
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
ऑनलाइन शॉपिंग में कृत्रिम रूप (Artificial form) से MRP बढ़ाकर बड़ा डिस्काउंट दिखाकर ग्राहकों को गुमराह करने का खेल अब नहीं चलेगा। उपभोक्ता कार्य विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण (E-commerce) नियम, 2020 में संशोधन करते हुए 'उपभोक्ता संरक्षण संशोधन नियम, 2026' अधिसूचित किए हैं। यह नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। ये नियम उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत बनाए गए हैं।
नए नियमों के मुताबिक जब भी कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म किसी सामान पर डिस्काउंट दिखाएगा, तो उसे घटी हुई कीमत के साथ-साथ 'पुरानी कीमत' (प्रायर प्राइस) भी बतानी होगी। यह पुरानी कीमत मनमाने ढंग से तय नहीं होगी, बल्कि कानूनी रूप से इसे पिछले 30 दिनों में उस प्रोडक्ट की सबसे कम बिक्री कीमत के आधार पर परिभाषित किया गया है, न कि सिर्फ ठीक पहले की कीमत के आधार पर।
इससे फ्लैश सेल और प्रमोशन से ठीक पहले कीमतें बढ़ाकर बाद में बड़ी छूट दिखाने की चाल पर रोक लगेगी। गौर करने वाली बात है कि यूरोपीय संघ पहले से ही 2022 के 'ऑम्निबस डायरेक्टिव' के तहत ऐसा ही 30-दिन का नियम लागू कर चुका है, जिसने भारत के इस कदम को वैश्विक मिसाल से जोड़ा है।
अगर किसी कंपनी ने पैसे देकर सर्च नतीजों में अपने प्रोडक्ट को ऊपर दिखाया है, तो प्लेटफॉर्म को उसे साफ, स्पष्ट और अलग तरीके से 'विज्ञापन' या 'स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग' के तौर पर चिह्नित करना अनिवार्य होगा। साथ ही प्लेटफॉर्मों को यह भी सार्वजनिक रूप से बताना होगा कि उनका सर्च एल्गोरिद्म किन मुख्य आधारों पर प्रोडक्ट्स की रैंकिंग तय करता है, ताकि नतीजों में हेरफेर या पक्षपात करके ग्राहकों को गुमराह न किया जा सके।
ग्राहकों को किसी खास सामान की खरीदारी के लिए भ्रमित करने या दबाव बनाने वाले 'डार्क पैटर्न' तरीकों पर भी रोक रहेगी। अब सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को 2023 में जारी 'डार्क पैटर्न की रोकथाम और नियमन संबंधी दिशानिर्देश' का सख्ती से पालन करना होगा, हर साल इसका सेल्फ-ऑडिट कराना होगा और अपनी वेबसाइट/ऐप पर अनुपालन प्रमाणपत्र सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा।
मंत्रालय के मुताबिक इसी साल जून 2025 में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की सलाह के बाद 26 प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों ने पहले ही स्वैच्छिक रूप से डार्क-पैटर्न-मुक्त होने की घोषणा की थी; अब यह प्रावधान कानूनी बाध्यता बन गया है।
नियमों के तहत ग्राहकों को सामान की एक्सपायरी या बेस्ट-बिफोर तारीख, रिटर्न-रिफंड नीति, वारंटी, डिलीवरी और भुगतान से जुड़ी जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी। आयातित सामान के लिए आयातक का ब्योरा और मूल देश (कंट्री ऑफ ओरिजिन) बताना भी अनिवार्य होगा।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना उसकी जानकारी का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे और लॉयल्टी/मेंबरशिप कार्यक्रमों को छोड़कर असंबंधित सेवाओं के लिए 'बंडल्ड फीस' भी नहीं वसूल सकेंगे। सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) की शिकायत-निवारण प्रणाली से जुड़ना होगा और शिकायतकर्ता को उसकी दर्ज शिकायत की आधिकारिक प्रति देनी होगी।
उपभोक्ता कार्य विभाग के मुताबिक 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर करीब 17.71 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 29% यानी 5.11 लाख से ज्यादा शिकायतें सिर्फ ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़ी थीं। यह आंकड़ा बताता है कि ऑनलाइन खरीदारी में गड़बड़ियों की शिकायतें कितनी बड़ी संख्या में आ रही हैं।
इससे पहले भी CCPA एक ई-कॉमर्स कंपनी पर गुमराह करने वाली कीमत-प्रदर्शन के लिए 2 लाख रुपये का जुर्माना लगा चुकी है, जहां शिकायत मिली थी कि 'सभी टैक्स सहित एमआरपी' दिखाने के बावजूद चेकआउट पर अलग से जीएसटी जोड़ा जा रहा था। सरकार का कहना है कि ये संशोधन कारोबार को आसान बनाए रखते हुए (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश है, ताकि ऑनलाइन खरीदारी अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।
Updated on:
13 Sept 2026 09:30 pm
Published on:
13 Sept 2026 09:30 pm
