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काली सरसों या पीली सरसों, किसका तेल आपके लिए ज्यादा बेहतर है?

Mustard Oil Benefits : काली और पीली सरसों के तेल में क्या अंतर है? जानिए स्वाद, पोषण, तीखेपन और सेहत के लिहाज से कौन सा तेल खाना पकाने के लिए ज्यादा बेहतर विकल्प है।
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Mustard Oil Benefits

Mustard Oil Benefits : काली या पीली कौन सी सरसों का तेल है बेस्ट, PC- Chatgpt

भारत में सरसों का तेल सिर्फ खाना पकाने का माध्यम नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों की पारंपरिक रसोई का अहम हिस्सा है। उत्तर भारत से लेकर बिहार, बंगाल और पूर्वोत्तर तक सरसों के तेल का इस्तेमाल सब्जी, मछली, अचार और कई तरह के पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है।

लेकिन बाजार में सरसों के तेल की अलग-अलग किस्में देखकर अक्सर सवाल उठता है। काली सरसों का तेल ज्यादा अच्छा है या पीली सरसों का? क्या दोनों के पोषण में बड़ा अंतर होता है? क्या ज्यादा तीखा तेल ज्यादा फायदेमंद होता है? और क्या कच्ची घानी का तेल चुनना बेहतर है?

इन सवालों का जवाब सिर्फ सरसों के रंग में नहीं छिपा है। तेल की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और सेवन की मात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

पहले समझिए काली और पीली सरसों में अंतर

काली सरसों के दाने आमतौर पर छोटे और गहरे रंग के होते हैं, जबकि पीली सरसों के दाने हल्के पीले या भूरे रंग के और अपेक्षाकृत बड़े होते हैं। दोनों से तेल निकाला जा सकता है, लेकिन उनके स्वाद और सुगंध में अंतर होता है।

तुलनाकाली सरसोंपीली सरसों
दानेछोटे और गहरेबड़े और हल्के
स्वादज्यादा तीखाअपेक्षाकृत हल्का
खुशबूतेजअपेक्षाकृत हल्की
पारंपरिक उपयोगअचार, मछली, तेज स्वाद वाले व्यंजनसामान्य खाना पकाने में
तेल का रंगपीला से गहरा पीलाआमतौर पर हल्का पीला
पोषणकिस्म और प्रसंस्करण पर निर्भरकिस्म और प्रसंस्करण पर निर्भर

काली सरसों का तेल क्यों ज्यादा तीखा लगता है?

सरसों के तीखे स्वाद और तेज खुशबू के पीछे ग्लूकोसाइनोलेट्स से बनने वाले यौगिक, खासकर allyl isothiocyanate, महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरसों के बीज टूटने और पानी के संपर्क में आने पर एंजाइमेटिक प्रक्रिया से ये तीखे यौगिक बनते हैं। इसी वजह से काली सरसों से बने तेल या उससे तैयार भोजन में आपको ज्यादा तेज स्वाद और खुशबू महसूस हो सकती है।

यही स्वाद कई पारंपरिक व्यंजनों की पहचान है। खासकर अचार, मछली और कुछ देसी सब्जियों में सरसों के तेल की तीखी खुशबू पसंद की जाती है।

क्या काली सरसों का तेल स्वास्थ्य के लिए ज्यादा अच्छा है?

जरूरी नहीं। काली सरसों के तेल का स्वाद ज्यादा तीखा होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसमें स्वास्थ्य लाभ भी उतने ही ज्यादा होंगे। सरसों के तेल में मुख्य रूप से असंतृप्त वसा यानी monounsaturated और polyunsaturated fatty acids पाए जाते हैं। इसमें कुछ मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड भी मौजूद होता है। लेकिन तेल को केवल उसके रंग या स्वाद के आधार पर 'ज्यादा स्वस्थ' बताना सही नहीं होगा। स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है कि तेल की कुल मात्रा कितनी ली जा रही है और पूरी डाइट कैसी है।

फिर पीली सरसों का तेल कैसा है?

पीली सरसों का तेल स्वाद और सुगंध में अपेक्षाकृत हल्का हो सकता है। इसलिए जिन लोगों को सरसों की तेज खुशबू पसंद नहीं है, उनके लिए यह व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इसमें भी सरसों के तेल के सामान्य फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसलिए सिर्फ पीले रंग के बीज से निकला तेल होने की वजह से इसे कम पौष्टिक मानना सही नहीं है। असल सवाल सरसों का रंग नहीं, तेल की गुणवत्ता है।

कच्ची घानी तेल क्या सच में बेहतर है?

कच्ची घानी या cold-pressed तेल निकालने की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बीजों से यांत्रिक तरीके से तेल निकाला जाता है और अत्यधिक गर्मी तथा रासायनिक प्रसंस्करण से बचने की कोशिश की जाती है। इस तरह के तेल में बीजों के कुछ प्राकृतिक यौगिक और स्वाद बरकरार रह सकते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर कच्ची घानी तेल अपने आप सबसे अच्छा या हर व्यक्ति के लिए अधिक स्वस्थ है। तेल की शुद्धता, खाद्य सुरक्षा, सही लेबलिंग और उचित मात्रा में सेवन भी महत्वपूर्ण हैं।

तेल खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • पैकेट या बोतल पर सरसों का तेल और खाद्य मानकों के अनुरूप लेबल देखें।
  • विश्वसनीय ब्रांड या भरोसेमंद स्रोत से तेल खरीदें।
  • बहुत तेज कृत्रिम खुशबू या असामान्य रंग वाले तेल से बचें।
  • बोतल को धूप और अत्यधिक गर्मी से दूर रखें।
  • तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल न करें।
  • कुल तेल की मात्रा जरूरत से ज्यादा न बढ़ाएं।
  • सिर्फ एक तेल पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार रखें।
  • एक जरूरी बात: सरसों के तेल में एरुसिक एसिड

सरसों के तेल की चर्चा में एरुसिक एसिड का नाम भी आता है। कुछ सरसों की किस्मों में इसकी मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। इसलिए सरसों के तेल को लेकर स्वास्थ्य संबंधी दावे करते समय सिर्फ “ओमेगा-3 है इसलिए बहुत फायदेमंद है” कहना पर्याप्त नहीं है। भारत में खाद्य तेलों के लिए नियामकीय मानक लागू होते हैं, इसलिए खरीदते समय मानक के अनुरूप और विश्वसनीय उत्पाद चुनना महत्वपूर्ण है।

तो आखिर कौन सा तेल चुनें?

अगर आपको तेज स्वाद और पारंपरिक सरसों की खुशबू पसंद है तो काली सरसों से बना तेल अच्छा विकल्प हो सकता है। अचार और कई पारंपरिक व्यंजनों में इसका स्वाद खास तौर पर अच्छा लगता है।

अगर आप हल्का स्वाद चाहते हैं तो पीली सरसों का तेल चुन सकते हैं। लेकिन, स्वास्थ्य के नजरिए से दोनों में से किसी एक को सिर्फ सरसों के रंग के आधार पर स्पष्ट रूप से 'ज्यादा बेहतर' कहना सही नहीं है।