
Ola uber new rule 2026: सुबह ऑफिस पहुंचने की जल्दी हो, रेलवे स्टेशन जाना हो या रात में अस्पताल पहुंचना हो, आज लाखों लोगों के लिए मोबाइल ऐप से कैब या ऑटो बुक करना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इस सुविधा के साथ कुछ पुरानी परेशानियां भी लगातार सामने आती रही हैं। कैब बुक होने के बाद ड्राइवर का यात्रा रद्द कर देना, किराये को लेकर विवाद और यात्रा शुरू होने से पहले ही टिप का विकल्प सामने आ जाना, इन सब पर अब सरकार की निगरानी बढ़ रही है।
अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसका सीधा संबंध कैब बुक करने वाले हर यात्री से है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ओला, उबर और दूसरे सवारी एग्रीगेटरों को यात्रा स्वीकार होने से पहले या यात्रा पूरी होने से पहले ऐप पर टिप के लिए प्रेरित करने वाले विकल्प हटाने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने इसे मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 के अनुरूप नहीं माना है।
इस बदलाव को समझना जरूरी है। सरकार ने टिप को खत्म नहीं किया है। यात्री अपनी इच्छा से चालक को टिप दे सकता है। बदलाव इस बात को लेकर है कि ऐप यात्रा शुरू होने से पहले या यात्रा के दौरान यात्री को अतिरिक्त रकम देने के लिए प्रेरित न करे।
मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक ऐसे टिप विकल्प या संकेत हटाए जाने हैं, जो यात्रा स्वीकार होने से पहले या यात्रा पूरी होने से पहले दिखाई देते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टिप वास्तव में यात्री की संतुष्टि पर आधारित स्वैच्छिक भुगतान रहे, न कि कैब मिलने या यात्रा बेहतर होने की उम्मीद में दिया जाने वाला अतिरिक्त भुगतान। यानी अगर ऐप पर बुकिंग के समय यह संकेत मिलें कि टिप देने से आपको बेहतर सेवा या जल्दी कैब मिलने की संभावना है, तो ऐसी व्यवस्था अब नियामकीय सवालों के घेरे में है।
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि पूरे देश में एक ही कैंसिलेशन नियम लागू नहीं है। केंद्र के दिशानिर्देशों के अलावा अलग-अलग राज्य अपने नियम बना रहे हैं। महाराष्ट्र ने जुलाई 2026 में अपने महाराष्ट्र मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम, 2026 अधिसूचित किए। इन नियमों में एग्रीगेटर के लिए किराये, चालक के हिस्से, रद्दीकरण और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान किए गए हैं।
उपलब्ध नियमों के अनुसार, स्वीकार की गई सवारी को बिना वैध कारण रद्द करने वाले चालक पर किराये का 10 प्रतिशत, अधिकतम 100 रुपए तक का दंड लगाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ संवेदनशील यात्राओं, जैसे हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और अस्पताल से जुड़ी सवारी के लिए रद्दीकरण पर ज्यादा सख्ती रखी गई है।
इसका सीधा मतलब यह है कि 'यात्री के लिए बुकिंग स्वीकार हो गई, अब कैब जरूर आएगी' वाली व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, हर कैंसिलेशन पर चालक को दोषी नहीं माना जाएगा। वैध कारण होने पर अलग स्थिति हो सकती है। इसलिए किसी यह मान लेना सही नहीं होगा कि ड्राइवर द्वारा हर कैंसिलेशन पर स्वतः जुर्माना लगेगा।
महाराष्ट्र के 2026 नियम सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं हैं। इनमें चालक की कमाई को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। नियमों के अनुसार एग्रीगेटर के जरिए ली गई सवारी में चालक को कुल किराये का कम से कम 80 प्रतिशत मिलना चाहिए। वहीं सुविधा शुल्क आधारित मॉडल में चालक को आधार किराये का कम से कम 95 प्रतिशत देने का प्रावधान बताया गया है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कैब के अंतिम किराये और चालक को वास्तव में मिलने वाली रकम के बीच का अंतर लंबे समय से बहस का विषय रहा है।
महाराष्ट्र के 2026 नियमों में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत किराये को आधार किराया माना गया है। एग्रीगेटर इस आधार किराये से 25 प्रतिशत तक कम किराया ले सकते हैं और सामान्य परिस्थितियों में अधिकतम 1.5 गुना तक किराया ले सकते हैं।
यानी यात्री के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि ऐप पर दिख रहा किराया हमेशा पूरी तरह कंपनी की मनमानी से तय होने वाला आंकड़ा नहीं है, राज्य के नियामकीय ढांचे की भी भूमिका है।
यह मामला सिर्फ नियम बनाने तक सीमित नहीं है। 13 अगस्त 2026 को बेंगलुरु परिवहन विभाग ने ओला, उबर और रैपिडो को कथित रूप से सरकारी निर्धारित किराये से अधिक वसूली के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किए। कंपनियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि उन्होंने निर्धारित किराया व्यवस्था का कथित रूप से पालन क्यों नहीं किया।
यह घटनाक्रम बताता है कि 2026 में ऐप आधारित परिवहन सेवाओं की निगरानी सिर्फ कागज पर नहीं है। राज्यों के परिवहन विभाग किराया और संचालन संबंधी नियमों के पालन को लेकर कंपनियों से जवाब मांग रहे हैं।
कैंसिलेशन के नियम पूरे देश में एक जैसे नहीं हैं। केंद्र के 'मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशा निर्देश, 2025' एक सामान्य ढांचा देते हैं, लेकिन असल में लागू नियम राज्य सरकार तय करती है।
- केंद्र के दिशानिर्देश (Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025)
ये पूरे देश के लिए आधार हैं:
राज्यों को इन दिशानिर्देशों को अपनाने या अपने हिसाब से बदलने की छूट दी गई है।
- महाराष्ट्र (Motor Vehicle Aggregator Rules, 2026) - सबसे विस्तृत नियम
- उत्तर प्रदेश (UP Aggregator Rules, 2026)
- कर्नाटक (बेंगलुरु सहित)
अभी तक महाराष्ट्र जैसा विस्तृत और बाध्यकारी कैंसिलेशन जुर्माना नियम सार्वजनिक रूप से अधिसूचित नहीं हुआ है।
कंपनी (ओला, उबर आदि) अपने ऐप के अंदर ही अकाउंट फ्लैगिंग या अस्थायी ब्लॉक जैसी कार्रवाई करती हैं।
यात्री और ड्राइवर संघ महाराष्ट्र जैसे नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं।
- अन्य राज्य (दिल्ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, गुजरात आदि)
ज्यादातर राज्यों में अभी तक महाराष्ट्र या यूपी जैसे विस्तृत और स्पष्ट कैंसिलेशन जुर्माना नियम अधिसूचित नहीं हुए हैं।
वे मुख्य रूप से केंद्र के 2025 दिशा निर्देशों पर निर्भर हैं या अपने पुराने नियमों से काम चला रहे हैं।
कुल मिलाकर,- सबसे सख्त और स्पष्ट नियम महाराष्ट्र में हैं। उत्तर प्रदेश में भी केंद्र के करीब नियम लागू हो चुके हैं। बाकी ज्यादातर राज्यों में अभी भी केंद्र के सामान्य दिशा निर्देश (10% / 100 रुपए) ही आधार हैं। नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए अपने राज्य के परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप में दिखने वाली नीति जरूर चेक करें।
ऐसा सीधे तौर पर कहना अभी सही नहीं होगा। क्योंकि अलग-अलग राज्यों में किराया व्यवस्था और एग्रीगेटर नियम अलग हो सकते हैं। महाराष्ट्र के 2026 नियम महाराष्ट्र में लागू हैं, जबकि बेंगलुरु में सरकारी किराये से ज्यादा वसूली को लेकर अलग नियामकीय कार्रवाई हुई है।
इसी तरह टिप से जुड़ा केंद्र का अगस्त 2026 का निर्देश एक अलग मुद्दा है और इसका लक्ष्य यात्रा से पहले या यात्रा के दौरान टिप के लिए प्रेरित करने वाले विकल्पों को हटाना है।
पहली- कैब बुक करते समय किराये का स्क्रीनशॉट रखिए।
दूसरी- ड्राइवर द्वारा कैंसिल किए जाने पर ऐप में दिखने वाला कारण और समय सुरक्षित रखिए।
तीसरी- टिप को कभी अनिवार्य भुगतान न समझें। यह स्वैच्छिक है।
चौथी- अगर किराया सरकारी निर्धारित व्यवस्था से अधिक लगता है, तो बिल और बुकिंग की जानकारी संभालकर रखें और संबंधित शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करें।
पांचवीं- यह मानकर न चलें कि महाराष्ट्र का नियम मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश या किसी दूसरे राज्य में भी बिल्कुल उसी तरह लागू है। राज्यवार नियम अलग हो सकते हैं।
2026 के घटनाक्रम को एक साथ देखें तो, तस्वीर साफ होती है। एक तरफ महाराष्ट्र ने एग्रीगेटर कंपनियों के लिए किराया, चालक की कमाई और कैंसिलेशन जैसे मुद्दों पर विस्तृत नियम लागू किए हैं। दूसरी तरफ केंद्र ने प्री-राइड और मिड-राइड टिप प्रॉम्प्ट पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। वहीं बेंगलुरु में अगस्त 2026 में ज्यादा किराया वसूलने के आरोपों पर ओला, उबर और रैपिडो को नोटिस दिए गए।
इसका सबसे बड़ा असर यह है कि कैब बुकिंग अब सिर्फ 'ऐप खोलो, किराया देखो और सवारी कर लो' वाली सेवा नहीं रह गई है। सरकार धीरे-धीरे यह तय करने की कोशिश कर रही है कि ऐप, यात्री और चालक, तीनों की जिम्मेदारी क्या होगी। और यात्री के लिए सबसे जरूरी बात यही है। अगली बार कैब बुक करते समय सिर्फ किराया मत देखिए। कैंसिलेशन की शर्त, अतिरिक्त भुगतान और ऐप पर दिखने वाले विकल्प भी देखिए।