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खरीफ की फसल क्या होती है? कौन-कौन सी फसलें आती हैं और किसानों को सरकार क्या मदद देती है?

Kharif Crops India : खरीफ की फसलें क्या होती हैं? जानिए प्रमुख खरीफ फसलों की सूची, बुवाई-कटाई का समय और किसानों के लिए उर्वरक सब्सिडी, फसल बीमा व KCC जैसी सरकारी योजनाएं।
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Aug 17, 2026
Kharif Crops India
Kharif Crops India : किस मौसम में होती है खरीफ की खेती, PC- Chatgpt

जून का महीना आते ही देश के अधिकांश किसानों की नजर आसमान पर टिक जाती है। मानसून की पहली बारिश केवल मौसम नहीं बदलती, बल्कि करोड़ों किसानों के लिए नए कृषि सीजन की शुरुआत का संकेत भी देती है। यही वह समय होता है जब देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होती है। भारत की कृषि व्यवस्था में खरीफ सीजन का विशेष महत्व है, क्योंकि धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और बाजरा जैसी कई प्रमुख फसलें इसी दौरान उगाई जाती हैं। देश के खाद्यान्न उत्पादन, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खरीफ फसलों पर निर्भर करता है।

खरीफ फसलें वे फसलें होती हैं जिनकी बुवाई मानसून की शुरुआत के साथ की जाती है और कटाई बारिश का मौसम खत्म होने के बाद की जाती है। सामान्य तौर पर इनकी बुवाई जून-जुलाई में होती है, जबकि कटाई सितंबर से नवंबर के बीच की जाती है। इन फसलों को अधिक तापमान, पर्याप्त नमी और अच्छी वर्षा की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि खरीफ खेती को अक्सर "मानसूनी खेती" भी कहा जाता है। यदि मानसून सामान्य रहता है तो उत्पादन अच्छा होता है, लेकिन बारिश कम या अधिक होने पर किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

धान है खरीफ की प्रमुख फसल

भारत में खरीफ सीजन के दौरान कई प्रकार की फसलें बोई जाती हैं। इनमें सबसे प्रमुख धान है, जिसे देश के करोड़ों लोग मुख्य भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी जैसी अनाज फसलें भी खरीफ में बोई जाती हैं। दलहन फसलों में अरहर, उड़द और मूंग का महत्वपूर्ण स्थान है। तिलहन फसलों में सोयाबीन, मूंगफली, तिल और सूरजमुखी शामिल हैं। वहीं कपास, गन्ना और जूट जैसी नकदी फसलें भी इसी मौसम में उगाई जाती हैं। अलग-अलग राज्यों में जलवायु और मिट्टी के अनुसार फसलों का चयन किया जाता है। उदाहरण के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान प्रमुख है, जबकि मध्य प्रदेश में सोयाबीन और महाराष्ट्र में कपास का बड़ा क्षेत्र है।

फसल श्रेणीप्रमुख फसलें
अनाजधान, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी
दलहनअरहर, उड़द, मूंग
तिलहनसोयाबीन, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी
नकदी फसलेंकपास, गन्ना, जूट

खरीफ की फसल पर निर्भर है किसानों की आय

खरीफ फसलों का महत्व केवल किसानों तक सीमित नहीं है। देश की खाद्य सुरक्षा भी काफी हद तक इसी सीजन पर निर्भर करती है। धान और मक्का जैसे उत्पाद न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि कई मामलों में निर्यात का भी आधार बनते हैं। यदि किसी वर्ष मानसून कमजोर पड़ जाए तो इसका असर सीधे खाद्यान्न उत्पादन, बाजार कीमतों और ग्रामीण आय पर दिखाई देता है। यही कारण है कि सरकार हर साल खरीफ सीजन को लेकर विशेष तैयारी करती है और किसानों को विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है।

उर्वरकों पर सरकार देती है विशेष सब्सिडी

किसानों को सबसे बड़ी सहायता उर्वरक सब्सिडी के रूप में मिलती है। खेती में इस्तेमाल होने वाले डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक होती हैं। यदि सरकार सब्सिडी न दे तो किसानों की लागत बहुत बढ़ सकती है। इसलिए केंद्र सरकार उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी देकर किसानों को खाद सस्ती दरों पर उपलब्ध कराती है। इससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। खरीफ सीजन में खाद की मांग सबसे अधिक रहती है, इसलिए सरकार पहले से पर्याप्त भंडारण और वितरण की व्यवस्था करती है।

खरीफ खेती की खास बातें

  • बुवाई मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में होती है।
  • कटाई आमतौर पर सितंबर से नवंबर के बीच होती है।
  • इन फसलों को अधिक तापमान और पर्याप्त बारिश की जरूरत होती है।
  • देश के खाद्यान्न उत्पादन में खरीफ फसलों का बड़ा योगदान है।
  • धान और मक्का जैसी फसलें करोड़ों लोगों के भोजन का आधार हैं।

बीज पर भी मिलता है अनुदान

बीज भी अच्छी खेती की नींव माने जाते हैं। यदि बीज की गुणवत्ता खराब हो तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराती है। कई राज्यों में किसानों को बीज खरीदने पर अनुदान दिया जाता है, जबकि कुछ योजनाओं के तहत मिनी-किट और प्रदर्शन कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। इससे किसानों को नई और अधिक उत्पादक किस्मों के बारे में जानकारी मिलती है।

नुकसान से बचाने के लिए होता है बीमा

प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भी चलाती है। खरीफ सीजन में बाढ़, सूखा, अत्यधिक वर्षा, ओलावृष्टि या कीट प्रकोप जैसी समस्याएं किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती हैं। ऐसी स्थिति में फसल बीमा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। खरीफ फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं। फसल खराब होने पर किसानों को मुआवजा मिलता है, जिससे वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।

योजना/सहायताकिसानों को लाभ
उर्वरक सब्सिडीडीएपी, एनपीके समेत खाद सस्ती दरों पर
बीज सब्सिडीप्रमाणित और उन्नत बीज उपलब्ध
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाप्राकृतिक आपदा से नुकसान पर मुआवजा
कृषि यंत्र अनुदानट्रैक्टर, रोटावेटर, स्प्रेयर आदि पर सब्सिडी
PM कृषि सिंचाई योजनाड्रिप और स्प्रिंकलर पर आर्थिक सहायता
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)कम ब्याज पर खेती के लिए ऋण

कृषि यंत्र खरीदने पर भी मिलती है सब्सिडी

सरकार किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर भी सहायता देती है। आधुनिक मशीनों के उपयोग से खेती आसान और अधिक उत्पादक बनती है। कई राज्यों में ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, पावर स्प्रेयर और अन्य कृषि उपकरणों पर सब्सिडी दी जाती है। इससे छोटे और मध्यम किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने का अवसर मिलता है।

सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत भी सहायता दी जाती है। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों पर अनुदान देकर सरकार किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करती है। जल संकट वाले क्षेत्रों में यह योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

KCC से उपलब्ध कराया जाता ऋण

इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। खरीफ सीजन की शुरुआत में किसानों को बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों के लिए नकदी की जरूरत होती है। केसीसी उन्हें समय पर सस्ता ऋण उपलब्ध कराता है, जिससे उन्हें साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

कुल मिलाकर खरीफ सीजन भारतीय कृषि की रीढ़ माना जाता है। देश की बड़ी आबादी की खाद्य जरूरतें और करोड़ों किसानों की आय इसी पर निर्भर करती है। हालांकि मानसून पर अधिक निर्भरता के कारण यह खेती जोखिम भरी भी होती है। यही वजह है कि सरकार उर्वरक सब्सिडी, बीज सहायता, फसल बीमा, कृषि यंत्र अनुदान, सिंचाई योजनाओं और सस्ते ऋण जैसी कई सुविधाओं के माध्यम से किसानों को सहयोग देती है। यदि मौसम अनुकूल रहे और किसानों को समय पर ये सुविधाएं मिलें, तो खरीफ सीजन न केवल किसानों की आय बढ़ा सकता है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत बना सकता है।

Updated on:
17 Aug 2026 12:01 pm
Published on:
17 Aug 2026 12:01 pm