
दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ट्रैफिक जाम और गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या दशकों से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। हर दिन लाखों लोग काम, पढ़ाई और व्यापार के सिलसिले में दिल्ली और इसके पड़ोसी उपग्रह शहरों गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मेरठ के बीच यात्रा करते हैं। सड़कों पर निजी वाहनों की भारी संख्या ने एक्सप्रेसवे और राजमार्गों को भी पीक ऑवर्स में जाम के हवाले कर दिया है। इस जटिल परिवहन संकट के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS), जिसे ‘नमो भारत’ के नाम से जाना जाता है, एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में उभरा है। यह केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के परिवहन बुनियादी ढांचे को नया रूप देने की एक व्यापक योजना है।
RRTS राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) द्वारा केंद्र सरकार और दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश सरकारों के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित किया जा रहा एक सेमी-हाई-स्पीड रीजनल रेल नेटवर्क है। यह पारंपरिक रेलवे या मेट्रो नेटवर्क से बिल्कुल अलग है:
एशियाई विकास बैंक (ADB) और एशियाई बुनियादी ढांचा निवेश बैंक (AIIB) के अध्ययनों के अनुसार, RRTS दिल्ली-एनसीआर के मोडल स्प्लिट (यातायात विभाजन) को सड़क परिवहन से सार्वजनिक परिवहन की ओर स्थानांतरित करने में सक्षम है।
हादसों में कमी: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और पुराने जीटी रोड पर भारी ट्रैफिक लोड कम होने से सड़क दुर्घटनाओं की दर में कमी आएगी।
IIT खड़गपुर और परिवहन योजनाकारों द्वारा किए गए शोध बताते हैं कि किसी भी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की सफलता तीन प्रमुख स्तंभों पर टिकी होती है: समय की बचत, सुरक्षा और वहनीय लागत।
हालांकि RRTS एक गेम-चेंजर है, लेकिन यह दावा करना कि यह अकेले दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक जाम को पूरी तरह खत्म कर देगा, व्यावहारिक नहीं होगा। इसके पूर्ण प्रभाव के लिए कुछ अहम चुनौतियां और शर्तें हैं:
दिल्ली-एनसीआर को जाम-मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए RRTS एक मजबूत रीढ़ (backbone) की तरह काम करेगा, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने होंगे।
RRTS यानी 'नमो भारत' दिल्ली-एनसीआर के परिवहन इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह दिल्ली से मेरठ की 3-4 घंटे की थका देने वाली यात्रा को एक घंटे के सुगम सफर में बदलकर क्षेत्रीय गतिशीलता को पूरी तरह पुनर्परिभाषित कर रहा है। हालांकि यह अकेले ट्रैफिक जाम की समस्या को रातों-रात शून्य नहीं कर सकता, लेकिन जब यह मेट्रो, उपनगरीय रेल और मजबूत लास्ट-माइल नेटवर्क के साथ पूरी तरह एकीकृत हो जाएगा, तो यह दिल्ली की सड़कों से लाखों गाड़ियां हटाकर प्रदूषण और जाम से स्थायी राहत दिलाने का सबसे प्रभावी माध्यम सिद्ध होगा।