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केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क हटाया, डीजल और ATF पर ड्यूटी को बढ़ाया, क्या होगा असर?

केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर विशेष निर्यात शुल्क में वृद्धि की है।
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भारत

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Vinay Shakya

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Updated: 31 Oct 2026, 5:17 PM IST

export duty on diesel and atf

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है। साथ ही, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर विशेष निर्यात शुल्क में क्रमश: 3 रुपए प्रति लीटर और 0.50 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी अधिसूचना में दी गई।

क्या बदलाव हुआ?

नई संशोधित दरों के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क अब शून्य हो गया है, जो कि पहले 2.5 रुपए प्रति लीटर था। डीजल के निर्यात पर शुल्क बढ़कर 11.50 रुपए प्रति लीटर हो गया है, जो कि पहले 8.5 रुपए प्रति लीटर था। एटीएफ के निर्यात पर शुल्क को बढ़कर 11 रुपए प्रति लीटर कर दिया है, जो कि पहले 10.50 रुपए प्रति लीटर था।

सरकार ने क्यों बदले नियम?

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के कारण मार्च के अंत में निर्यात शुल्क लागू किए गए थे। इसकी समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा हर 15 दिन में दी जाती है। इसका उद्देश्य ऐसे समय में रिफाइनरों को घरेलू खरीदारों के मुकाबले विदेशी बाजारों को प्राथमिकता देने से रोकना है, जब वैश्विक स्तर पर कीमतें निर्यात के लिए बेहतर लाभ प्रदान कर रही हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ने और हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। अब ब्रेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम बढ़कर 113.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। बीते एक हफ्ते में इसमें 1.55 प्रतिशत और बीते एक महीने में 15.71 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। वहीं, पिछले तीन महीनों में यह करीब 26 प्रतिशत बढ़ चुका है।

संघर्ष शुरू होने से पहले, भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता था। यह एक प्रमुख समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। इस रास्ते से होने वाले व्यापारिक जहाजों के आवागमन में बाधा आने के कारण, भारत को तेल मंगाने के लिए अन्य विकल्पों की तलाश करनी पड़ी है।

क्या होगा असर?

केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है। साथ ही, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर विशेष निर्यात शुल्क में 3 रुपए प्रति लीटर और 0.50 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

पेट्रोल निर्यात पर शुल्क शून्य होने से रिफाइनरियों को विदेश में पेट्रोल बेचना आसान और लाभदायक हो सकता है, जिससे पेट्रोल का निर्यात बढ़ सकता है।वहीं, डीजल पर 3 रुपये और एटीएफ पर 50 पैसे प्रति लीटर शुल्क बढ़ाने से इनका निर्यात कम आकर्षक बनेगा। इससे अधिक डीजल और विमान ईंधन घरेलू बाजार में रहेगा, जिससे आपूर्ति स्थिर रहेगी और कमी का खतरा घटेगा।

घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि घरेलू खपत पर उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं है। कुल मिलाकर, यह कदम अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार आपूर्ति को संतुलित रखने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए है। रिफाइनरियों के निर्यात मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं।