
हिंद महासागर में भारत का नया पहरेदार: MQ-9B सी-गार्डियन ड्रोन से मजबूत होगी समुद्री सुरक्षा। (फोटो : AI)
हिंद महासागर की विशालता और बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच MQ-9B SeaGuardian ड्रोन भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करने वाला अहम प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। लंबी अवधि तक उड़ान भरने, दूरस्थ क्षेत्रों पर नजर रखने और उन्नत सेंसर से लैस यह ड्रोन समुद्री सुरक्षा, खोज-बचाव और संभावित ख़तरों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में शामिल है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही और सामरिक गतिविधियों के लिहाज़ से इसका महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में समुद्र के विशाल हिस्से पर लगातार निगरानी रखना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती से निपटने में MQ-9B SeaGuardian जैसे लंबी उड़ान क्षमता वाले ड्रोन भारतीय नौसेना के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।
अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स की ओर से विकसित MQ-9B Sea Guardian को विशेष रूप से समुद्री निगरानी और खुफिया, निगरानी व टोही यानी ISR मिशनों के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में लंबे समय तक हवा में बने रहने की क्षमता और दूरस्थ इलाकों की निगरानी शामिल है। यह क्षमता भारतीय नौसेना को समुद्री क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखने में मदद करती है।
समुद्री क्षेत्र में किसी संदिग्ध जहाज़, छोटी नाव या अन्य गतिविधि की पहचान करना आसान काम नहीं है। विशाल समुद्री क्षेत्र में हर समय मानवयुक्त विमान या युद्धपोत तैनात रखना महंगा और संसाधन-सघन हो सकता है। ऐसे में लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाला ड्रोन निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी बना सकता है।
MQ-9B SeaGuardian को समुद्री निगरानी के लिए उन्नत सेंसर और रडार प्रणालियों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। यह समुद्र की सतह पर मौजूद जहाज़ों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ संभावित पानी के नीचे के ख़तरों की पहचान में भी सहायक हो सकता है।
भाग 1: MQ-9B SeaGuardian की प्रमुख क्षमता विवरण
लंबी उड़ान लंबे समय तक लगातार निगरानी मिशन संचालित करने की क्षमता
समुद्री निगरानी जहाज़ों और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में उपयोगी
मल्टी-मोड रडार विभिन्न परिस्थितियों में निगरानी और लक्ष्य पहचान में सहायता
इलेक्ट्रॉनिक सेंसर रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक संकेतों से संबंधित जानकारी जुटाने में मदद
सोनोबॉय सिस्टम पानी के भीतर संभावित गतिविधियों और पनडुब्बी संबंधी निगरानी में उपयोगी
उपग्रह संचार दूरस्थ क्षेत्रों से मिशन संचालन और डेटा संचार की सुविधा
भारत ने MQ-9B SeaGuardian का परिचालन अनुभव हासिल करने के लिए इसे लीज पर भी इस्तेमाल किया है। भारतीय नौसेना के लिए इन ड्रोन का संचालन तमिलनाडु के अरक्कोनम स्थित INS राजाली से किया गया है।
लीज पर लिए गए ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से समुद्री निगरानी के लिए किया गया। इससे भारतीय नौसेना को लंबी अवधि वाले ड्रोन अभियानों का व्यावहारिक अनुभव मिला। समुद्र के बड़े हिस्से पर लगातार नजर रखने में ऐसे प्लेटफॉर्म की उपयोगिता का आकलन भी किया गया।
अगस्त 2022 तक इन ड्रोन ने हजारों उड़ान घंटे पूरे किए थे और बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी की थी। सितंबर 2024 में एक ड्रोन तकनीकी समस्या के बाद बंगाल की खाड़ी में नियंत्रित तरीके से समुद्र में उतारा गया था। इसके बाद लीज समझौते के तहत प्रतिस्थापन की व्यवस्था की गई।
यह अनुभव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी नई सैन्य प्रणाली को सीधे बड़े पैमाने पर शामिल करने से पहले उसके वास्तविक परिचालन प्रदर्शन को समझना जरूरी होता है।
MQ-9B जैसे ड्रोन की उपयोगिता केवल नियमित निगरानी तक सीमित नहीं है। समुद्री डकैती, संदिग्ध जहाज़ों की गतिविधियों, तस्करी और संकट में फंसे लोगों की तलाश जैसे अभियानों में भी लंबी दूरी की हवाई निगरानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दिसंबर 2023 में अरब सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाज़ों को निशाना बनाए जाने और समुद्री सुरक्षा संबंधी घटनाओं के बाद भारतीय नौसेना ने अपनी निगरानी और तैनाती बढ़ाई। ऑपरेशन संकल्प जैसे अभियानों में नौसेना के युद्धपोतों, P-8I समुद्री गश्ती विमानों और अन्य निगरानी संसाधनों के साथ मानव रहित प्रणालियों का इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र की तस्वीर को बेहतर समझने के लिए किया गया।
MQ-9B की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि यह किसी बड़े समुद्री क्षेत्र में लंबे समय तक निगरानी बनाए रखने में मदद कर सकता है। इससे नौसेना को किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर अपने युद्धपोतों या मानवयुक्त विमानों को अधिक प्रभावी तरीके से भेजने में मदद मिलती है।
समुद्री डकैती संदिग्ध नौकाओं और समुद्री गतिविधियों की निगरानी
खोज व बचाव संकट में फंसे जहाज़ों या लोगों का पता लगाने में सहायता
जहाज़ों की निगरानी समुद्री यातायात और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
पनडुब्बी निगरानी उन्नत सेंसर और सोनोबॉय के माध्यम से सहायता
तस्करी रोकथाम संदिग्ध समुद्री गतिविधियों की पहचान
क्षेत्रीय निगरानी हिंद महासागर के बड़े हिस्से पर लगातार निगरानी
लीज पर संचालन के अनुभव के बाद भारत ने MQ-9B परिवार के ड्रोन की खरीद की दिशा में भी कदम बढ़ाया। प्रस्ताव में भारतीय नौसेना के लिए SeaGuardian और अन्य सशस्त्र सेवाओं के लिए SkyGuardian संस्करण शामिल हैं।
जून 2023 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस पैकेज में नौसेना के लिए 15 SeaGuardian और थल सेना तथा वायु सेना के लिए 16 SkyGuardian ड्रोन शामिल किए गए।
इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच इस सौदे पर बातचीत आगे बढ़ी। अक्टूबर 2024 में अमेरिका के साथ 31 MQ-9B ड्रोन के लिए समझौता हुआ। प्रस्तावित डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से होने की बात सामने आई है।
यह सौदा केवल ड्रोन खरीदने तक सीमित नहीं है। इसमें संबंधित सेंसर, संचार और अन्य उपकरण भी शामिल हैं। भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे तीनों सेनाओं की लंबी दूरी की निगरानी क्षमता को एक साथ मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
MQ-9B जैसे अत्याधुनिक सैन्य ड्रोन की कीमत निश्चित रूप से सामान्य निगरानी उपकरणों की तुलना में काफी अधिक है। लेकिन किसी सैन्य प्रणाली की उपयोगिता का आकलन केवल उसकी खरीद कीमत से करना उचित नहीं होता।
यदि कोई प्लेटफॉर्म लंबे समय तक निगरानी कर सकता है, तो वह मानवयुक्त विमानों और युद्धपोतों पर पड़ने वाले कुछ परिचालन दबाव को कम कर सकता है। उदाहरण के लिए, P-8I जैसे समुद्री गश्ती विमान बेहद महत्वपूर्ण मिशनों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में लंबी अवधि की नियमित निगरानी के लिए मानव रहित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर सकता है।
इसके अलावा, ड्रोन में मानव चालक दल के सीधे जोखिम में आने की स्थिति नहीं होती। लंबे मिशन के दौरान यह एक महत्वपूर्ण परिचालन लाभ हो सकता है।
हिंद महासागर की निगरानी बड़े समुद्री क्षेत्र पर लगातार नजर
चीन की समुद्री गतिविधियां क्षेत्रीय गतिविधियों की बेहतर निगरानी
समुद्री डकैती संदिग्ध गतिविधियों की जल्द पहचान
P-8I पर दबाव नियमित निगरानी का कुछ भार कम करने में मदद
खोज एवं बचाव संकटग्रस्त जहाज़ों की पहचान में सहायता
तीनों सेनाओं की क्षमता समुद्री और भूमि आधारित निगरानी नेटवर्क को मजबूती
भविष्य की आत्मनिर्भरता तकनीकी सहयोग और भारतीय उद्योग के लिए अवसर
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भौगोलिक स्थिति उसे समुद्री सुरक्षा के लिहाज़ से विशेष महत्व देती है। भारत के आसपास से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल रक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
MQ-9B SeaGuardian भारत को समुद्र में लगातार निगरानी की अतिरिक्त क्षमता देता है। इसकी मदद से संदिग्ध गतिविधियों को शुरुआती स्तर पर पहचानने, जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर तेज़ कार्रवाई के लिए संबंधित संसाधनों को निर्देशित करने में मदद मिल सकती है।
चीन की हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती समुद्री मौजूदगी, समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच ऐसी निगरानी क्षमता भारत के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
MQ-9B SeaGuardian भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का अकेला समाधान नहीं है। इसकी प्रभावशीलता युद्धपोतों, P-8I विमानों, हेलिकॉप्टरों, उपग्रहों, तटीय रडार और अन्य खुफिया एवं निगरानी प्रणालियों के साथ इसके एकीकरण पर निर्भर करेगी।
आने वाले वर्षों में यदि इन प्रणालियों से प्राप्त डेटा को एकीकृत कमांड और निगरानी नेटवर्क के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है, तो भारत की समुद्री क्षेत्र जागरूकता यानी Maritime Domain Awareness और मजबूत हो सकती है।
इसके साथ ही भारत के लिए यह अवसर भी महत्वपूर्ण है कि वह केवल विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भर न रहे, बल्कि संबंधित तकनीक, सेंसर, डेटा प्रोसेसिंग और मानव रहित प्रणालियों के क्षेत्र में घरेलू क्षमता विकसित करे।
MQ-9B SeaGuardian को केवल महंगा ड्रोन या शोपीस कहना उचित नहीं होगा। हिंद महासागर जैसे विशाल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में लगातार निगरानी की जरूरत को देखते हुए यह भारतीय नौसेना की क्षमताओं में महत्वपूर्ण इज़ाफा कर सकता है।
बहरहाल, इसकी लंबी उड़ान क्षमता, समुद्री निगरानी उपकरण और विभिन्न मिशनों में इस्तेमाल की संभावनाएं इसे आधुनिक समुद्री सुरक्षा ढांचे का उपयोगी हिस्सा बनाती हैं। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि भारत इसे अपने मौजूदा निगरानी नेटवर्क, युद्धपोतों, विमानों और उपग्रह प्रणालियों के साथ कितनी प्रभावी तरह से एकीकृत करता है। इस लिहाज़ से MQ-9B Sea Guardian को हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा का नया प्रहरी कहना अधिक उपयुक्त होगा-न कि केवल एक महंगा सैन्य उपकरण।
Updated on:
20 Aug 2026 03:59 pm
Published on:
20 Aug 2026 03:59 pm
