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परदादी-दादी के रेडियो से आपके AI असिस्टेंट तक, जानिए ‘आज के समाचार’ का रोचक सफर

Radio to ai journey of news: आज जब हम सुबह उठकर रेडियो की धुनों से खबर सुनते थे, वहीं अब AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) हमारे लिए खबर पढ़ता, सुनाता और समझाता है। यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि पत्रकारिता की भूमिका और हमारी खबर समझने की आदतों में भी बड़ा बदलाव लेकर आया है।
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Aug 31, 2026
Radio to ai journey of news Interesting story
Radio to ai journey of news Interesting story: AI Creative

Radio to ai journey of news: आपने अपने दादा-दादी से कभी सुना कि जब टीवी या स्मार्ट फोन नहीं थे, तब वे खबरे कैसे देखते थे? उनके जमाने में खबरें देखी नहीं, सिर्फ सुनी जाती थीं। लोगों को आज के मुख्य समाचार का इतना इंतजार रहता था, कि समय से पहले लोग अपने काम से फ्री होकर या काम छोड़कर रेडियो ऑन कर देते थे।

जिनके पास रेडियो भी नहीं थे, वे दूसरों के यहां जाकर बैठ जाते थे कि आज के मुख्य समाचार सुनने हैं, हमारे देश में और दुनिया में क्या-क्या हो रहा है। लेकिन तकनीकी युग में आज सबकुछ बदल गया है।

रेडियो के बाद टीवी आया, टीवी के बाद मोबाइल फोन और अब AI असिस्टेंट से खबरें सुनी जाती हैं। patrika.com के इस लेख में जानिए आज के मुख्य समाचार की रेडियो से लेकर AI असिस्टेंट तक की रोचक यात्रा का सफर।

पहली खबर से लेकर AI एंकर तक, आज के समाचार ने तय किया एक लंबा सफर

1923 में बॉम्बे प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब ने भारत में पहला रेडियो प्रसारण शुरू किया था, जो रेडियो के युग की शुरुआत थी। इसके बाद 23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) ने बॉम्बे और 26 अगस्त 1927 को कोलकाता से पहले आधिकारिक न्यूज बुलेटिन प्रसारित किए।

IBC के दिवालिया होने के बाद 1 अप्रैल 1930 को सरकार ने इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (ISBS) शुरू किया, जो मई 1932 में स्थायी रूप से स्थापित हुआ और 8 जून 1936 को इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (AIR) रखा गया।

दिल्ली स्टेशन से पहला न्यूज बुलेटिन 19 जनवरी 1936 को प्रसारित हुआ, और इसके बाद 1 अगस्त 1937 को सेंट्रल न्यूज ऑर्गनाइजेशन (CNO) की स्थापना हुई, जिसका पहला न्यूज एडिटर चार्ल्स बार्न्स थे।

स्वतंत्रता के बाद AIR ने विस्तार किया और 1953 में लखनऊ और नागपुर से क्षेत्रीय न्यूज यूनिट्स शुरू हुईं। आज AIR 90 से अधिक भाषाओं में प्रतिदिन सैकड़ों न्यूज बुलेटिन प्रसारित करता है।

आज AI एंकर का युग, अब खबर सुनाता है AI असिस्टेंट

फरवरी 2026 में एक मीडिया ग्रुप ने अपना AI बेस्ड न्यूज एंकर पेश किया, जिसे भारत-जेन (BharatGen) के सहयोग से विकसित किया गया है। यह एंकर “AI सैंडविच” पद्धति पर काम करता है।

यानी खबर की शुरुआत और अंत में मानव संपादकीय हस्तक्षेप होता है, बीच में AI मदद करता है। इसके अलावा, मार्च 2023 में इसी ग्रुप ने एक और AI न्यूज एंकर लॉन्च किया था, जो कई भाषाओं में दैनिक अपडेट देता है।

AI बेस्ड ऑडियो न्यूज ऐप्स का उदय

भारत में कई ऐप्स AI की मदद से ऑडियो न्यूज उपलब्ध कराते हैं।

  • TheReader.AI ऐप 60-सेकंड में भारत और दुनिया की खबरें सुनाता है और यह अगस्त 2026 तक सक्रिय है।
  • Newspresso ऐप AI-सारांश और पॉडकास्ट (हिंदी में भी) प्रदान करता है, जिसमें 30-सेकंड ऑडियो ब्रिफिंग भी शामिल है।
  • Snipn नामक सेवा WhatsApp पर 2 मिनट का AI- जनित ऑडियो न्यूज भेजती है और यह भारत सहित 50 से अधिक देशों में उपलब्ध है।
  • SmartReadGo ऐप AI-सारांश और पूर्ण लेख ऑडियो दोनों उपलब्ध कराता है, खासकर ड्राइविंग या मल्टीटास्किंग के दौरान सुनने के लिए।
  • इसके साथ ही एक मीडिया ग्रुप की FM सेवा भी AI की मदद से खबरों को संक्षेप में पढ़कर सुनाती है, लगभग 10 मिनट में।

तो क्या भविष्य में खत्म हो जाएगी पत्रकारों की भूमिका?

AI ने खबर सुनाने और लिखने की प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन यह पत्रकार की भूमिका को पूरी तरह खत्म नहीं करता। AI एंकर में भी शुरुआत और अंत में मानव संपादकीय हस्तक्षेप जरूरी है।

यानी खबर की विश्वसनीयता और संदर्भ बनाए रखने में इंसान की भूमिका बनी रहती है। AI ऐप्स जैसे TheReader.AI, Newspresso, Snipn, SmartReadGo और एक FM, सभी विश्वसनीय स्रोतों से खबर लेते हैं और उसे सुनने योग्य बनाते हैं। लेकिन खबर की चयन प्रक्रिया, सत्यापन और संदर्भ देने में पत्रकार की जिम्मेदारी बनी रहती है।

क्या है भविष्य की तस्वीर? सहयोग, नहीं प्रतिस्पर्धा

AI तकनीक ने खबर सुनने के तरीके को बदल दिया है। रेडियो से लेकर AI एंकर और ऑडियो ऐप्स तक। लेकिन पत्रकार की भूमिका खत्म नहीं हुई है। वह अब और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

AI तेजी से खबर पहुंचाता है, लेकिन पत्रकार उसे संदर्भ, सत्यापन और मानव स्पर्श देते हैं। आज पत्रकार AI को सहयोगी के रूप में अपनाएं, जहां AI खबर को तेज और सुलभ बना रहा है, वहीं पत्रकार उसे अर्थपूर्ण, भरोसेमंद और समझने योग्य बनाए रखें तो बेहतर वही है।

Updated on:
31 Aug 2026 09:50 am
Published on:
31 Aug 2026 09:50 am