
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Patrika Studio)
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) और यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
TPCI के एक बयान के मुताबिक, यह समझौता संस्थागत स्तर पर व्यापारिक सहयोग का नया ढांचा तैयार करेगा। इसके तहत दोनों देशों की कंपनियों को जोड़ने, व्यापार मिशनों को बढ़ावा देने, बाजार संबंधी जानकारी साझा करने और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए नए अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समझौते के साथ ही लंदन में टीपीसीआई द्वारा एक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) मैचमेकिंग कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसमें भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने भाग लिया।
खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र को नए व्यापार ढांचे के तहत सबसे अधिक संभावनाओं वाले क्षेत्रों में माना जा रहा है। ब्रिटेन हर साल लगभग 50.68 अरब डॉलर मूल्य के प्रोसेस्ड फूड का आयात करता है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 0.6 प्रतिशत यानी 30.95 करोड़ डॉलर है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
CETA के तहत प्रोसेस्ड फूड पर ब्रिटेन द्वारा लगाए जाने वाले 70 प्रतिशत तक के शुल्क, झींगा (श्रिम्प) पर 4.2 से 8.5 प्रतिशत तक के शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर लगने वाली ड्यूटी समाप्त कर दी गई है, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा।
TPCI के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने कहा कि यह समझौता भारत-यूके व्यापारिक संबंधों को नीति स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक साझेदारी में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा- भारत-यूके सीईटीए लागू होने के बाद टीपीसीआई और यूकेआईबीसी द्विपक्षीय व्यापार विकास को नई गति देने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगे, ताकि मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसर जमीन पर दिखाई दें।
TPCI के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने कहा कि अब भारतीय उत्पादों की 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिल रही है। प्रोसेस्ड फूड पर 70 प्रतिशत तक के शुल्क समाप्त होने से भारतीय खाद्य निर्यातकों के लिए परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है।
टीपीसीआई प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस, इनोवेशन, साइंस एंड ट्रेड (बीआईएसटी), लंदन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एलसीसीआई) और स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के अधिकारियों से भी मुलाकात की। टीपीसीआई के अनुसार, दोनों पक्षों ने व्यापार सहयोग को बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए कारोबारी समर्थन तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा की।
भारत और ब्रिटेन के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 48 अरब पाउंड (करीब 65 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है। उद्योग जगत का मानना है कि सीईटीए के लागू होने के बाद भारतीय खाद्य निर्यातक 18.6 लाख भारतीय मूल के लोगों के पारंपरिक बाजार से आगे बढ़कर ब्रिटेन के खुदरा और खाद्य सेवा क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। इससे भारतीय निर्यात, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
Updated on:
22 Oct 2026 01:50 pm
Published on:
22 Oct 2026 01:50 pm
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