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50+ की उम्र में हड्डियों की सेहत: क्या खाएं, क्या न खाएं और कैसे रखें ख्याल?

बुढ़ापे में हड्डियों को कमजोर और खोखला होने से कैसे बचाएं? जानें सही डाइट, कैल्शियम, विटामिन D और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के आसान हेल्थ टिप्स।
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Aug 21, 2026
old age
कमजोर हड्डियों को कहें अलविदा (AI)

उम्र बढ़ने के साथ मानव शरीर में कई जैविक बदलाव आते हैं, जिनमें सबसे संवेदनशील बदलाव हड्डियों के घनत्व (Bone Density) में कमी आना है। 50 की उम्र पार करते ही हड्डियां अंदर से खोखली और कमजोर होने लगती हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) या ओस्टियोपेनिया (Osteopenia) कहा जाता है। चूंकि यह स्थिति शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है, इसलिए इसे 'साइलेंट थीफ' (शांत चोर) भी कहा जाता है। बुजुर्गों में फ्रैक्चर का सबसे बड़ा कारण हड्डियों की यही कमजोरी और संतुलन बिगड़ने से गिरना है। सही पोषण, नियमित धूप, उचित व्यायाम और घरेलू सावधानियों को अपनाकर बुढ़ापे में भी हड्डियों को फौलादी और सक्रिय रखा जा सकता है।

उम्र के साथ हड्डियों में होने वाले बदलाव और ऑस्टियोपोरोसिस

हड्डियां जीवित ऊतक (living tissues) हैं, जिनमें पुरानी हड्डियों का क्षय और नई हड्डियों का निर्माण लगातार चलता रहता है। युवावस्था (लगभग 20 से 30 वर्ष की आयु) में पीक बोन मास (Peak Bone Mass) अधिकतम होता है। इसके बाद नई हड्डियों के बनने की गति पुरानी हड्डियों के नष्ट होने की दर से धीमी हो जाती है।

महिलाओं में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट के कारण हड्डियों का नुकसान तेजी से होता है। पुरुषों में भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी और पोषण के अभाव के कारण 60 वर्ष के बाद हड्डियों का क्षरण तेज हो जाता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो कूल्हे (Hip), रीढ़ की हड्डी (Spine) और कलाई (Wrist) में फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

हड्डियों के लिए जरूरी पोषण और संतुलित खान-पान

बुजुर्गों की ऊर्जा की आवश्यकता (कैलोरी की जरूरत) कम हो जाती है, लेकिन सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) की मांग बढ़ जाती है। हड्डियों की मजबूती के लिए केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन में लक्षित पोषक तत्वों की मौजूदगी अनिवार्य है:

  • कैल्शियम की दैनिक खुराक: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार बुजुर्गों को प्रतिदिन 800 से 1200 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इसके लिए दूध, दही, पनीर, रागी (मंडुआ), तिल, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, टोफू और सोयाबीन को नियमित आहार में शामिल करें।
  • विटामिन D3 का अवशोषण: कैल्शियम चाहे कितना भी खाया जाए, शरीर उसे बिना विटामिन D के अवशोषित नहीं कर सकता।
  • पर्याप्त प्रोटीन: हड्डियां लगभग 50% प्रोटीन से बनी होती हैं। दालें, अंकुरित अनाज, अंडे, मछली, भुने चने और नट्स हड्डियों की संरचना और मांसपेशियों की मजबूती के लिए आवश्यक हैं।
  • मैग्नीशियम और विटामिन K2: हरी सब्जियों, बीजों और फलों से मिलने वाला मैग्नीशियम हड्डियों के मैट्रिक्स को मजबूत करता है, जबकि विटामिन K2 कैल्शियम को सही जगह (हड्डियों में) पहुंचाने का काम करता है।

धूप का सही उपयोग और विटामिन D सप्लीमेंटेशन

भारत जैसे धूप वाले देश में भी बुजुर्गों में विटामिन D की कमी बहुत व्यापक है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की धूप से विटामिन D संश्लेषित करने की क्षमता कम हो जाती है।

  • धूप लेने का सही समय: बिना सनस्क्रीन लगाए चेहरे, गर्दन और दोनों बाहों को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच कम से कम 20 से 30 मिनट तक धूप दिखाएं।
  • सप्लीमेंट्स का महत्व: यदि प्राकृतिक धूप पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रही हो, तो डॉक्टर की सलाह से 800–2000 IU/दिन विटामिन D3 सप्लीमेंट लेना चाहिए।
  • भोजन से स्रोत: मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, अंडे की जर्दी और फैटी फिश में सीमित मात्रा में विटामिन D पाया जाता है।

शारीरिक गतिविधियां, संतुलन और सुरक्षित व्यायाम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देता है। हड्डियों की सेहत के लिए व्यायाम को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

बुजुर्गों में गिरने (Falls) से बचाव के व्यावहारिक उपाय

बुढ़ापे में 90% से अधिक हिप फ्रैक्चर गिरने के कारण होते हैं। फ्रैक्चर की रोकथाम का आधा हिस्सा गिरने से बचाव पर निर्भर करता है:

  • घर का वातावरण सुरक्षित बनाएं: कमरों और गलियारों में पर्याप्त रोशनी रखें, बाथरूम में एंटी-स्किड मैट और ग्रैब बार्स (पकड़ने वाले हैंडल) लगवाएं।
  • फर्श को बाधा मुक्त रखें: loose कालीन, फर्श पर फैले बिजली के तार या गीले फर्श को तुरंत ठीक करें।
  • उचित जूते: रबर सोल वाले, आरामदायक और गैर-फिसलन (non-slip) वाले जूते या चप्पल पहनें।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच: नजर (आंखों की दृष्टि) और कानों की समय पर जांच कराएं। कुछ दवाएं (जैसे नींद की गोली या ब्लड प्रेशर की दवा) चक्कर आने का कारण बन सकती हैं, इसलिए डॉक्टर से दवाओं की समीक्षा कराएं।

हड्डियों की जांच: DEXA स्कैन और T-Score का महत्व

हड्डियों के स्वास्थ्य का सटीक मूल्यांकन करने के लिए बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) टेस्ट, जिसे DEXA स्कैन कहा जाता है, सबसे प्रामाणिक माध्यम है।

ICMR ने 20–29 वर्ष के स्वस्थ भारतीय वयस्कों के आधार पर पीक बोन मिनरल डेंसिटी (PBMD) के संदर्भ मानक स्थापित किए हैं। जांच रिपोर्ट में मिलने वाले T-Score का वर्गीकरण इस प्रकार है।

  • सामान्य (Normal): T-score -1.0 या उससे अधिक
  • ओस्टियोपेनिया (हड्डियों का हल्का पतलापन): T-score -1.0 से -2.5 के बीच
  • ऑस्टियोपोरोसिस (गंभीर कमजोरी): T-score -2.5 या उससे नीचे
  • 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं और 70 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को हर 2 से 3 साल में एक बार BMD टेस्ट अवश्य कराना चाहिए।

हानिकारक आदतें: हड्डियों के दुश्मन

  • अत्यधिक नमक का सेवन: भोजन में ज्यादा नमक मूत्र के जरिए कैल्शियम के क्षरण को बढ़ा देता है।
  • कैफीन और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स: दिन में 3-4 कप से अधिक चाय/कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स हड्डियों से खनिजों को खींचते हैं।
  • तंबाकू और धूम्रपान: निकोटीन हड्डियों के निर्माण वाली कोशिकाओं (Osteoblasts) को निष्क्रिय करता है।
  • शराब का सेवन: शराब कैल्शियम के अवशोषण को बाधित करती है और गिरने का जोखिम बढ़ाती है।

डॉक्टर से परामर्श कब लेना चाहिए?

यदि लगातार पीठ दर्द, कूल्हे या घुटनों में तेज दर्द, ऊंचाई में कमी (रीढ़ की हड्डियों के दबने से), झुककर चलने की स्थिति बन रही हो, या बिना किसी बड़े आघात के मामूली झटके से फ्रैक्चर हो गया हो, तो तुरंत ऑर्थोपेडिक या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट विशेषज्ञ से परामर्श लें।

हड्डियों की सेहत एक दिन का काम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा है। रोजाना 20 मिनट की धूप, ताजी सब्जियों व डेयरी उत्पादों से युक्त आहार, 30 मिनट की सैर और सुरक्षित वातावरण अपनाकर आप लंबी उम्र तक बिना किसी सहारे के आत्मनिर्भर और गतिशील जीवन जी सकते हैं।

Updated on:
21 Aug 2026 03:23 pm
Published on:
21 Aug 2026 03:23 pm