
Rural women entrepreneurship SHG: एक वॉशिंग पाउडर से ग्रामीण महिलाओं ने बदल दिया अपने गांव की समृद्धि और लाखों महिलाओं की खुशहाली का अर्थ। (AI Creative)
Rural women entrepreneurship SHG: गांव की मिट्टी से उठ रही है एक नई कहानी, जहां एक महिला किसान ने वाशिंग पाउडर बनाकर न सिर्फ अपनी आजीविका मजबूत की है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। यह कहानी हमें बताती है कि कैसे साधारण घरेलू काम से जुड़ी पहलें भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती हैं।
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के महुआरा गांव में प्रकाश प्रेरणा महिला ग्राम संगठन नामक एक स्वयं सहायता समूह (SHG) ने वाशिंग पाउडर बनाने का काम शुरू किया। इस समूह में करीब 35 महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दी गई तकनीकी ट्रेनिंग के बाद यह काम शुरू किया।
ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझने में मदद की कि किस मात्रा में कौन सी सामग्री मिलानी है। यह काम कम पढ़ी‑लिखी महिलाओं के लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हौसला रखा और इसे सीखकर ही दम लिया।
समूह की महिलाएं सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक फैक्ट्री में काम करती हैं, ताकि घर का काम भी समय पर निपटा सकें। इस व्यवस्था से उन्हें रोजगार के साथ‑साथ आत्मविश्वास भी मिला है।
भारतीय स्टेट बैंक के डीजीएम धर्मेंद्र किशोर ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि इससे महिलाओं को रोजगार के साथ आत्मविश्वास भी मिला है।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के चताड़ा गांव की अनीता ने भी इसी तरह की पहल की। उन्होंने दो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को डिटर्जेंट पाउडर बनाने का प्रशिक्षण दिया और उन्हें घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराया। इससे कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला और यह गांव में प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
महुआरा और चताड़ा जैसी कहानियां दरअसल देश भर में फैल रहे एक बड़े आंदोलन का हिस्सा हैं। मंत्रालय के अनुसार, जून 2025 तक देश में करीब 10 करोड़ महिलाएं 91 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी थीं।
सरकार का लक्ष्य अब और बड़ा हो गया है, 21 अगस्त 2026 को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने DAY-NRLM के तहत 'नेशनल कैंपेन ऑन एंटरप्रेन्योरशिप' का दूसरा चरण शुरू किया है, जो 21 नवंबर 2026 तक चलेगा।
इसका मकसद महिलाओं के छोटे उद्यमों को बाजार, फॉर्मलाइजेशन और स्केल तक पहुंचाना है। इस मुहिम के जरिए सरकार अब छह करोड़ 'लखपति दीदी' तैयार करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। यानी ऐसी महिलाएं, जिनकी सालाना कमाई कम से कम एक लाख रुपए हो।
इतना ही नहीं, इस साल के बजट में एक नई पहल भी जोड़ी गई, बजट 2026-27 में घोषित 'शी-मार्ट' योजना के तहत अब SHG महिलाओं के लिए कम्युनिटी-ओन्ड रिटेल आउटलेट बनाए जा रहे हैं, ताकि महुआरा या चताड़ा जैसी महिलाएं सिर्फ उत्पाद न बनाएं, बल्कि सीधे बाजार तक भी पहुंच सकें।
महिला किसानों की उद्यमिता सिर्फ वाशिंग पाउडर तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और अन्य योजनाओं के तहत महिलाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिल रही है।
उदाहरण के लिए, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) योजना के तहत 2025-26 में 11.61 लाख से अधिक महिला किसानों को प्रशिक्षित किया गया। DAY‑NRLM के माध्यम से जून 2025 तक 4.62 करोड़ महिला किसानों को एग्रो-इकोलॉजी प्रथाओं में समर्थन मिला। इसके लिए 2.09 करोड़ को पशुपालन प्रबंधन में प्रशिक्षित किया गया।
अंबुजा फाउंडेशन जैसी संस्थाएं ग्रामीण महिला समूहों को उत्पादन से आगे बढ़कर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंचने में मदद कर रही हैं। इससे महिलाएं सिर्फ उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रह जातीं, बल्कि बाजारमुखी उद्यमी बन जाती हैं।
महुआरा और चताड़ा की कहानियां दिखाती हैं कि-
आपके गांव में भी यदि कोई महिला समूह हैं, तो यह जरूर सोचिए कि क्या घरेलू उत्पाद जैसे साबुन, पाउडर, मसाला या अन्य चीजें बनाकर स्थानीय बाजार या आस-पास के कस्बों में बेचा जा सकता है। शुरुआत में छोटे स्तर पर, प्रशिक्षण और बैंक सहयोग से यह संभव हो सकता है।
जम्मू और कश्मीर में लैवेंडर की खेती को 'पर्पल रेवोल्यूशन' के रूप में जाना जाता है। सरकार की एक दशक लंबी कोशिशों के बाद, लैवेंडर के खेत नए कश्मीर की पहचान बन गए हैं। अब उद्यमी इसे खेतों से निकालकर फेस वॉश और दूसरे प्रोडक्ट्स तक ले जाना चाहते हैं। यह पहल भी ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
यदि आप सरपंच या पंचायत सदस्य हैं, तो स्थानीय महिला समूहों को प्रशिक्षण, बैंक लोन या इसी हफ्ते शुरू हुई सरकार की नई एंटरप्रेन्योरशिप कैंपेन से जोड़ने का प्रयास करें।
इससे न सिर्फ महिलाओं की आजीविका मजबूत होगी, बल्कि पूरे गांव की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। महुआरा गांव की 35 महिलाओं की यह छोटी सी शुरुआत आज देश की उस बड़ी मुहिम का हिस्सा बन चुकी है, जो करोड़ों महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने की तरफ बढ़ रही है। गौर करें कि यह बदलाव आपके गांव से भी शुरू हो सकता है।
Updated on:
25 Aug 2026 11:58 am
Published on:
25 Aug 2026 11:58 am
