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एक पहिए की साइकिल से 11 हजार किलोमीटर की यात्रा! सनीद पीपी ने जुनून को बनाया अपनी पहचान

कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसी साइकिल पर सवार हैं जिसका अगला पहिया ही नहीं है। सामने लंबी सड़क है, आसपास तेज़ रफ्तार वाहन हैं, रास्ते में चढ़ाई-उतराई है और मंज़िल सैकड़ों-हज़ारों किलोमीटर दूर है। आम आदमी के लिए यह विचार ही डर पैदा कर सकता है, लेकिन केरल के कन्नूर निवासी सनीद पीपी के लिए यही चुनौती उनकी पहचान बन चुकी है। आइए विस्तार से उनकी पूरी कहानी और इस यात्रा का उद्देश्य जानते हैं।
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Aug 19, 2026
Saneed PP
सनीद पीपी 11 हजार किलोमीटर की यात्रा एक पहिए की साइकिल पर करेंगे। (Photo: ChatGpt)

पेशेवर बाइक स्टंट परफॉर्मर और सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके सनीद ने सामान्य साइकिलिंग को स्टंट, साहस और सामाजिक संदेश से जोड़ दिया है। अब उनका नाम एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि एक पहिए की इस अनोखी साइकिल पर केरल से नेपाल तक की यात्रा ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है।

बचपन से शुरू हुआ पहियों के साथ रिश्ता

सनीद की कहानी अचानक वायरल हुए किसी वीडियो से शुरू नहीं होती। बाइक और साइकिल स्टंट के प्रति उनका आकर्षण काफी पुराना है। 2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया था कि वह 14 साल की उम्र से साइकिल स्टंट कर रहे हैं। उनके भाई सवाद और सजाद भी स्टंट राइडर हैं और DBZ नाम के समूह से जुड़े रहे हैं। सनीद खुद DBZ और RDX टीमों के लिए बाइक स्टंट करते हैं।

करीब आठ साल से पेशेवर स्टंट की दुनिया में सक्रिय सनीद के लिए व्हीली और अन्य बाइक स्टंट धीरे-धीरे कौशल से जुनून में बदल गए। उनकी प्रतिभा उन्हें फिल्मी दुनिया तक भी ले गई। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उन्हें मलयालम फिल्म Thallumaala में अभिनेत्री कल्याणी प्रियदर्शन के स्टंट डबल के रूप में काम करने का मौका मिला। लेकिन सनीद ने खुद को सिर्फ फिल्मों या स्टंट शो तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने हुनर को सड़क पर एक बड़े उद्देश्य के साथ आज़माने का फैसला किया।

साइकिल का अगला पहिया ही हटा दिया

व्हीली में आम तौर पर सवार कुछ समय के लिए साइकिल का अगला पहिया हवा में उठाकर पिछले पहिए पर चलता है। सनीद ने इसे और कठिन बना दिया—उन्होंने साइकिल का अगला पहिया ही निकाल दिया। यानी जिस साइकिल पर वह हज़ारों किलोमीटर चले, उसमें ज़मीन को छूने वाला केवल पिछला पहिया था।

यह केवल संतुलन का खेल नहीं था। लंबे समय तक इसी स्थिति में पैडल चलाने के लिए शरीर का संतुलन, हाथों और पैरों पर नियंत्रण, लगातार एकाग्रता और बेहद मज़बूत मानसिक धैर्य चाहिए। सड़क पर की गई मामूली गलती भी गंभीर दुर्घटना में बदल सकती है।

2024 में सनीद ने कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक करीब पूरे केरल की यात्रा इसी तरह की थी। उस यात्रा के पीछे उनका उद्देश्य केवल रिकॉर्ड या लोकप्रियता हासिल करना नहीं था। वह नशे और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे सामाजिक मुद्दों पर लोगों का ध्यान खींचना चाहते थे।

900 किलोमीटर ने दिया अगले सपने का रास्ता

केरल की यात्रा के बाद सनीद ने अपनी चुनौती को देश के स्तर पर ले जाने का फैसला किया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने केरल में करीब 900 किलोमीटर की यात्रा एक पहिए वाली संशोधित साइकिल से पूरी की थी। इस अनुभव ने उन्हें यह भरोसा दिया कि जो काम कुछ किलोमीटर के लिए असंभव लगता है, उसे लगातार अभ्यास और इच्छाशक्ति से लंबी दूरी तक भी किया जा सकता है। इसके बाद उनकी नज़र कश्मीर और लद्दाख की ओर गई।

कन्याकुमारी से उमलिंग ला तक करीब 5,000 किलोमीटर

सनीद की सबसे चर्चित यात्राओं में कन्याकुमारी से लद्दाख के उमलिंग ला तक की यात्रा शामिल है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने नवंबर 2024 में उनकी यात्रा को करीब 5,000 किलोमीटर बताया। उमलिंग ला दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रों में शामिल है और करीब 5,799 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

सनीद सुबह करीब छह बजे अपनी यात्रा शुरू करते थे और औसतन 30-40 किलोमीटर प्रतिदिन चलने का लक्ष्य रखते थे। शुरुआत में उनके साथ दोस्त भी थे, जो सामान्य साइकिलों पर उनके साथ चलते थे और सामान में मदद करते थे। यात्रा के दौरान उनके लिए रात गुज़ारना भी एक चुनौती थी। कई जगह पेट्रोल पंप, ढाबे या सड़क किनारे लगाया गया टेंट ही उनका अस्थायी ठिकाना बने।

जैसे-जैसे वह उत्तर की ओर बढ़े, मुश्किलें बढ़ती गईं। गर्दन और पीठ का दर्द लगातार बना रहा। लद्दाख के हनले में तेज़ हवा के झोंके ने उन्हें गिरा दिया और उन्हें नज़दीकी सेना के बेस पर चिकित्सा सहायता लेनी पड़ी। लेकिन इसी घटना ने उन्हें सैनिकों के साथ दीवाली मनाने का यादगार मौका भी दिया। पंजाब में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन ने भी उन्हें एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, जहां उन्होंने अपने स्टंट का प्रदर्शन किया।

बर्फीली रातें और अनजान लोगों का साथ

इस यात्रा की सबसे खूबसूरत बात सिर्फ सनीद का संतुलन नहीं थी, बल्कि रास्ते में मिले लोगों की कहानियां भी थीं। कश्मीर के ज़ोजिला और लद्दाख के द्रास जैसे बेहद ठंडे इलाकों में खुले आसमान के नीचे रात गुज़ारना मुश्किल हो गया। जिन परिस्थितियों में टेंट में रहना संभव नहीं था, वहां स्थानीय लोगों ने उन्हें अपने घरों में जगह दी।

रास्ते में ताजमहल, स्वर्ण मंदिर, हरिहर किला और कोंकण के दृश्य उनके सफर का हिस्सा बने। लेकिन लद्दाख की रातों में आसमान पर फैली मिल्की वे ने उन्हें सबसे ज़्यादा प्रभावित किया। उमलिंग ला पहुंचकर उन्होंने अपने साथ ले गया भारतीय तिरंगा फहराया। उनके लिए यह सिर्फ एक मंज़िल तक पहुंचना नहीं था, बल्कि लंबे समय से देखे जा रहे सपने का पूरा होना था।

सनीद की यात्रा में एक संदेश भी छिपा है

सनीद की यात्राओं का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका सामाजिक संदेश है। उन्होंने अपने लंबे सफर को नशे के खिलाफ जागरूकता से जोड़ा। उनका मानना है कि अगर कोई व्यक्ति उनकी अनोखी साइकिल देखकर रुकता है, वीडियो बनाता है या उनसे बातचीत करता है, तो उसी क्षण उनके संदेश को लोगों तक पहुंचने का मौका मिलता है।

उनके लिए यह बात तब और महत्वपूर्ण हो गई जब यात्रा के दौरान एक दोस्त ने उन्हें संदेश भेजकर बताया कि उसने धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थ छोड़ दिए हैं। सनीद ने इसे अपनी यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना। उनके शब्दों में, ऐसे संदेश ही उन्हें आगे बढ़ने की ऊर्जा देते थे।

अब नेपाल की बारी

लद्दाख की चुनौती पूरी होने के बाद भी सनीद के सपनों की सड़क खत्म नहीं हुई। 2025 में प्रकाशित एक विस्तृत प्रोफाइल में उन्होंने अपने अगले बड़े लक्ष्य के रूप में केरल से नेपाल तक इसी तरह की यात्रा का ज़िक्र किया था।

मई 2026 में इसी सपने की झलक सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के रूप में सामने आई। वीडियो में सनीद संशोधित एक-पहिए वाली साइकिल पर लंबी दूरी तय करते दिखाई दिए। साइकिल पर सामान लादे वह सामान्य सड़कों और ट्रैफिक के बीच संतुलन बनाए हुए नज़र आए। वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया—कुछ ने इसे साहस और जुनून का उदाहरण बताया, तो कुछ ने सार्वजनिक सड़कों पर ऐसे स्टंट के जोखिम को लेकर चिंता भी जताई।

नेपाल की यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि यह सनीद के लिए सिर्फ एक और लंबी दूरी की साइकिल यात्रा नहीं है। यह उस सोच का अगला अध्याय है जिसमें उन्होंने अपने स्टंट को जीवन की बड़ी चुनौतियों से जोड़ दिया है।

सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई, लेकिन सड़क बनी प्रयोगशाला

सनीद की कहानी का दिलचस्प पहलू यह भी है कि उनकी पहचान केवल एक स्टंट राइडर के रूप में नहीं है। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है और इंटीरियर डिज़ाइनिंग का भी अध्ययन किया है। यानी उनकी ज़िंदगी में एक ओर तकनीकी शिक्षा है और दूसरी ओर रोमांच, स्टंट और सड़क।

शायद यही मिश्रण उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। एक इंजीनियर की तरह वह साइकिल और उसके संतुलन को समझते हैं, जबकि एक स्टंट परफॉर्मर की तरह शरीर और मशीन के बीच तालमेल बैठाते हैं।

सनीद पीपी की कहानी असल में एक पहिए की साइकिल की कहानी से कहीं आगे जाती है। यह उस युवक की कहानी है जिसने अपने हुनर को अपनी पहचान बनाया, पहचान को उद्देश्य से जोड़ा और फिर उसी उद्देश्य को लेकर हज़ारों किलोमीटर लंबी सड़क पर निकल पड़ा।

केरल से नेपाल तक का रास्ता उनके लिए सिर्फ दूरी नहीं है। यह इस सवाल का जवाब है कि अगर जुनून को अनुशासन, अभ्यास और उद्देश्य का साथ मिल जाए, तो इंसान अपनी सीमाओं को कितनी दूर तक धकेल सकता है। सनीद की साइकिल में अगला पहिया भले न हो, लेकिन उनके सपनों के आगे कोई पहिया नहीं लगा है- वे लगातार घूम रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं और अगली मंज़िल तलाश रहे हैं।

Updated on:
19 Aug 2026 04:12 pm
Published on:
19 Aug 2026 12:55 pm