
भारतीय नौसेना का पारंपरिक पाल-प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी इटली के लिवोर्नो बंदरगाह से अपनी अगली समुद्री यात्रा पर रवाना हो गया है। यह पोत 9 सितंबर 2026 को लिवोर्नो पहुंचा था और वहां कुछ दिनों के बंदरगाह प्रवास के बाद अब 'लोकायन 2026' अभियान के अगले चरण के लिए आगे बढ़ गया है।
लोकायन 26 भारतीय नौसेना का 10 महीने लंबा ट्रांसओशनिक (महासागर-पार) अभियान है, जिसे कोच्चि नौसैनिक अड्डे से दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने रवाना किया था। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस अभियान में पोत करीब 22,000 नॉटिकल मील की दूरी तय करते हुए 13 देशों के 18 बंदरगाहों का दौरा करेगा, जिसमें फ्रांस के 'एस्काल आ सेते' और अमेरिका के न्यूयॉर्क में 'सेल 250' जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप आयोजनों में भागीदारी भी शामिल है।
इंडिया शिपिंग न्यूज और इंडिया स्ट्रैटेजिक की रिपोर्टों के मुताबिक लिवोर्नो पहुंचने तक पोत 10 देशों में 17,400 नॉटिकल मील से अधिक की यात्रा पूरी कर चुका था। इससे पहले पोत ने स्पेन के बार्सिलोना में छह दिन का बंदरगाह प्रवास पूरा किया था, जो 1 सितंबर को शुरू हुआ था।
लिवोर्नो पहुंचने से पहले सुदर्शिनी ने भूमध्य सागर में इटली की नौसेना के पाल-प्रशिक्षण पोत आईटीएस विर्जिनियो फासान के साथ एक संयुक्त 'पैसेज एक्सरसाइज' की, जिसमें समन्वित युद्धाभ्यास और पाल-संचालन (सेल-हैंडलिंग) ड्रिल शामिल थे। लिवोर्नो शहर इटली की प्रतिष्ठित नौसेना अकादमी (अकादेमिया नवाले) का घर है, जिसने दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर आदान-प्रदान का मौका दिया। इटली की नौसेना के प्रमुख एडमिरल ज्यूसेपे बेरुत्ती बर्गोत्तो ने पोत का दौरा कर चालक दल और प्रशिक्षु नौसैनिकों से बातचीत की। सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर रविकांत ने लिवोर्नो के मेयर लुका सालवेत्ती, नौसेना अकादमी के कमांडेंट रियर एडमिरल अल्बेर्तो ताराबोत्तो और उप-प्रीफेक्ट एदोआर्दो लोम्बार्दी से भी मुलाकात की।
भारतीय दूतावास के मुताबिक इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच गहरे मैत्री-संबंधों और नौसैनिक सहयोग को फिर से पुख्ता किया। प्रशिक्षण गतिविधियों के तहत क्रॉस-डेक विजिट हुईं। भारतीय प्रशिक्षुओं ने इतालवी नौसेना अकादमी का दौरा किया, तो इतालवी कैडेट सुदर्शिनी पर पहुंचे। पोत पर एक स्वागत समारोह भी आयोजित हुआ जिसमें वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारी, राजनयिक और स्थानीय गणमान्य शामिल हुए, और आम जनता के लिए भी पोत को दर्शकों हेतु खोला गया।
INS सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का तीन-मस्तूल वाला पारंपरिक 'बार्क' श्रेणी का पाल-प्रशिक्षण पोत है, जिसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने ब्रितानी नौवास्तुकार कॉलिन मुडी के डिज़ाइन पर बनाया था। इसे 27 जनवरी 2012 को कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में शामिल किया गया था। यह 1997 में कमीशन हुए INS तरंगिणी का सिस्टर-शिप है। 54 मीटर लंबे इस पोत में करीब 1,035 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के 18-20 पाल लगे हैं, और यह लगातार करीब 20 दिन तक समुद्र में रह सकता है। इसका इस्तेमाल कैडेटों के बुनियादी नौवहन, चरित्र-निर्माण और समुद्री जागरूकता प्रशिक्षण के लिए किया जाता है।
नौसेना प्रवक्ता के मुताबिक यह यात्रा भारत की वैश्विक समुद्री गतिविधियों में मौजूदगी और उसकी नौसैनिक परंपरा को दर्शाने वाला एक शक्तिशाली प्रतीक है। लोकायन 2026, भारत सरकार के 'महासागर' विज़न को अमल में लाने का एक जरिया है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और साझा विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है। यह अभियान 2026 को 'आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष' के तौर पर मनाए जाने से भी जुड़ा हुआ है। वाइस एडमिरल सक्सेना ने पोत को भारत का 'एंबेसडर ऐट लार्ज' यानी 'बड़े स्तर का राजदूत' बताया था, जो समुद्रों और सीमाओं के पार मित्रता के पुल बनाता है।
व्यावहारिक स्तर पर, यह यात्रा भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के प्रशिक्षुओं को लंबी दूरी की समुद्री नौवहन का दुर्लभ अनुभव देती है, जबकि कूटनीतिक स्तर पर यह भारत की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति और मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ पेशेवर संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बनती है, जैसा कि इटली, स्पेन समेत अब तक दौरा किए गए 10 देशों में देखा गया है। लिवोर्नो से रवाना होकर सुदर्शिनी अब लोकायन 2026 की अगली मंजिल की ओर बढ़ चुका है और आने वाले महीनों में यह और भी बंदरगाहों से होते हुए भारत की समुद्री विरासत और मैत्री-संदेश को आगे ले जाएगा।