13 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

लाल सागर के मुहाने पर हूतियों का कब्जा: सऊदी ने अमेरिका से मांगी सैन्य मदद, होर्मुज स्ट्रेट पर क्या होगा असर?

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बेहद अहम समुद्री रास्ते बाब-अल-मंदेब के मुहाने पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। हूतियों ने महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने के बाद बाब-अल-मंदेब में स्थित मायून (पेरिम) द्वीप भी अपने नियंत्रण में ले लिया।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Vinay Shakya

Sep 13, 2026

houthi rebels

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट बाब-अल-मंदेब के आसपास अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। बुधवार-गुरुवार को भीषण झड़पों के बाद हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया, जहां से सरकार-समर्थक सेनाएं पीछे हट गईं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार को यमन सरकार की सेना बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बीचोंबीच स्थित मायून (पेरिम) द्वीप से भी हट गई। इसके बाद हूती लड़ाकों ने वहां कब्जा जमा लिया। यह द्वीप जलडमरूमध्य को दो मुख्य नौवहन चैनलों में बांटता है। इसलिए इस पर नियंत्रण हूतियों को रणनीतिक बढ़त देता है। अमेरिकी अखबार यूएसए टुडे नेटवर्क के मुताबिक बाब-अल-मंदेब से वैश्विक समुद्री व्यापार का करीब 10-12% हिस्सा गुजरता है, जो इसे स्वेज नहर मार्ग का सबसे संवेदनशील प्रवेश-द्वार बनाता है।

सऊदी का पलटवार, मोखा एयरपोर्ट पर हमला

मोखा पर कब्जे के जवाब में सऊदी अरब ने शुक्रवार को मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए। हूती प्रसारक के हवाले से एपी की रिपोर्ट बताती है कि इस हमले में अब तक किसी नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

सऊदी शहरों पर मिसाइल-ड्रोन हमले, 73 घायल

इससे पहले हूतियों ने सऊदी अरब के जिज़ान, अबहा, नज्रान और खमीस मुशैत में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। अखबार द नेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 73 नागरिक घायल हुए, जिसके जवाब में सऊदी-नीत गठबंधन ने यमन में 54 हवाई हमले किए। गौरतलब है कि इसके पहले जिजान स्थित अरामको रिफाइनरी हूती हमलों का निशाना बन चुकी है। यह रिफाइनरी रोजाना करीब 4 लाख बैरल कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करती है। अगस्त और सितंबर की शुरुआत में हुए हमलों के दौरान नासा के फायर-मॉनिटरिंग सिस्टम (FIRMS) ने वहां आग की तापीय गतिविधि दर्ज की थी और सैटेलाइट तस्वीरों में धुएं के गुबार भी दिखे थे।

MBS की ट्रंप से दो बार अपील, अमेरिका का इनकार

हूतियों की तेज़ बढ़त से चिंतित सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो बार फोन किया। एक्सियोस और CBS न्यूज के अनुसार, पहली कॉल में उन्होंने मोखा में बिगड़ते हालात और सरकार-समर्थक सेनाओं की पीछे हटने की जानकारी दी। कुछ घंटों बाद दूसरी कॉल में उन्होंने सीधे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की मांग की।

दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि ट्रंप ने यह अनुरोध ठुकरा दिया और प्रशासन ने फिलहाल सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार करते हुए सऊदी को खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा देने का फैसला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर समन्वय वार्ता के लिए गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे, और करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से ही गैर-लड़ाकू सहयोग के तौर पर वहां मौजूद हैं।

'इस्लामिक नाटो' खामोश क्यों?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच 7 अगस्त 2026 को मक्का में हुए संयुक्त रक्षा समझौते (Mecca Joint Defence Agreement) में यह प्रावधान है कि किसी एक सदस्य पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। लेकिन पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने 10 सितंबर को स्पष्ट किया कि हूती हमलों के जवाब में फिलहाल इस समझौते के तहत कोई तत्काल सैन्य कार्रवाई विचाराधीन नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता अभी तक अपनी साझा कमान संरचना विकसित नहीं कर पाया है।

हूतियों की कार्रवाई का वैश्विक प्रभाव

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में जारी व्यवधान के बीच सऊदी अरब पहले से ही अपने तेल निर्यात के लिए लाल सागर मार्ग पर अधिक निर्भर हो गया है। ऐसे में बाब-अल-मंदेब पर हूतियों की मजबूत पकड़ तेल कीमतों पर सीधा दबाव बना रही है। पिछले सप्ताह कच्चा तेल जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा। फिलहाल अमेरिका की रणनीति सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना लाल सागर को खुला रखने और क्षेत्रीय सहयोगियों को समर्थन देने तक सीमित है, जबकि रियाद और वॉशिंगटन के बीच बातचीत जारी है।