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Women in India: 43% ग्रेजुएट पर कार्यबल में सिर्फ 13.5%, जानिए STEM में महिलाओं की वास्तविक स्थिति

भारत में STEM शिक्षा में 43% के मुकाबले कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी केवल 13.5% क्यों है? जानिए 'लीकी पाइपलाइन' के मुख्य कारण, चुनौतियां और सरकारी समाधान।
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Sep 01, 2026
STEM
STEM में महिलाएं पीछे क्यों? (AI)

भारत तेजी से तकनीकी और वैज्ञानिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन इस विकास यात्रा में एक बुनियादी विसंगति लगातार बनी हुई है । STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में महिलाओं का सीमित प्रतिनिधित्व। भारत में उच्च शिक्षा के स्तर पर STEM विषयों में बालिकाओं का नामांकन लगभग 43% के आसपास है, जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आंकड़ा माना जाता है। इसके बावजूद, जब यह यात्रा कार्यस्थल, शोध और संकाय स्तर तक पहुंचती है, तो महिलाओं की वास्तविक भागीदारी गिरकर मात्र 13.5% से 14% के बीच सिमट जाती है। शीर्ष अनुसंधान संस्थानों और IITs में तो यह आंकड़ा और भी चिंताजनक स्थिति में पहुंच जाता है।

इस घटना को अकादमिक जगत में ‘लीकी पाइपलाइन’ (Leaky Pipeline) कहा जाता है यानी शिक्षा के स्तर पर तो प्रतिभा प्रवेश करती है, लेकिन करियर के अलग-अलग पड़ावों पर तंत्र से बाहर हो जाती है। आइए समझते हैं कि इस अंतर के पीछे के सामाजिक-ढांचागत कारण क्या हैं, सरकार और उद्योग क्या प्रयास कर रहे हैं, और भविष्य की राह क्या होनी चाहिए।

क्यों घट जाती है भागीदारी?

शिक्षा से पेशेवर करियर में संक्रमण (Transition) भारतीय महिलाओं के लिए सबसे कठिन दौर साबित होता है। इस गिरावट के पीछे कई जटिल कारक जिम्मेदार हैं।

  • पारिवारिक जिम्मेदारियां और करियर ब्रेक: विवाह, मातृत्व और बुजुर्गों की देखभाल का असंतुलित भार महिलाओं पर आता है। STEM जैसे तीव्र गति से बदलते क्षेत्रों में कुछ वर्षों का ब्रेक अक्सर करियर की गति को हमेशा के लिए धीमा या समाप्त कर देता है।
  • कार्यस्थल पर लचीलेपन की कमी: कई अनुसंधान प्रयोगशालाओं और तकनीकी कंपनियों में सख्त कार्य घंटे, दूरस्थ कार्य (Remote work) की अनुपलब्धता और बाल-देखभाल (Creche) जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी महिलाओं को पीछे हटने पर मजबूर करती है।
  • रोल मॉडल और मेंटरशिप का अभाव: नेतृत्व और वरिष्ठ संकाय स्तर पर महिलाओं की न्यून उपस्थिति के कारण युवा छात्राओं को अपने सामने ऐसे उदाहरण नहीं दिखते, जिनसे वे दीर्घकालिक करियर की प्रेरणा ले सकें।
  • अचेतन पूर्वाग्रह (Unconscious Bias): नियुक्तियों, शोध अनुदानों के आवंटन और पदोन्नति की प्रक्रियाओं में लैंगिक पूर्वाग्रह अक्सर महिलाओं के मूल्यांकन को प्रभावित करते हैं।

सरकारी पहलें: शिक्षा से लेकर नेतृत्व तक का सफर

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) सहित विभिन्न मंत्रालयों ने इस खाई को पाटने के लिए कई रणनीतिक योजनाएं लागू की हैं।

योजना का नाममुख्य उद्देश्य एवं प्रभाव
Vigyan Jyotiकक्षा 9 से 12 तक की मेधावी छात्राओं को साइंस कैंप, मेंटरशिप और एक्सपोजर विजिट्स के जरिए STEM करियर चुनने के लिए प्रेरित करना।
WISE-KIRANमहिलाओं को अनुसंधान, फेलोशिप और करियर ब्रेक के बाद दोबारा मुख्यधारा में लौटने (WISE-SCOPE) के लिए वित्तीय और संस्थागत समर्थन।
GATI (Gender Advancement for Transforming Institutions)ब्रिटेन के 'Athena SWAN' की तर्ज पर शुरू किया गया ढांचा, जो संस्थानों को लैंगिक संवेदनशीलता और समानता के आधार पर स्वयं का मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित करता है।
Women Scientist Scheme (WOS)WOS-A (बुनियादी शोध), WOS-B (सामाजिक प्रभाव) और WOS-C (पेटेंट/IPR)। इसके जरिए हजारों महिलाओं ने अपनी PhD पूरी की और स्वतंत्र पेटेंट पेशेवर बनीं।
SERB-POWER & BioCAReमहिला वैज्ञानिकों को शोध अनुदान (Grants) और प्रयोगशालाओं में स्वतंत्र अनुसंधान नेतृत्व के लिए विशेष वित्तीय सहायता।

इसके अतिरिक्त, NIDHI और TBI (Technology Business Incubators) जैसी पहलों के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले डीप-टेक और साइंस स्टार्टअप्स को सीड फंडिंग और इन्क्यूबेशन की सुविधा दी जा रही है।

शैक्षणिक संस्थानों और निजी उद्योग की भूमिका

सरकारी नीतियों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों और कॉरपोरेट क्षेत्र की सक्रियता भी निर्णायक बदलाव ला रही है:

संस्थानों के जमीनी प्रयास: IIT दिल्ली का 'Manasvi' कार्यक्रम हाई स्कूल स्तर पर लड़कियों के भीतर STEM के प्रति रुचि और आत्मविश्वास पैदा करने का सफल उदाहरण है।

CSR और छात्रवृत्तियां: Procter & Gamble (P&G) का 'Shiksha' कार्यक्रम जैसी सीएसआर पहलें वंचित वर्ग की छात्राओं को स्कॉलरशिप और मेंटरशिप प्रदान कर रही हैं।

उद्योग-शिक्षा सहयोग: Adobe, Infosys, Flipkart और Hitachi Energy जैसी तकनीकी कंपनियां कोडिंग बूटकैंप्स, इंटर्नशिप्स और वूमेन-इन-टेक स्कॉलरशिप्स के जरिए कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रही हैं।

आंकड़ों को हकीकत में बदलने की रणनीति

STEM में लैंगिक संतुलन स्थापित करना केवल सामाजिक न्याय का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक प्रगति और नवाचार क्षमता के लिए भी अनिवार्य है। इसके लिए निम्नलिखित कदम प्राथमिकता पर होने चाहिए।

संस्थागत करियर री-एंट्री नीतियां: मातृत्व या पारिवारिक कारणों से ब्रेक लेने वाली महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए विश्वविद्यालयों व कॉर्पोरेट्स में पारदर्शी 'वापसी कार्यक्रम' (Returnship Programs) अनिवार्य किए जाने चाहिए।

मूल्यांकन प्रणालियों में सुधार: शोध अनुदान और संकाय भर्ती में उम्र सीमा में छूट और प्रकाशनों के मूल्यांकन के दौरान करियर ब्रेक को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

स्थानीय प्रेरणा स्रोतों का प्रसार: पाठ्यपुस्तकों और डिजिटल मीडिया के माध्यम से समकालीन भारतीय महिला वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और गणितज्ञों की उपलब्धियों को व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए।

सुरक्षित व समावेशी कार्य संस्कृति: प्रयोगशालाओं और तकनीकी दफ्तरों में निष्पक्ष पदोन्नति व्यवस्था, सुरक्षित माहौल और बाल-देखभाल सहायता को बुनियादी अधिकार का रूप दिया जाना चाहिए।

जब शिक्षा, नीति और कार्यस्थल तीनों स्तरों पर एक मजबूत सुरक्षा तंत्र बनेगा, तभी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आधी आबादी की प्रतिभा का पूरा उपयोग संभव हो सकेगा।

Updated on:
01 Sept 2026 11:02 am
Published on:
01 Sept 2026 10:15 am