फाइट की। उसके प्रत्याशी दामोदर यादव को 22 हजार वोट मिले। दतिया में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह की जीत में सामाजिक समीकरण के साथ बीजेपी की भितरघात काफी सहायक साबित हुई। इसके अलावा पार्टी नेतृत्व, स्थानीय संगठन, उम्मीदवार की व्यक्तिगत लोकप्रियता आदि भी अहम कारक बने।