
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) अब केवल वैकल्पिक ऋणदाता की भूमिका में नहीं रह गई हैं, बल्कि विशेषीकृत वित्तीय साझेदार के रूप में उभर रही हैं। RBI के सितंबर बुलेटिन में यह बात कही गई है। शिरीष चंद्र मुर्मू के अनुसार, NBFC क्षेत्र की दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए 5 प्रमुख क्षेत्रों- सुशासन, लिक्विडिटी प्रबंधन, संपत्ति गुणवत्ता, ग्राहक विश्वास और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। गौरतलब है कि शिरीष चंद्र मुर्मू ने पिछले साल 9 अक्टूबर 2025 को आरबीआई डिप्टी गवर्नर का पदभार संभाला था और उनका यह वक्तव्य मूल रूप से इसी महीने मुंबई में आयोजित 7वें NBFC-HFC समिट में दिए गए संबोधन पर आधारित है, जिसे अब सितंबर बुलेटिन में प्रकाशित किया गया है।
RBI के आंकड़ों के अनुसार, देश में NBFC क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्तमान में एनबीएफसी ऋण सकल नॉमिनल जीडीपी का 16.7 प्रतिशत हो चुका है, जो एक वर्ष पहले 15.9 प्रतिशत था। वहीं, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिए गए कुल ऋण में एनबीएफसी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 26 प्रतिशत थी। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत की वित्तीय प्रणाली में एनबीएफसी अब हाशिए के खिलाड़ी नहीं, बल्कि मुख्यधारा के भागीदार बन चुके हैं।
पहला मंत्र- सुशासन: RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने सबसे पहले सुशासन (गुड गवर्नेंस) को प्राथमिकता बताया। उनके अनुसार किसी भी मजबूत संस्थान की नींव बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था होती है और निदेशक मंडल तथा शीर्ष प्रबंधन को संगठन में अनुपालन व नैतिक मूल्यों की मजबूत संस्कृति विकसित करनी चाहिए।
दूसरा मंत्र- लिक्विडिटी प्रबंधन: दूसरे बिंदु के रूप में RBI के डिप्टी ने लिक्विडिटी प्रबंधन का उल्लेख किया। अतीत में कई बार एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFC) बाजार की धारणा में बदलाव और सीमित फंडिंग स्रोतों के कारण दबाव में आई हैं। इसलिए उन्होंने फंडिंग स्रोतों में विविधता लाने और एक गहरे व तरल कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को इस दिशा में सहायक बताया। साथ ही सिक्योरिटाइजेशन को महज लिक्विडिटी जुटाने के साधन के बजाय जोखिम हस्तांतरण और पूंजी मुक्त करने के प्रभावी माध्यम के तौर पर विकसित करने की जरूरत बताई, जिसके लिए पारदर्शिता और नियामकीय मानकों का पालन आवश्यक है।
तीसरा मंत्र- संपत्ति गुणवत्ता और जोखिम प्रबंधन: तीसरे क्षेत्र के रूप में RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने संपत्ति गुणवत्ता और जोखिम प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने आगाह किया कि ऋण वृद्धि की रफ्तार बढ़ने के साथ खराब ऋण (NPA) और परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं। इसके लिए उन्होंने नियमित स्ट्रेस टेस्टिंग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और गतिशील प्रावधान व्यवस्था विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के व्यापक इस्तेमाल पर भी बल दिया, ताकि उधारकर्ताओं में वित्तीय तनाव के शुरुआती संकेतों की पहचान की जा सके, लेकिन साथ ही स्पष्ट कहा कि विकास की दौड़ में ऋण मंजूरी के मानकों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
चौथा मंत्र: ग्राहक विश्वास: चौथे बिंदु के तहत शिरीष चंद्र मुर्मू ने ग्राहकों के विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति करार दिया। उनके अनुसार, वित्तीय नवाचार की गति कभी उपभोक्ता संरक्षण से आगे नहीं निकलनी चाहिए, खासकर कमजोर और संवेदनशील ग्राहकों के मामले में। मुर्मू ने कहा कि आचरण-आधारित विनियमन, शिकायत निवारण व्यवस्था और जिम्मेदार ऋण वितरण आरबीआई की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने हाल में जारी रिकवरी एजेंटों के आचरण संबंधी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक विश्वास का कोई विकल्प नहीं है।
पांचवां मंत्र: डिजिटल परिवर्तन और साइबर सुरक्षा: अंतिम 5वें बिंदु के रूप में शिरीष चंद्र मुर्मू ने डिजिटल परिवर्तन और साइबर सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन फाइनेंस में ब्लॉकचेन और धोखाधड़ी पहचान में एआई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल लगातार बढ़ना चाहिए, लेकिन तकनीकी विस्तार के साथ साइबर जोखिम भी बढ़ते हैं। गौरतलब है कि मुर्मू ने बीते सप्ताह (18 सितंबर) मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान बताया था कि साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (IDPIC) फिलहाल 8 बैंकों में पायलट आधार पर चल रहा है।
साइबर सुरक्षा मजबूती के लिए उठाए जा रहे कदमों को जल्द ही व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है। उन्होंने यह भी बताया था कि पिछले एक वर्ष में आरबीआई ने 600 से अधिक मसौदा और अंतिम संशोधन सर्कुलर जारी किए हैं, जो नियामकीय बदलावों की तेज रफ्तार को दर्शाता है। शिरीष चंद्र मुर्मू के अनुसार, ग्राहक डेटा की सुरक्षा और संस्थानों पर भरोसा बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा में निवेश सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और तकनीकी नवाचार का मकसद केवल दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि निष्पक्षता व सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।