
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
बातचीत के बीच अचानक जुबान लड़खड़ाना, हाथ से फोन फिसल जाना या चेहरे का एक हिस्सा लटक जाना। अगर ये लक्षण कुछ मिनट में खुद ठीक हो जाएं, तो ज्यादातर लोग इसे थकान या ब्लड प्रेशर का असर मानकर भूल जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह भविष्य में आने वाले स्ट्रोक की गंभीर चेतावनी हो सकती है। इसे चिकित्सा भाषा में ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) कहा जाता है।
जयपुर के नारायणा हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. गौरव गोयल के अनुसार TIA तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून का बहाव थोड़ी देर के लिए रुक जाता है। लक्षण स्ट्रोक जैसे होते हैं, पर जल्दी चले जाते हैं। मेडिकल साहित्य के अनुसार, आधुनिक परिभाषा "टिश्यू आधारित" है। लक्षण पूरी तरह खत्म हों और डिफ्यूजन-वेटेड MRI में कोई इस्केमिक घाव न दिखे। पुरानी परिभाषा में 24 घंटे की समय-सीमा थी, लेकिन यह सीमा मनमानी थी और ज्यादातर TIA एक घंटे से कम, अक्सर 10 मिनट से भी कम चलते हैं।
डॉ. गोयल के मुताबिक अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकना, एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने या समझने में दिक्कत, नजर में अचानक बदलाव और संतुलन बिगड़ना खतरे के संकेत हैं। अमेरिका में डॉक्टर स्ट्रोक पहचानने के लिए “BE FAST” (संतुलन, आंख, चेहरा, बांह, बोली, समय) का फॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं।
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि लक्षण जाने के बाद मरीज खुद को स्वस्थ मान लेता है। जीपी नोटबुक के अनुसार TIA के बाद तीन महीने में करीब 10% मरीजों को स्ट्रोक हो सकता है और इनमें से लगभग आधे मामले पहले दो दिनों में होते हैं। कुछ स्रोत जोखिम इससे ज्यादा बताते हैं।
अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार करीब 20% लोगों को TIA के 90 दिनों के भीतर स्ट्रोक हो सकता है, और पहले 48 घंटे सबसे जोखिम भरे होते हैं। आंकड़े अध्ययनों और इलाज की स्थिति के हिसाब से बदलते हैं, पर सभी में पहले दो दिन सबसे नाजुक माने गए हैं। डॉ. गोयल कहते हैं कि हर TIA के बाद स्ट्रोक होना जरूरी नहीं है।
सिर्फ लक्षणों का गायब होना यह तय नहीं करता कि TIA हुआ था या स्ट्रोक। RCEM की सामग्री के अनुसार, 24 घंटे में पूरी तरह ठीक हो चुके मरीजों में से 50% तक के MRI में असामान्यता दिख सकती है। ऐसे मामलों को अब मामूली इस्केमिक स्ट्रोक माना जाता है, और TIA व माइनर स्ट्रोक का इलाज लगभग एक जैसा होता है।
इसलिए डॉक्टर मरीज की हालत देखकर CT स्कैन, MRI, रक्त वाहिकाओं की जांच, ECG और अन्य टेस्ट कराते हैं। इनसे कारण का पता चलता है, जैसे दिल की अनियमित धड़कन या धमनियों का सिकुड़ना। ब्रिटेन में संदिग्ध TIA के 24 घंटे के भीतर विशेषज्ञ से जांच का मानक है। समय पर इलाज से भी फर्क पड़ता है। तुरंत जांच और इलाज से आगे स्ट्रोक का जोखिम 80% तक घट सकता है।
लक्षण दिखें तो खुद ठीक होने का इंतजार न करें। तुरंत इमरजेंसी मदद लें और लक्षण शुरू होने का समय नोट करें। डॉक्टरों की सलाह है कि "मिनी" शब्द से भ्रम में न पड़ें, क्योंकि कुछ मिनट का संकेत भी बड़े खतरे की घंटी हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।)
Updated on:
21 Oct 2026 08:22 pm
Published on:
21 Oct 2026 08:22 pm
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