
नीचे गहरी घाटी में बहती चिनाब नदी, दोनों तरफ आसमान छूते पहाड़ और इनके बीच हवा में टिका स्टील का विशाल पुल किसी अजूबे से कम नहीं है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में बक्कल और कौरी गांवों के बीच बना चिनाब रेलवे ब्रिज हर यात्री को चौंका देता है। नदी तल से करीब 359 मीटर ऊंचा यह पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है और पेरिस के एफिल टावर से भी करीब 35 मीटर ऊंचा है। यह उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) का सबसे अहम हिस्सा है, जिसने पहली बार कश्मीर घाटी को देश के बाकी रेल नेटवर्क से जोड़ा।
अभी यह पुल सिंगल-ट्रैक यानी एक ही रेल लाइन पर चलता है। ऐसे में जब एक साथ दो ट्रेनों को गुजरना हो, तो एक ट्रेन को तय जगह पर रोककर दूसरी को रास्ता देना पड़ता है, जिससे परिचालन की रफ्तार सीमित रहती है। इसी वजह से रेलवे इस रूट की क्षमता बढ़ाने के तरीकों पर लगातार काम कर रहा है। हाल ही में अगस्त 2026 में कटरा-बनिहाल सेक्शन की अधिकतम रफ्तार बढ़ाकर 100 किमी/घंटा की गई है।
चिनाब ब्रिज पर सीधे एक अतिरिक्त लाइन जोड़ने की योजना तैयार की जा रही है। संसद में रेल मंत्रालय के एक जवाब के मुताबिक, बारामूला-बनिहाल सेक्शन (135.5 किमी) के दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पहले ही मंजूर हो चुका है। यह सेक्शन कश्मीर घाटी के अंदर का पुराना, पहले से बना हिस्सा है। यह मार्ग कटरा-बनिहाल खंड (जिसमें चिनाब ब्रिज आता है) से अलग है। हालांकि, सीधे तौर पर चिनाब ब्रिज पर अतिरिक्त लाइन जोड़ने की योजना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
करीब 1,315 मीटर (1.3 किमी) लंबा यह स्टील-कंक्रीट आर्च ब्रिज 785 मीटर के आर्च स्पैन और 530 मीटर के अप्रोच स्पैन से मिलकर बना है। यह 266 किमी/घंटा तक की हवा की रफ्तार, जोन-5 स्तर के भूकंप और करीब 40 टन TNT विस्फोट के बराबर झटके झेलने के लिए डिजाइन किया गया है और इसकी उम्र 120 साल आंकी गई है। इसे कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन (KRCL) की निगरानी में अफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर, VSL इंडिया और दक्षिण कोरिया की अल्ट्रा कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग ने मिलकर बनाया है।
निर्माण तय होने से लेकर पूरा होने तक करीब 22 साल का सफर तय हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को इसे अंजी खाद ब्रिज (देश का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज) और कटरा-श्रीनगर के बीच दो वंदे भारत ट्रेनों के साथ राष्ट्र को समर्पित किया। USBRL प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत संसद में दिए गए एक आधिकारिक जवाब के मुताबिक, करीब 37,012 करोड़ रुपये है।
यह पुल सिर्फ एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि पहली बार कश्मीर घाटी को साल भर देश के बाकी हिस्से से रेल के जरिए जोड़ने वाली कड़ी है। यदि भविष्य में इस मार्ग पर वाकई दूसरी लाइन जुड़ती है, तो इससे ट्रेनों की आवाजाही तेज होगी। यह हिमालय की सबसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में भारतीय रेलवे की आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता की एक और मिसाल बनेगी। फिलहाल इस विशेष योजना पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।