
जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। 27 अक्टूबर के मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज विधायकों का एक समूह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने चुनौती बनकर उभरा है। वहीं, श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी 3 नवंबर को NC और लोकसभा से इस्तीफा देने वाले हैं।
शुक्रवार (30 अक्टूबर) को दोपहर श्रीनगर एयरपोर्ट के पास लोलाब के विधायक कैसर जमशेद लोन के घर करीब 19 विधायक जुटे। यह बैठक लगभग 4 घंटे चली और जम्मू व कश्मीर, दोनों संभागों के विधायक इसमें शामिल हुए। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कैसर जमशेद लोन के घर हुई बैठक में 24 विधायकों के शामिल होने का दावा किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में विधायकों ने ज्ञापन तैयार किया है। इसमें मंत्रिमंडल के नए सिरे से गठन, 2 साल पूरे कर चुके मंत्रियों को हटाने और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी की छुट्टी की मांग है। राज्यसभा सांसद शम्मी ओबेरॉय को हटाने की मांग भी उठी। ज्ञापन में 2024 के चुनावी घोषणापत्र को समयबद्ध तरीके से लागू करने और राज्य का दर्जा व अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए संघर्ष तेज करने की बात भी है। ज्ञापन अभी पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को सौंपा जाना है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के कश्मीर प्रांतीय अध्यक्ष शौकत मीर ने विधायकों की बगावत मानने से इनकार किया। उनके मुताबिक, बैठक 'दोस्ताना माहौल में भोजन पर' हुई। शौकत मीर का कहना है कि वरिष्ठ विधायक अपनी बात मुख्यमंत्री से करेंगे। शौकत मीर के मुताबिक, पार्टी में बगावत जैसी कोई बात नहीं है।
27 अक्टूबर को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर स्थित लोक भवन में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को शपथ दिलाई। निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा (छंब) को हटाया गया। केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रिपरिषद की सीमा विधानसभा की 90 सीटों का 10 प्रतिशत, यानी मुख्यमंत्री समेत 9 हैं, जो अब पूरी हो चुकी हैं।
उपराज्यपाल के आदेश से सागर को राजस्व, बिजली विकास, कानून और चुनाव समेत कई विभाग मिले। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को लोक निर्माण, उद्योग-वाणिज्य, श्रम व कौशल विकास दिए गए। 9 में से 7 मंत्री कश्मीर घाटी से हैं और जम्मू संभाग से सिर्फ चौधरी और जावेद राणा हैं।
भाजपा के नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने इसे क्षेत्रीय असंतुलन बताया। कांग्रेस ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने तक मंत्रिमंडल में शामिल न होने की अपनी नीति दोहराई। शपथ से पहले 6 बार के विधायक मुबारक गुल की नाराजगी सामने आई थी। उनके समर्थकों ने पार्टी मुख्यालय पर नारेबाजी की, जिसके बाद फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें सागर की जगह महासचिव बनाया।
आगा रुहुल्लाह की नाराजगी इस ताजा विवाद से पहले की है। 24 अगस्त को फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें चुनौती दी कि अगर जनता ने उन्हें व्यक्तिगत भरोसे पर चुना है, तो इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ें। 28 अगस्त को रुहुल्लाह ने एनसी और लोकसभा छोड़ने का ऐलान किया।
तारीख उन्होंने अपने पिता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि 3 नवंबर रखी। हंस इंडिया के अनुसार उन्होंने हाल में कहा कि उनके फैसले में कुछ नहीं बदला है। उनके जाने के बाद एनसी के पास लोकसभा में सिर्फ अनंतनाग-राजौरी के मियां अल्ताफ अहमद बचेंगे। सीट खाली होने पर उपचुनाव होगा।