
रात को बच्चा गहरी नींद में हो और कमरे में अचानक दांत पीसने की किर्र-किर्र आवाज गूंज उठे, तो माता-पिता का चौंकना स्वाभाविक है। भारतीय घरों में इसका सबसे आम जवाब होता है कि बच्चे के पेट में कीड़े हो गए हैं। लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि हर बार ऐसा नहीं होता। बच्चों में दांत पीसने की आदत के पीछे नींद की कमी, तनाव और स्क्रीन की लत जैसे कई कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं।
क्या है नींद में दांत पीसने की समस्या?
चिकित्सा की भाषा में नींद के दौरान दांत भींचने या पीसने की आदत को 'ब्रक्सिज्म' कहा जाता है। यह छोटे बच्चों में काफी देखी जाती है। कई बार बच्चे को खुद इसका पता नहीं चलता, माता-पिता तब जान पाते हैं जब वे रात में आवाज़ सुनते हैं या सुबह बच्चा जबड़े में हल्के दर्द की शिकायत करता है। अधिकतर मामलों में यह आदत बढ़ती उम्र के साथ अपने आप कम हो जाती है, फिर भी इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं माना जाता।
पेट के कीड़ों वाली धारणा कितनी सही?
सालों से यह मान्यता चली आ रही है कि दांत किटकिटाने का सीधा संबंध पेट के कीड़ों से है। डॉ. आनंद के अनुसार माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है, लेकिन हर बार ऐसा होना ज़रूरी नहीं। चिकित्सा जगत में भी इस धारणा को लेकर कोई पक्की सहमति नहीं है। यानी सिर्फ दांत पीसने के आधार पर बच्चे को कृमिनाशक दवा देना सही तरीका नहीं है। दवा देने का फैसला डॉक्टर की सलाह से ही होना चाहिए।
विशेषज्ञ की पहली सलाह है कि बच्चे को शांत रखा जाए, खासकर सोने से पहले। रात को बिस्तर पर जाने से ठीक पहले ज़्यादा भागदौड़ या उछल-कूद न करने दें। साथ ही बच्चे में रोज़ लगभग एक ही समय पर सोने की आदत डालें। तय दिनचर्या से शरीर और दिमाग दोनों को आराम मिलता है और नींद गहरी व सुकून भरी होती है। सोने से पहले हल्की कहानी सुनाना या धीमी बातचीत करना इसमें मददगार हो सकता है।
पूरी नींद है सबसे ज़रूरी
एक्सपर्ट के मुताबिक नींद पूरी न होने पर भी बच्चा दांत किटकिटाने लगता है। इसलिए उम्र के हिसाब से पर्याप्त नींद दिलाना बेहद अहम है। छोटे बच्चों को बड़ों की तुलना में कहीं ज़्यादा घंटों की नींद चाहिए होती है। देर रात तक जागने, शादी-समारोह या मेहमानों की वजह से बिगड़ी दिनचर्या का असर भी नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है।
स्क्रीन से बनाएं दूरी
आज के दौर में मोबाइल और टीवी बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। डॉ. आनंद के अनुसार अगर बच्चा रात को सोते समय मोबाइल चलाता है या टीवी देखता है, तो उसकी नींद पर बुरा असर पड़ सकता है। उनकी सलाह है कि जितना हो सके बच्चे को स्क्रीन से दूर रखें और रात को सोने से पहले किसी भी तरह के डिवाइस के पास न जाने दें। स्क्रीन की रोशनी और उत्तेजक कंटेंट दिमाग को सक्रिय रखते हैं, जिससे नींद देर से आती है और बेचैन रहती है।
तनाव और चिंता पर भी दें ध्यान
कई बार बच्चा तनाव या चिंता के कारण भी नींद में दांत पीसने लगता है। स्कूल का दबाव, परीक्षा का डर, दोस्तों से झगड़ा, घर का तनावपूर्ण माहौल या किसी चीज़ का डर, ये सब बच्चे के मन पर असर डालते हैं। अगर बच्चा किसी बात से डर रहा है या उसे कोई चिंता है, तो उससे प्यार से बात करें और उसे शांत रखने की कोशिश करें। बच्चे को यह भरोसा दिलाना ज़रूरी है कि वह अपनी बात बेझिझक कह सकता है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
पीडियाट्रिशियन के मुताबिक आमतौर पर इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने से ही बच्चा दांत पीसना बंद कर देता है। नींद पूरी होने पर बच्चे को इस तरह की परेशानी नहीं होती। लेकिन अगर बच्चा रोज़ दांत किटकिटाता है या यह समस्या बार-बार हो रही है, तो एक बार विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। इसके अलावा ये संकेत दिखें तो देर न करें:
अगर ऊपर दिए गए संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।