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आसमान में अमेरिका का पहरा: प्रतिबंधों की उड़ान में फंसे लाखों यात्री, तेहरान ने बगदाद से मांगी मदद, जानिए पूरा मामला

ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को कानून का उल्लंघन बताया है और उनकी निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों का हटाने के लिए इराक से साथ देने की अपील की है।
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Oct 03, 2026
US sanctions on Iran
सांकेतिक इमेज (सोर्स-chatgpt)

अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान-इराक हवाई सेवाओं पर पाबंदी लगी है। ईरान ने इन पाबंदियों को लेकर इराक से कदम उठाने की अपील की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों को "गैरकानूनी और अमानवीय" बताया है। भारत में ईरानी दूतावास ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा किया है।

ईरान नेक्या कहा?

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने के बाहरी (एक्स्ट्राटेरिटोरियल) तरीके को अवैध और राज्य की संप्रभुता के खिलाफ बताया है। ईरान का तर्क है कि ये कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ हैं। साथ ही उसने जोर दिया कि इराक की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए बगदाद को ऐसे फैसले लेने चाहिए जिनसे उड़ानें सामान्य हो सकें। मंत्रालय के अनुसार इन पाबंदियों से सैकड़ों हजार यात्री, तीर्थयात्री, मरीज और छात्र प्रभावित हैं।

ईरान-इराक के बीच पाबंदी साझा हितों के खिलाफ

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान और इराक के बीच वाणिज्यिक उड़ानों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियां दोनों देशों के हितों और उनके साझा हितों के खिलाफ हैं। मंत्रालय ने कहा कि ईरान और इराक के रिश्ते दोनों देशों के बीच पैदा होने वाली अस्थायी परिस्थितियों से कहीं ज्यादा गहरे हैं। ये रिश्ते लोगों के पुराने संबंधों और अलग-अलग क्षेत्रों में दोनों देशों के साझा हितों पर टिके हुए हैं।

हर साल लाखों ईरानी और इराकी नागरिक कारोबार और आर्थिक गतिविधियों, धार्मिक स्थलों की यात्रा, पर्यटन, पढ़ाई, इलाज और दूसरे कामों के लिए हवाई सफर करते हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच इस तरह की आवाजाही और मेलजोल को देखते हुए जरूरी है कि इस मुद्दे पर स्वतंत्र, जिम्मेदार और भविष्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाए, जो दोनों देशों के साझा हितों पर आधारित हो।

प्रतिबंधों की असली पृष्ठभूमि

तेहरान टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी वित्त विभाग ने 8 सितंबर को "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" के तहत ईरान के विमानन उद्योग से जुड़ी 36 संस्थाओं को निशाना बनाया। इसके बाद वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में प्रभावी रोक होगी और जो देश इन्हें सेवाएं देंगे, उन पर द्वितीयक प्रतिबंध लग सकते हैं। यह रोक उन कंपनियों को निशाना बनाती है जो ईरानी एयरलाइंस से कारोबार करती हैं। यानी सीधे इराक पर प्रतिबंध नहीं लगे, बल्कि सेवा देने वाली कंपनियां डर की वजह से पीछे हटीं।

इराक का पक्ष

ईरान में इराक के राजदूत यासिर अब्दुलजहरा अल-हज्जाज ने कहा कि बगदाद ने ईरानी उड़ानों को निलंबित करने का आदेश नहीं दिया। इराक ने रोक की आधिकारिक घोषणा नहीं की थी, लेकिन अमेरिकी वित्त विभाग की कार्रवाई के डर से ग्राउंड-हैंडलिंग कंपनियों ने इन रूटों पर सेवा बंद कर दी।

जमीनी हालात: आंशिक राहत

इराकी परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका ने नजफ इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ईरानी हवाई अड्डों के बीच उड़ानों के लिए इराकी एयरवेज को प्रतिबंध-छूट दी है। तेहरान टाइम्स इसे एक महीने की छूट बताया है। सरकारी इराकी न्यूज एजेंसी के हवाले से रिपोर्ट है कि नजफ-ईरान उड़ानें सोमवार देर रात फिर शुरू हुईं और इसका श्रेय प्रधानमंत्री अली अल-जैदी की कोशिशों को दिया गया। लेकिन बगदाद, इरबिल और सुलेमानिया हवाई अड्डों पर सेवाएं अब भी निलंबित हैं। इससे यात्रियों को कम से कम 12 घंटे की सड़क यात्रा करनी पड़ रही है, और शिया-बहुल इलाकों के बीच तीर्थयात्रा भी प्रभावित है।

राजनीतिक तनाव

मामला इराक की घरेलू राजनीति में भी गरमाया है। ईरान समर्थक गुटों और राजनीतिक दलों ने प्रदर्शन किए और हवाई अड्डों पर धरने की धमकी दी। रिपोर्टों के मुताबिक नजफ के अलावा नसीरिया, कर्बला और अमारा में भी प्रदर्शन हुए। ईरानवायर के अनुसार बसरा में 26 सितंबर को एक मौलवी ने उड़ानें बहाल न होने पर विमानों को उतरने से रोकने की धमकी दी। इसकी पुष्टि अन्य स्रोतों से नहीं हुई है।

ईरान पर असर

तेहरान के इमाम खुमैनी हवाई अड्डे से उड़ानों में 42 प्रतिशत की गिरावट आई है, जॉर्जिया, ओमान और अजरबैजान के रूट पूरी तरह बंद हैं और दुबई की उड़ानें 23 सितंबर से निलंबित हैं। इसके उलट चीन की उड़ानें स्थिर रहीं और सबसे व्यस्त तुर्किये रूट में केवल 19% की कमी आई। द नेशनल के मुताबिक लंबे समय तक उड़ान प्रतिबंध ईरान को और अलग-थलग कर सकता है, खासकर तब जब उसकी अर्थव्यवस्था पहले से अमेरिकी बंदरगाह नाकेबंदी से दबाव में है।

अमेरिका का पक्ष

इस ताजा बयान पर वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया मुझे खोजे गए स्रोतों में नहीं मिली। अमेरिका की ओर से अब तक सार्वजनिक रुख वित्त मंत्री बेसेंट की उसी घोषणा तक सीमित दिखता है। इसलिए अमेरिकी पक्ष जोड़ने के लिए वित्त विभाग का ताजा आधिकारिक बयान देखना उचित होगा। इराक के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम, दूसरी तरफ घरेलू राजनीतिक दबाव और मानवीय जरूरतें। इराक सरकार ने चिकित्सा, शिक्षा और धार्मिक यात्राओं जैसे मानवीय आधारों पर अमेरिकी छूट मांगी थी।

Updated on:
03 Oct 2026 06:16 pm
Published on:
03 Oct 2026 05:57 pm