
भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। प्राइमरी मार्केट में कई दिग्गज कंपनियां (IPO) ला रही हैं। टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग जैसे अलग-अलग सेक्टर्स की कंपनियां IPO लॉन्च करके बाजार से मोटी रकम जुटाने जा रही हैं।
किसी कंपनी का छोटा-सा कारोबार जब बड़ा साम्राज्य बनने की ओर बढ़ता है, तो उसे पूंजी की जरूरत होती है। फर्म को कभी नए कारखाने लगाने के लिए, कभी तकनीक विकसित करने और कभी कर्ज चुकाने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। IPO, इसी जरूरत को पूरा करने का एक रास्ता है।
IPO का मतलब होता है- इनिशियल पब्लिक ऑफ़रिंग। इसके जरिए निजी कंपनी पहली बार आम निवेशकों को अपने शेयर खरीदने का अवसर देती है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद इन शेयरों की खरीद-बिक्री संभव होती है।
IPO, कंपनियों को बैंक से कर्ज लिए बिना इक्विटी पूंजी जुटाने का अवसर देता है। नए शेयर जारी करने से प्राप्त पैसा कंपनी को मिलता है। वहीं, ऑफर फॉर सेल के माध्यम से मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं और बिक्री की रकम उन्हें मिलती है। सूचीबद्ध होने से कंपनी की पहचान, पारदर्शिता और भविष्य में पूंजी जुटाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
भारत का IPO बाजार बीते 3 वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। माता सिक्योरिटीज़ की जनवरी 2026 की शोध रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के दौरान मेनबोर्ड और छोटे एवं मध्यम उद्यमों को मिलाकर 951 IPO आए। इनके माध्यम से लगभग 4.43 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। हालांकि, विभिन्न शोध संस्थानों में गणना की पद्धति और शामिल निर्गमों के कारण आंकड़ों में थोड़ा अंतर मिलता है।
प्राइम डेटाबेस के हवाले से मनीकंट्रोल की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में अकेले मेनबोर्ड आईपीओ से लगभग 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। हालांकि, सूचीबद्ध होने पर मिलने वाला लाभ, निवेशकों की भागीदारी और शेयरों की मांग सभी कंपनियों में एक जैसी नहीं रही। अधिक सब्सक्रिप्शन का अर्थ निश्चित मुनाफ़ा नहीं है।
दिग्गज कंपनियों में रिलायंस समूह की जियो प्लेटफ़ॉर्म्स का 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर को खुल चुका है। आवेदन की अंतिम तारीख़ 23 अक्टूबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दूसरे दिन 22 अक्टूबर को भी इसे जबरदस्त मांग मिली। दूसरी ओर, Zepto, SBI म्यूचुअल फ़ंड, OYO की मूल कंपनी प्रिज्म और कार्ल्सबर्ग की भारतीय इकाई जैसी कंपनियां IOP की योजनाओं को लेकर चर्चा में हैं। इनकी अंतिम तारीख और मंज़ूरियां अलग-अलग चरणों में हैं।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) यानी सेबी IPO की निगरानी करता है। कंपनियों को पूंजी जारी करने और जानकारी सार्वजनिक करने संबंधी नियमों का पालन करना होता है। इनमें वित्तीय विवरण, कारोबारी जोखिम, प्रवर्तकों और जुटाई जाने वाली रकम के इस्तेमाल की जानकारी देना शामिल है। कंपनी को प्रस्तावित निर्गम का मसौदा विवरण-पत्र दाख़िल करना पड़ता है।
सामान्य बुक-बिल्डिंग आईपीओ में कम से कम 35 प्रतिशत हिस्सा खुदरा निवेशकों और 15 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए रखा जाता है। हालाँकि, विशेष श्रेणी के निर्गमों में अलग प्रावधान हो सकते हैं। निवेशक एएसबीए और यूपीआई से आवेदन कर सकते हैं। रकम आवंटन होने तक खाते में ब्लॉक रहती है। SEBI ने IPO बंद होने के बाद शेयर सूचीबद्ध करने की समयसीमा 3 कार्यदिवस निर्धारित की है।
IPO में निवेश करने से पहले कंपनी की कमाई, कर्ज़, मूल्यांकन, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की योजनाएं देखनी चाहिए। शेयर का भाव लिस्टिंग के दिन निर्गम मूल्य से नीचे भी जा सकता है। इसलिए IPO में भागीदारी केवल बाज़ार के उत्साह से नहीं, बल्कि वित्तीय समझ और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर होनी चाहिए।