
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
सुबह उठने पर तकिया गीला मिलना कई लोगों के लिए आम बात है, लेकिन यह स्थिति कभी शर्मिंदगी तो कभी चिंता की वजह बन जाती है। सवाल है कि नींद में मुंह से लार निकलना सामान्य है या किसी बीमारी का संकेत? आइए जानते हैं।
स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, कई मामलों में नींद के दौरान लार टपकना सामान्य है। लेकिन इससे बदबूदार सांस, डिहाइड्रेशन और असहजता हो सकती है। ऑस्ट्रेलियाई स्लीप-हब सीली के अनुसार ज्यादातर लोगों के लिए यह सामान्य है, लेकिन बहुत ज्यादा या अचानक शुरू हुई लार किसी और समस्या की ओर इशारा कर सकती है।
एक स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ का कहना है कि कभी-कभार की लार गहरी नींद में दिख सकती है, लेकिन बार-बार और अधिक लार किसी चिकित्सकीय या नींद संबंधी बीमारी का संकेत हो सकती है। एक्सपर्ट भी यही बताते हैं कि शिशुओं में मांसपेशियों पर नियंत्रण विकसित होने के दौरान यह आम बात है।
मुंह से लार निकलने के कई कारण हो सकते हैं। पहला कारण शरीर की बनावट से जुड़ा है। लार शरीर में 24 घंटे बनती है, यह प्रक्रिया सोते समय भी होती है। दिन में हम अनजाने में लगातार लार निगलते रहते हैं, जबकि नींद में निगलने की प्रतिक्रिया काफी कम हो जाती है, जिससे लार जमा हो सकती है।
सोने की स्थिति: इस स्थिति के कारण भी मुंह से लार निकल सकती है। करवट या पेट के बल सोने पर गुरुत्वाकर्षण के कारण लार जमा होकर बाहर निकल आती है। खासकर जब मुंह खुला रहे। इसके उलट पीठ के बल सोने वालों को गुरुत्वाकर्षण से मदद मिलती है।
मुंह से सांस लेने का कारण: इसके कारण भी लार निकल सकत है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी या साइनस से नाक बंद हो तो मुंह खुला रहता है। स्लीप फाउंडेशन के अनुसार ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सांस बार-बार रुकती है और मुंह से सांस लेने पर लार आसानी से बाहर निकलती है। दांत पीसने (ब्रक्सिज्म) के साथ भी अक्सर लार दिखती है।
एसिड रिफ्लक्स के कारण: एसिड रिफ्लक्स (GERD) भी मुंह से लार निकलने की वजह हो सकती है। GERD में एसिड से लार का बनना बढ़ सकता है। दवाएं भी असर डालती हैं। कुछ एंटीडिप्रेसेंट (SSRI), क्लोजापिन जैसी एंटीसाइकोटिक दवाएं और कुछ एंटीबायोटिक्स रात में लार बढ़ा सकती हैं। साथ ही कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियां भी लार का उत्पादन बढ़ा सकती हैं।
सोने की स्थिति बदलें: स्लीप फाउंडेशन के अनुसार सबसे आसान उपाय सोने की मुद्रा बदलना है, यानी पीठ के बल सोने की कोशिश करें।
नाक का इलाज: एलर्जी या जकड़न का इलाज कराएं, क्योंकि नाक से सांस लेने पर लार कम निकल सकती है।
पानी और सफाई: मणिपाल हॉस्पिटल्स के अनुसार मामूली मामलों में पर्याप्त पानी पीना और मुंह की सफाई रखना मदद करता है।
दांत पीसने पर: रात में मैंडिबुलर डिवाइस पहनने से पीसने और लार, दोनों के मामले घट सकते हैं।
दवा न छोड़ें: दवा को वजह मानकर उसे खुद बंद न करें, पहले डॉक्टर से बात करें।
गंभीर मामलों में डॉक्टर लार ग्रंथियों में बोटॉक्स इंजेक्शन सुझा सकते हैं और अत्यधिक लार (हाइपरसैलिवेशन) के गंभीर मामलों में सर्जरी की भी सलाह दी जा सकती है।
एक्सपर्ट के अनुसार, अचानक शुरू हुई या बिना वजह बढ़ती लार और हफ्तों-महीनों तक चलने वाली लार की जांच जरूर कराएं। अगर लार के साथ तेज खर्राटे, हांफकर जागना, पूरी नींद के बाद भी थकान, सीने में जलन या निगलने में परेशानी हो, तो स्लीप विशेषज्ञ या ENT डॉक्टर से मिलना चाहिए।
Updated on:
22 Oct 2026 12:57 pm
Published on:
22 Oct 2026 12:57 pm
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