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बिहार में मखाना क्रांति: अब स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से होगी बंपर कमाई, युवाओं को मिलेगा रोजगार

बिहार में स्थानीय स्तर पर मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की जाएगी। इसके लिए बीएयू सबौर के 6 कृषि विज्ञान केंद्रों में सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयां (Micro Processing Units) लगाई जाएंगी।
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Sep 29, 2026
Makhana processing and packaging in Bihar
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Gemini)

मखाना उत्पादन से बिहार को नई दिशा मिलेगी।अब बिहार में स्थानीय स्तर पर मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की जाएगी। मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए में बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग, बिहार सरकार ने केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत मखाना की सूक्ष्म स्तरीय प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए BAU के अधीन संचालित 6 कृषि विज्ञान केंद्रों का चयन किया है।

किसानों को क्या फायदा होगा?

बिहार में मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित होने से किसानों को काफी फायदा होगा। इन इकाइयों की स्थापना से मखाना उत्पादक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर मखाना के प्राथमिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे किसानों को केवल कच्चे मखाना के उत्पादन और बिक्री तक सीमित नहीं रहना है। मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित होने पर किसानों को प्रोसेसिंग, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के अवसर मिलेंगे।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार, कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण युवाओं को मखाना प्रसंस्करण की तकनीक, गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग और उद्यमिता से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा। इससे स्थानीय स्तर पर मखाना आधारित छोटे उद्यम विकसित करने और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मखाना उद्यमिता को बढ़ावा

विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पहल मखाना की ‘फार्म-टू-मार्केट’ मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की सुविधा मिलने से किसानों को अपने उत्पाद में मूल्य जोड़ने और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, मखाना आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। मखाना बिहार की विशिष्ट जलज कृषि उपज है और राज्य में इसके उत्पादन में अग्रणी है।

बिहार में कितना उत्पादन होता है?

बीएयू के मुताबिक, देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 से 90 प्रतिशत है। राज्य के कई जिलों में मखाना किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि मखाना बिहार की विशिष्ट कृषि धरोहर है और अब यह राज्य की अर्थव्यवस्था तथा किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं वाली फसल के रूप में उभर रहा है।

BAU, सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा- उद्यान निदेशालय की ओर से मखाना की सूक्ष्म स्तरीय प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की पहल उत्पादन के साथ-साथ मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास मखाना की पूरी मूल्य श्रृंखला को वैज्ञानिक आधार प्रदान करना है। इसके तहत उन्नत किस्म और गुणवत्तापूर्ण बीज से लेकर वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, कटाई, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और बाजार तक की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।

कुलपति ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और उन्हें मखाना आधारित उद्यमिता से जोड़ने के प्रयास को और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मखाना के क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी विकास के साथ अब प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर विशेष जोर देने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।

युवाओं को मिलेगा रोजगार

BAU, सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि मखाने की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित होने से युवाओं को रोजगार मिलेगा। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर नए उद्यम और रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे। बीएयू मखाना को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बिहार की पहचान बनाने वाले उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पाद के रूप में स्थापित करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और तकनीकी प्रसार को लगातार मजबूत करता रहेगा।

Updated on:
29 Sept 2026 09:41 pm
Published on:
29 Sept 2026 09:41 pm