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बच्चे की पहली सांस से मां की मुस्कान तक: SUMAN रोडमैप 2030 कैसे बदलेगा हर घर की तकदीर?

SUMAN Roadmap 2030: सुरक्षित मातृत्व और नवजात की देखभाल का नया स्वरूप, SUMAN रोडमैप 2030 और एनिमिया मुक्त भारत अभियान दिलाएगा शिशु और मातृ मृत्यु दर से मुक्ति, सेहत और पोषण से नवजात को मिलेगी जिंदगी और मां की गोद में हर घर खुशहाली की बढ़ती उम्मीद
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Aug 22, 2026
Suman Roadmap 2030
Suman Roadmap 2030: सुरक्षित मातृत्व और भविष्य भी (AI Creative)

SUMAN Roadmap 2030: क्या आपने कभी सोचा है कि मातृत्व और नवजात देखभाल में सुधार की कितनी संभावनाएं हैं? SUMAN रोडमैप 2030 और एनीमिया मुक्त भारत अभियान से जुड़कर जानिए कैसे ये पहल आपके और आपके परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकती हैं?

दरअसल, SUMAN रोडमैप 2030 और एनीमिया मुक्त भारत अभियान कैसे एनीमिया और नवजात देखभाल से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद कर रहे हैं। विशेष रूप से उन महिलाओं और परिवारों के लिए जो इस यात्रा में शामिल हैं।

SUMAN रोडमैप 2030: मातृत्व और नवजात देखभाल का नया ढांचा

SUMAN रोडमैप 2030 (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) को 29 जून 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) की 16वीं बैठक में लॉन्च किया। यह एक व्यापक रणनीतिक रूपरेखा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना, नवजात (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी लाना और रोके जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मौतों को शून्य तक पहुंचाना है।

यह रोडमैप RMNCHA+N (प्रजनन, मातृ, नवजात, शिशु, किशोर स्वास्थ्य एवं पोषण) फ्रेमवर्क पर आधारित है और गर्भावस्था से लेकर प्रसवोत्तर देखभाल तक जीवनचक्र के सभी चरणों में हस्तक्षेप करता है। इसमें 13 उच्च-फोकस राज्यों के 130 जिलों को लक्षित किया गया है। इनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल है।

जानिए क्या है इस रोडमैप की खासियत?

  • चार-चरणीय उच्च जोखिम गर्भावस्था ट्रैकिंग, प्रसव पूर्व, तीसरी तिमाही, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि में।
  • SUMAN पैकेज फॉर प्रेग्नेंट वुमन- समय पर पंजीकरण, पूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, गुणवत्तापूर्ण परीक्षण और प्रसवोत्तर संस्थागत देखभाल सुनिश्चित करता है।
  • ASHA कार्यकर्ताओं द्वारा आठवें और नौवें माह में दो सप्ताह में एक बार घर पर विजिट- जोखिम संकेत, पोषण सलाह, जन्म की तैयारी और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना।
  • जन्म प्रतीक्षा गृह (Birth Waiting Homes), मातृ एवं बाल स्वास्थ्य विंग, उच्च निर्भरता इकाइयां (HDUs) और ICU जैसी सुविधाओं का निर्माण।
  • समुदाय की भागीदारी- SUMAN पंचायतें और Mothers' Picnic जैसे प्लेटफॉर्म स्थानीय स्तर पर जागरूकता और जवाबदेही बढ़ाते हैं।
  • डिजिटल और तकनीकी सुधार- एआई-सक्षम प्रसव कक्ष, JANANI पोर्टल के माध्यम से निगरानी, SUMAN कॉल सेंटर, मातृ मृत्यु निगरानी और मातृ निकट-मृत्यु समीक्षा, NASG (नॉन-प्न्यूमेटिक एंटी-शॉक गारमेंट्स) का उपयोग और SSBSK (समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) का समावेश।

यह रोडमैप क्यों जरूरी?

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल भारत की मातृ मृत्यु दर (MMR) 87 (2022-24 के आंकड़े), शिशु मृत्यु दर (IMR) 24 प्रति 1,000 जीवित जन्म और नवजात मृत्यु दर (NMR) 18 प्रति 1,000 जीवित जन्म है। यानी MMR को 87 से घटाकर 70 से नीचे लाने का लक्ष्य, पिछले दशक की प्रगति की गति से भी ज्यादा तेजी की मांग करता है।

एनीमिया मुक्त भारत अभियान: एनीमिया से लड़ने की नई रणनीति

उसी दिन, 29 जून 2026 को, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एनीमिया मुक्त भारत अभियान के ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की। यह कार्यक्रम अब केवल रोकथाम (प्रोफिलैक्टिक) तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षण, उपचार, सलाह और ट्रैकिंग (T4: टेस्ट, ट्रीट, टॉक, ट्रैक) पर केंद्रित है। यानी सरकार अब इनपुट-आधारित दृष्टिकोण (सिर्फ आयरन गोलियां बांटना) से हटकर परिणाम-आधारित दृष्टिकोण (जांच, इलाज और पूरी तरह ठीक होने तक ट्रैकिंग) अपना रही है।

7×7×7 फ्रेमवर्क, पिछले 6×6×6 फ्रेमवर्क का विस्तार

  • सातवां लाभार्थी समूह- कम जन्म वजन वाले बच्चे (0–6 माह) भी शामिल किए गए हैं।
  • सातवां हस्तक्षेप- 'ईटिंग राइट' यानी आयरन-समृद्ध और विविध आहार को रोजमर्रा की आदत बनाना।
  • सातवां संस्थागत तंत्र, डिजिटल ट्रैकिंग के लिए एकीकृत पोर्टल, इसमें JANANI, RBSK और U-WIN पोर्टल शामिल हैं।
  • गंभीर मामलों में IV आयरन थेरेपी (FCM और आयरन सुक्रोज) को शामिल किया गया है।
  • जन भागीदारी- 'जन चेतना' अभियान के माध्यम से समुदाय को सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है।

SUMAN और एनीमिया मुक्त भारत अभियान का संगम

SUMAN रोडमैप 2030 और एनीमिया मुक्त भारत अभियान दोनों ही जीवनचक्र दृष्टिकोण अपनाते हैं, गर्भावस्था से लेकर नवजात देखभाल तक। SUMAN में पोषण हस्तक्षेप और एनीमिया प्रबंधन शामिल हैं, जबकि एनीमिया मुक्त भारत अभियान में नवजात और मातृ स्वास्थ्य के लिए एनीमिया की रोकथाम और उपचार पर विशेष ध्यान दिया गया है।

यह समन्वय क्यों अहम?

  • गर्भवती महिलाओं को समय पर एनीमिया का पता चले और उनका उपचार हो।
  • नवजात बच्चों में कम जन्म वजन और एनीमिया दोनों पर नजर रखी जाए।
  • डिजिटल ट्रैकिंग और समुदाय की भागीदारी से सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बेहतर हो।

जानिए आपके लिए क्या मायने?

यदि आप गर्भवती हैं, नवजात देखभाल कर रही हैं, या परिवार में कोई इस दौर से गुजर रहा है, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि अब-

  • आपके पास समय पर पंजीकरण, नियमित जांच, पोषण सलाह, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
  • यदि एनीमिया का पता चलता है, तो अब केवल गोलियां ही नहीं, बल्कि परीक्षण, उपचार और ट्रैकिंग की सुविधा भी है।
  • ASHA कार्यकर्ता घर पर विजिट करेंगी और समुदाय में SUMAN पंचायतें तथा Mothers' Picnic जैसे प्लेटफॉर्म आपको जानकारी और समर्थन देंगे।
  • डिजिटल पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से शिकायत या जानकारी का समाधान प्राप्त करना आसान होगा।

अब आगे क्या?

यदि आप या आपके परिवार में कोई गर्भवती हैं, तो सुनिश्चित करें कि:

  • आप SUMAN के तहत पंजीकृत हैं और नियमित ANC (प्रसवपूर्व देखभाल) प्राप्त कर रही हैं।
  • एनीमिया के लिए परीक्षण हो रहा है और आवश्यकता होने पर उपचार मिल रहा है।
  • ASHA से संपर्क बनाए रखें और घर पर विजिट का लाभ उठाएं।
  • किसी भी समस्या या जानकारी के लिए JANANI पोर्टल या SUMAN कॉल सेंटर का उपयोग करें।

कुल मिलाकर इस इस नए ढांचे से उम्मीद की जा सकती है कि माताएं और नवजात दोनों सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें और हर परिवार के लिए यह एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो।

Updated on:
22 Aug 2026 01:19 pm
Published on:
22 Aug 2026 01:19 pm