
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)
डिजिटल क्रांति के इस दौर में साइबर अपराध के तरीके इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि अब केवल ओटीपी (OTP) या बैंक पासवर्ड छिपाना ही काफी नहीं रह गया है। साइबर अपराधियों ने अब ठगी और ब्लैकमेलिंग का एक बेहद खतरनाक और नया तरीका खोज निकाला है, जिसे तकनीकी और वैज्ञानिक भाषा में 'बॉडी हैक' (Body Hack या Biohacking) कहा जा रहा है।
मूल रूप से इंसानी क्षमताओं और स्वास्थ्य को सुधारने के लिए इस्तेमाल होने वाली यह तकनीक अब हैकर्स का सबसे घातक हथियार बन चुकी है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब ठग न सिर्फ आपके गैजेट्स को, बल्कि आपके शरीर में लगे मेडिकल उपकरणों, आपके बायोमेट्रिक डेटा और यहाँ तक कि आपके दिमाग को भी रिमोटली कंट्रोल कर रहे हैं।
आसान शब्दों में कहें तो जब साइबर अपराधी किसी इंसान के शरीर से जुड़े नेटवर्क, स्मार्ट मेडिकल गैजेट्स, बायोमेट्रिक पहचान या उसके मनोवैज्ञानिक व्यवहार (डर और लालच) को हैक कर लेते हैं, तो इसे साइबर सुरक्षा की दुनिया में 'बॉडी हैकिंग' कहा जाता है। आज के समय में जब लोग अपनी सेहत की निगरानी के लिए शरीर में एडवांस्ड और इंटरनेट से चलने वाले उपकरण लगवा रहे हैं, ठगों ने उनमें सेंधमारी शुरू कर दी है।
साइबर एक्सपर्ट्स और जांच एजेंसियों के अनुसार, साइबर ठग 'बॉडी हैक' को मुख्य रूप से 3 स्तरों पर अंजाम दे रहे हैं:
3. 'माइंड हैकिंग' और डिजिटल अरेस्ट का आतंक: यह बॉडी हैकिंग का सबसे मानसिक रूप है, जिसे 'सोशल इंजीनियरिंग' भी कहते हैं। इसमें ठग पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर पीड़ित को वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित की जैविक प्रवृत्तियों जैसे अत्यधिक डर और घबराहट का फायदा उठाते हैं। 'डिजिटल अरेस्ट' के दौरान वे पीड़ित को घंटों कैमरे के सामने बिना हिले-डुले बैठने पर मजबूर कर देते हैं। इस स्थिति में पीड़ित का दिमाग पूरी तरह उनके नियंत्रण में आ जाता है और वह डर के मारे अपनी सारी जमापूंजी ठगों के हवाले कर देता है।
Updated on:
31 Oct 2026, 4:04 PM IST
Published on:
31 Oct 2026, 4:04 PM IST
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