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फिनटेक का नया दौर: अब Gen Z को रिझाने के लिए बैंक बदल रहे तरीके, जानिए क्या है नई बैंकिंग स्ट्रैटेजी

आधुनिक युग में तेजी से बदल रहे लाइफ स्टाइल के साथ ही बैंकिग स्ट्रैटेजी भी बदल रही है। अब बैंकिंग ऐप आपके शौक और लाइफस्टाइल के हिसाब से आपके लिए रणनीतियां बना रहे हैं। आइए जानते हैं कि फिनटेक का नया दौर किस प्रकार से Gen Z को रिझाने के लिए नीतियां बदल रहा है?
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 20, 2026

banking strategie

सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)

आज के दौर का युवा विशेषकर Gen Z, बैंकिंग से सिर्फ लेन-देन नहीं, बल्कि एक सहज, डिजिटल और व्यक्तिगत अनुभव चाहता है। बैंक अब इसी बदलते व्यवहार को समझकर अपनी रणनीतियां बदल रहे हैं, ताकि वे इस तकनीकी रूप से जागरूक पीढ़ी को आकर्षित कर सकें। इस नए दौर में बैंकिंग सिर्फ सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट तक सीमित नहीं है। Gen Z के लिए बैंकिंग का मतलब है- कैशबैक, इंस्टेंट पेमेंट, सब्सक्रिप्शन मैनेजमेंट और रियल‑टाइम इनसाइट्स जैसे फायदे। Gen Z की पहली वित्तीय पसंद अक्सर ऐप होती है। ऐप, कैशबैक और सहज अनुभव देते हैं, न कि पारंपरिक शाखा।

क्या है फिनटेक का नया दौर?

भारत की बैंकिंग दुनिया इस समय एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। डिजिटल भुगतान, UPI और मोबाइल-फर्स्ट बैंकिंग की सफलता के बाद अब बैंकों की नजर उस पीढ़ी पर है, जो आने वाले दशकों में देश की अर्थव्यवस्था और जमा-पूंजी दोनों की धुरी बनेगी। यानी कि बैंकिंग की नजर Gen Z पीढ़ी पर है। हाल ही में दिल्ली में हुए दो दिवसीय PSB कॉन्फ्लुएंस 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को साफ संदेश दिया कि उन्हें अपनी परंपरागत और गंभीर छवि से बाहर निकलकर युवाओं के लिए ज्यादा आकर्षक और 'कूल' बनना होगा।

इस सम्मेलन के दौरान वित्त मंत्रालय ने प्रमुख बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भी बैंकिंग क्षेत्र के अहम मुद्दों और नई पीढ़ी के ग्राहकों की बदलती जरूरतों पर चर्चा की। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में Gen Z का 1 से 5वां हिस्सा है। 83% युवा डिजिटल‑फर्स्ट सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णयों में वे मानवीय सलाह भी चाहते हैं। करीब 48% Gen Z कई बैंक खाते रखते हैं, ताकि अलग‑अलग उद्देश्य के लिए पैसे अलग रख सकें और 44% विभिन्न बैंक फीचर्स को सक्रिय रूप से एक्सप्लोर करते हैं।

Gen Z के लिए बैंक क्या कर रहे हैं?


बैंक अब Gen Z को आकर्षित करने के लिए बैंकिग की रणनीतियां बदल रहे हैं। बैंकिंग सिस्टम डिजिटल‑फर्स्ट अनुभव और सहज इंटरफेस के अनुसार अपग्रेड हो रहा है। 75% उपयोगकर्ता कहते हैं कि अगर ऐप आसान नहीं होगा, तो वे उसे इस्तेमाल नहीं करेंगे। बैंक अब रियल‑टाइम अलर्ट, डुप्लिकेट सब्सक्रिप्शन की पहचान, बैलेंस चेतावनी जैसी सुविधाएं दे रहे हैं।

पुरस्कार, कैशबैक और साझेदारी

बैंक को पेमेंट में सुविधा और पुरस्कार को जोड़ना चाहिए। Lifestyle ब्रांड्स के साथ साझेदारी, क्रेडिट‑कार्ड‑लिंक्ड UPI, और गिफ्टेड रिवॉर्ड्स से Gen Z की वफादारी बढ़ सकती है। बैंकिंग ऐप का इंटरफेस सरल और सहज होना चाहिए।

स्व‑सेवा और नियंत्रण

लगभग दो‑तिहाई तकनीकी‑प्रवृत्त उपयोगकर्ता ऐसे फीचर्स चाहते हैं, जैसे- डिस्प्यूट मैनेजमेंट, सब्सक्रिप्शन कंट्रोल और रिटर्न मैनेजमेंट। अगर ऐसी सुवधिएं नहीं मिलती हैं तो युवा बैंक बदलने के लिए भी तैयार हो जाते हैं।

Gen Z की पसंद और कस्टमाइजेशन

Gen Z, अपने मास्टर कार्ड को अपनी पहचान के अनुसार कस्टमाइज करना पसंद करते हैं। जैसे- एनिमेटेड इमेजेज या उनके शौक से जुड़ी डिजाइन। इसके साथ ही, खर्च की श्रेणियों के अनुसार रिवॉर्ड्स देना उन्हें और भी आकर्षित करता है।

चैलेंजर बैंक और स्टार्ट‑अप सोच

पारंपरिक बैंकिंग मॉडल Gen Z को आकर्षित नहीं कर पा रहा। इसलिए पारंपरिक बैंकिंग मॉडल को स्टार्ट‑अप की तरह सोचने की जरूरत है। फिनटेक साझेदारी, तेज प्रोडक्ट डेवलपमेंट और अलग तकनीकी ढांचे के साथ युवाओं को आकर्षित किया जा सकता है।

Gen Z की वित्तीय आदतों में बदलाव

भारत के Gen Z पारंपरिक बचत से हटकर, खर्च, निवेश और सब्सक्रिप्शन को एक साथ देखता है। वे कई बैंक खाते रखते हैं, डिजिटल‑फर्स्ट सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं और मानवीय सलाह की जरूरत महसूस करते हैं। वे ऐप में नियंत्रण, पारदर्शिता और सहजता चाहते हैं। अगर बैंक इस पीढ़ी को समझकर, उनके डिजिटल व्यवहार और अपेक्षाओं के अनुसार सेवाएं दें, तो वे लंबे समय तक जुड़ सकते हैं। अगर बैंक सिर्फ पुराने मॉडल पर टिके रहे, तो Gen Z उन्हें छोड़कर आगे बढ़ जाएगा। इस नए दौर में, बैंकिंग का मतलब सिर्फ पैसे रखना नहीं, बल्कि एक सहज, व्यक्तिगत और डिजिटल‑प्रथम अनुभव बन गया है और यही Gen Z को रिझाने की नई रणनीति है।

नई नीतियों का असर

बैंक अब सिर्फ उत्पाद नहीं, बल्कि अनुभव बेच रहे हैं। ऐप को सरल, व्यक्तिगत, और रीयल‑टाइम बनाना उनकी प्राथमिकता बन गई है। पुरस्कार और कैशबैक से जुड़ी साझेदारियां, सब्सक्रिप्शन नियंत्रण, और कस्टमाइजेशन जैसे फीचर्स Gen Z को जोड़ने में मदद कर रहे हैं। इसके अलावा, नेओबैंक और फिनटेक साझेदारियों से बैंकिंग का स्वरूप बदल रहा है। यह पारंपरिक शाखा‑आधारित मॉडल से हटकर, डिजिटल‑प्रथम, स्टार्ट‑अप‑जैसा मॉडल बन रहा है।

वित्त मंत्रालय (DFS) ने फरवरी 2026 में एक बैठक की थी। इस बैठक में RBI, NPCI, IBA, SEBI जैसे संस्थान शामिल थे। बैठक में वित्तीय समावेशन 2.0 रोडमैप पर चर्चा हुई। जिसमें डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग एक्सेस पर जोर था। हालांकि इस बैठक में सीधे Gen Z पर चर्चा का उल्लेख नहीं है, लेकिन डिजिटल पेमेंट और समावेशन की दिशा में यह कदम Gen Z जैसे डिजिटल‑प्रवृत्त वर्ग के लिए आधार तैयार करता है।