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मां बनने की खुशी के साथ आया तनाव भी, जानिए कैसे रोज के 15 मिनट योग बदल सकते हैं आपका पूरा अनुभव?

Yoga pregnancy mental health: गर्भावस्था की खुशियों के बीच अगर कभी बेवजह घबराहट, चिंता या मूड स्विंग्स महसूस हो रहे हैं, तो आप अकेली नहीं हैं। जानिए कैसे कुछ सरल योगासन आपके तनाव को कम करके इस सफर को और खूबसूरत बना सकते हैं!
3 min read
Aug 25, 2026
yoga pregnancy mental health
yoga pregnancy mental health: प्रेग्नेंसी में मेंटल हेल्थ नहीं करेगी परेशान। जानिए सुरक्षित और आसान तरीके। (AI Creative)

Yoga pregnancy mental health: गर्भावस्था के दौरान शारीरिक बदलावों के साथ-साथ भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी बेहद आम हैं। और अगर आप भी कभी बिना किसी वजह के घबराहट, चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस करती हैं, तो यह अकेले आपके साथ नहीं हो रहा। ऐसे में योगासन एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी साथी बनकर उभरता है, जो तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में मदद करता है। नीचे वैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के आधार पर इसका व्यावहारिक महत्व समझाया गया है।

आपके अकेले होने की बात नहीं, यह हर तीसरी महिला का अनुभव है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, विकासशील देशों में गर्भवती महिलाओं में मानसिक विकारों की दर लगभग 15.6% है और प्रसव के बाद यह 19.8% तक हो सकती है। यानी अगर आप भी कभी ऐसा महसूस करती हैं, तो यह न तो असामान्य है, न ही इसे नजरअंदाज करने की बात है। बल्कि इसका एक आसान, सुलभ समाधान मौजूद है।

जानिए योगासन कैसे हैं पप्रभावी?

2026 में प्रकाशित एक मेटा‑विश्लेषण में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान योगासन करने से अवसाद और चिंता दोनों में महत्वपूर्ण कमी आती है। इसी तरह, 2020 की एक व्यवस्थित समीक्षा में भी योग को तनाव, चिंता, अवसाद और दर्द में कमी तथा भावनात्मक कल्याण में सुधार से जोड़ा गया है।

भारत में हुए एक नियंत्रित परीक्षण YOGESTA में, दूसरी और तीसरी तिमाही में 16 सप्ताह तक ऑनलाइन योग अभ्यास से तनाव, अवसाद और चिंता में कमी और जीवन‑गुणवत्ता में सुधार पाया गया। दिल्ली के AIIMS में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि योगासन से गर्भावस्था के दौरान वजन वृद्धि नियंत्रित रहती है और तनाव स्तर भी कम होता है।

ये योगासन हैं खास, जानिए इन्हें करने का सुरक्षित और असरदार तरीका

भारत सरकार की गाइडलाइन्स बताती हैं कि हर गर्भावस्था अलग होती है, इसलिए योग अभ्यास को तिमाही और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदलना चाहिए-

  • पहली तिमाही में हल्की सांस-कसरत और गर्दन, कंधे, टखने की हल्की मूवमेंट से शुरुआत करें
  • दूसरी तिमाही में धीरे‑धीरे स्ट्रेचिंग और हल्के आसन शामिल करें, लेकिन हमेशा विशेषज्ञ की निगरानी में
  • तीसरी तिमाही में भद्रासन, शशांकासन जैसे हिप‑ओपनिंग आसन उपयोगी हो सकते हैं, जो प्रसव में मददगार होते हैं

साथ ही, योग अभ्यास शांत वातावरण में, खाली पेट और शौच के बाद ही किए जाने चाहिएं। योगासन के दौरान सांस नाक से लें, कपड़े आरामदायक हों और शरीर को अचानक न मोड़े। उल्टा झुकाव, पेट पर दबाव डालने वाले आसन और तेज प्राणायाम (जैसे भस्त्रिका, कुम्भक) से बचना चाहिए।

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी?

यदि योग अभ्यास के दौरान चक्कर, सांस फूलना, अत्यधिक थकान या किसी तरह का असहज अनुभव हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही, यदि पहले से कोई मानसिक स्वास्थ्य समस्या (जैसे गंभीर अवसाद या चिंता) हो, तो योग को अकेले समाधान न मानें, डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलकर एक समग्र योजना बनाएं।

योग सिर्फ मन नहीं, शरीर को भी संवारता है

योग न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। यह लचीलापन बढ़ाता है, मांसपेशियों को मजबूत करता है और शरीर की सहनशक्ति को बढ़ाता है। गर्भावस्था के दौरान नियमित योग अभ्यास से प्रसव के समय दर्द में कमी आ सकती है और प्रसव के बाद की रिकवरी भी तेज हो सकती है।

अगला कदम क्या हो सकता है?

अगर आप या आपकी कोई अपनी अभी गर्भवती हैं, तो योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए स्थानीय योग केंद्र, अस्पताल या प्रशिक्षित योग शिक्षक से संपर्क करें। शुरुआत में हल्के, सुरक्षित आसन और सांस-कसरत से करें और डॉक्टर से यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपकी स्थिति में योग करना सुरक्षित है। यह 9 महीने का सफर जितना शरीर का है, उतना ही मन का भी है। थोड़ी सी सजगता इसे कहीं ज्यादा सुकूनभरा बना सकती है।

Updated on:
25 Aug 2026 02:07 pm
Published on:
25 Aug 2026 02:07 pm