
जलवायु परिवर्तन ने शहरी बाढ़ को एक आम समस्या बना दिया है, लेकिन तैयारी की कमी इसे और खतरनाक बना रही है। नीति और दिशा-निर्देश मौजूद हैं, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब शहरों में योजना, चेतावनी और समुदाय की भागीदारी मजबूत होगी। शहरों में जलवायु परिवर्तन के चलते बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन क्या आपके नगर क्षेत्र में इसकी तैयारी है? यह सवाल अब केवल पर्यावरण विशेषज्ञों का नहीं, बल्कि हर रोजमर्रा के शहरवासियों का भी है। आपके शहर में बाढ़ नियंत्रण के लिए क्या उपाय किए गए हैं? बाढ़ जैसी समस्या से निपटने के लिए आपके शहर में क्या कमी है और आप क्या सहयोग कर सकते हैं?
देश में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढांचा मजबूत है, लेकिन शहरों में यह अक्सर अंतिम स्तर पर टूट जाता है। मुंबई, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे शहरों में पुरानी नालियों, अनियोजित विकास और प्राकृतिक जलधाराओं की कमी ने मानसून के दौरान बाढ़ को आम समस्या बना दिया है। जलवायु परिवर्तन से बारिश की तीव्रता बढ़ी है, लेकिन असली समस्या अब प्रशासनिक और योजना संबंधी है, न कि नीति की कमी।
शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को वित्तीय और कार्यात्मक स्वतंत्रता नहीं मिली है। 74वें संविधान संशोधन का अधूरा क्रियान्वयन इन्हें कमजोर बनाता है, जिससे बाढ़ तैयारी में जिम्मेदारी बिखर जाती है। कई शहरों के मास्टर प्लान में जलवायु जोखिम शामिल नहीं हैं, जिससे तैयारी अधूरी रह जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण एशिया में मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा। बारिश अब लगातार नहीं होती, बल्कि अचानक और तीव्र होती है। जिससे शहरों की ड्रेनेज प्रणाली अक्सर असमर्थ हो जाती है। पुणे स्थित IITM के शोधकर्ता रॉक्सी मैथ्यू कोल ने बताया कि चरम वर्षा की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, जिससे शहरी बाढ़ का खतरा बढ़ा है। असम में हाल ही में आई बाढ़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि चेतावनी प्रणाली और तैयारी में बड़ी खामियां हैं। कई लोगों को अचानक पानी में फंसा पाया गया, जबकि चेतावनी समय पर नहीं पहुंची। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल बांध और तटबंध बनाना पर्याप्त नहीं है। जलाशयों, दलदलों और बाढ़-क्षेत्रों को पुनर्स्थापित करना आवश्यक है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने शहरी बाढ़ के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन शहरों को अपने मास्टर प्लान में इन्हें शामिल करना होगा। नीति आयोग ने भी कहा है कि हर शहर को बाढ़ निवारण योजना बनानी चाहिए, जिसमें भूमि उपयोग नीति और मास्टर प्लान शामिल हों।
कोलकाता ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यहां एक शहर-स्तरीय फ्लड फोरकास्टिंग और अलर्ट सिस्टम (FFEWS) बनाया गया है। इसमें 400 सेंसर लगाए गए हैं, जो रियल-टाइम डेटा भेजते हैं और चेतावनी GIS प्लेटफॉर्म तथा मोबाइल नोटिफिकेशन के माध्यम से जनता तक पहुंचती है।
चेन्नई में एशियाई विकास बैंक की परियोजना के तहत 19 लाख लोगों को मौसमी बाढ़ से बचाने के लिए जलवायु-लचीला बाढ़ सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसमें ड्रेनेज सुधार, तैयारी क्षमता बढ़ाना और रखरखाव सुनिश्चित करना शामिल है।
देशव्यापी स्तर पर, IIT मंडी, IIT गुवाहाटी और CSTEP ने दिसंबर 2024 में जिला-स्तरीय बाढ़ और सूखा जोखिम मानचित्र जारी किए हैं। यह राज्य जलवायु प्रकोष्ठों और संबंधित विभागों को जोखिम आकलन और अनुकूलन योजना बनाने में मदद कर सकता है।
सबसे पहले, देखें कि आपके शहर की स्थानीय निकाय (ULB) ने बाढ़ तैयारी योजना बनाई है या नहीं। मास्टर प्लान में बाढ़ जोखिम शामिल है या नहीं, यह जानना आवश्यक है। यदि आपके शहर में चेतावनी प्रणाली (जैसे- मोबाइल अलर्ट, स्थानीय सायरन, सोशल मीडिया) नहीं है तो स्थानीय प्रतिनिधियों से संपर्क करें और इसे लागू करने की मांग करें। प्राकृतिक जलधाराओं, तालाबों और दलदलों को बचाने की पहल करें। यह केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि बाढ़ नियंत्रण के लिए भी आवश्यक है। इसके अलावा समुदाय स्तर पर तैयारी बढ़ाएं। आपातकालीन ड्रिल, सुरक्षित स्थानों की पहचान करें और परिवार में बाढ़ योजना बनाएं।
| तैयारी का क्षेत्र | क्या करना चाहिए |
|---|---|
| योजना और नीति | मास्टर प्लान में बाढ़ जोखिम शामिल करें |
| चेतावनी प्रणाली | रियल-टाइम अलर्ट और ड्रिल लागू करें |
| प्राकृतिक संरचना | जलाशय, दलदल और तालाबों को बचाएं |
| समुदाय भागीदारी | स्थानीय स्तर पर तैयारी और जागरूकता बढ़ाएं |