31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

GST, म्यूचुअल फंड से लेकर मोबाइल फोन तक, बदल रहे कई नियम: जानिए 1 नवंबर से कौन से बदलाव होंगे?

1 नवंबर 2026 से कई नए नियम लागू होंगे। आइए जानते हैं, GST, म्यूचुअल फंड से लेकर मोबाइल फोन तक, कौन से बदलाव हो रहे हैं?
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Vinay Shakya

•

Updated: 31 Oct 2026, 7:09 PM IST

New rules effect from 1 November 2026

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

हर नए महीने की शुरुआत में कुछ नए नियम लागू होते हैं। ऐसे में 1 नवंबर से भी कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर सीधे आपकी जेब पर पड़ सकता है। इसमें म्यूचुअल फंड, जीएसटी और पेंशन जैसे नियम शामिल हैं।

म्यूचुअल फंड स्कीमों में बदलाव

म्यूचुअल फंड स्कीमों में एक नवंबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगले महीने की शुरुआत से सभी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान को डिफॉल्ट ऑप्शन बनाना है। वहीं, अगर कोई ग्राहक रेगुलर प्लान के विकल्प को चुनता है तो एएमसी कंपनियों को इसके ज्यादा एक्सपेंस रेशियो के बार में बताना होगा।

पेंशनधारकों के लिए बदलाव

80 वर्ष से कम के पेंशनधारक वार्षिक आयु प्रमाणपत्र 1-30 नवंबर के बीच में जमा कर सकते हैं। वहीं, 80 वर्ष से अधिक के पेंशधारकों के लिए यह सुविधा 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। पेंशनधारक बैंक शाखा में जाकर फिजिकल रूप से या फिर आधार-आधारित ऑथेंटिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके 'जीवन प्रमाण' सुविधा के जरिए डिजिटल रूप से अपना सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं।

DLC सुविधा शुरू

PFRDA ने 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (UPS) के सब्सक्राइबर्स के लिए 'यूपीएस जीवन सेतु डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट' (डीएलसी) सुविधा भी शुरू की है। पात्र पेंशनभोगियों को 30 नवंबर तक 'प्रोटीन ई-गव' ऐप के जरिए अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होगा।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटर के लिए कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (सीएनएपी) सेवा को एक नवंबर से लागू करने को अनिवार्य किया है। इससे यूजर्स को इनकमिंग कॉल करने वाले के नंबर के साथ-साथ नाम दोनों दिखाई देंगे। इससे कॉलर की पहचान करना आसान हो जाएगा।

GST में बदलाव

जीएसटी में 1 नवंबर से कई बदलाव लागू होने वाले हैं। इन संशोधनों में आपूर्ति के बाद दी जाने वाली छूट, क्रेडिट नोट और जीएसटी रिफंड शामिल हैं। इनमें कर योग्य मूल्य से पात्र बिक्री-पश्चात छूटों को बाहर करने की संशोधित शर्तें भी हैं, जिनमें संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट को वापस लेने की आवश्यकता भी शामिल है। इन संशोधनों में रिफंड प्रावधानों को भी शामिल किया गया है, जिनमें उन व्यवसायों से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं जो इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का सामना कर रहे हैं।