तीर्थ यात्रा

जानें, नामांकन से पहले काल भैरव के दरबार में हाजिरी लगाने क्यों पहुंचे पीएम मोदी

pm modi visit kaal bhairav mandir in varanasi

2 min read
Apr 26, 2019
जानें, नामांकन से पहले काल भैरव के दरबार में हाजिरी लगाने क्यों पहुंचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 अप्रैल यानि आज वाराणसी से पर्चा दाखिल कर दिया है। वे यहां से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। नामांकन करने से पहले मोदी ने काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा कालभैरव का दर्शन किया।

26 अप्रैल ही क्यों?

पीएम मोदी ने नामांकन के लिए 26 अप्रैल का दिन इसलिए चयन किया, क्योंकि इस दिन कालाष्टमी है और आज के दिन कालभैरव की पूजा की जाती है। आइये हम आपको बताते हैं कालभैरव की महत्ता, जिनका दर्शन करने पीएम मोदी गए थे।

कालाष्टमी तिथि क्या है

हर महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी कहते हैं। इस दिन भगवान भोले के अंश से उत्पन्न कालभैरव की उपासना की जाती है। जिसे काल भैरवाष्टमी भी कहा जाता है। माना जाता है कि कालभैरव विजय दिलाने वाले देवता हैं।

वाराणसी स्थित काल भैरव की मंदिर प्रमुख

वैसे तो हमारे देश में कई कालभैरव का मंदिर मिल जाएंगे, लेकिन वाराणसी स्थित काल भैरव की मंदिर सबसे प्रमुख है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग दो किलोमीटर पर स्थित है। मान्यता है कि जो भी भक्त काशी विश्वनाथ के मंदिर में दर्शन करने आते हैं, उन्हें कालभैरव के दरबार में हाजिरी लगाने जाना पड़ता है। कहा जाता है कि इनके दर्शन के बिना शिवर की नगरी की यात्रा अधूरी है।

काल भैरव की अनुमति के बिना काशी में कोई प्रवेश नहीं कर सकता

मान्यता है कि काशी नगरी में कोई तब-तक कोई प्रवेश नहीं कर सकता है, जब तक कालभैरव की अनुमति न मिल जाए। यही कारण है कि पीएम मोदी ने गुरुवार को रोड शो से पहले काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे और शुक्रवार को वे नामांकन से पहले कालभैरव के पास हाजिरी लगाने पहुंच गए।

अमित शाह ने भी लगाई थी हाजिरी

कुछ दिन पहले वाराणसी दौरे पर आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी कालभैरव के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां बाबा भोलेनाथ के बाद काशी के कोतवाल कालभैरव का कितना महत्व है। मान्यता है कि भगवान शिव ने कालभैरव को काशी का कोतवाल बनाया था।

क्या है पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, भगवान शिव के रूद्र अवतार से कालभैरव का गहरा संबंध है। यही कारण है कि इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है और बाबा विश्वनाथ काशी नगरी के राजा हैं। कथा के अनुसार, कहा जाता है कि एक बार ब्रह्माजी और विष्णुजी श्रेष्ठता को लकेर विवाद हुआ, विवाद के दौरान ब्रह्माजी ने शिवजी की आलोचन कर दी। आलोचना सुनकर भगवान शंकर क्रोधित हो गए और उनके क्रोध से कालभैरव का अवतरण हुआ। तब शिवजी ने काल भैरव को आदेश दिया कि ब्रह्माजी के पांचवे सिर को काट दें। ब्रह्माजी के पांचवे सिर काटने पर उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लग गया। कथा के अनुसार, तब भगवान शिव ने उन्हें पृथ्वी पर रहकर प्रायश्चित करने का आदेश दिया।

कथा के अनुसार, भगवान शिव ने कहा था कि ब्रह्माजी का कटा हुआ सिर अगर कालभैरव के हाथ में गिर जाएगा, तो वे पाप से मुक्ति पा लेंगे। मान्यता है कि उन्हें पाप से मुक्ति काशी में ही मिली थी। उसके बाद कालभैरव काशी में स्थापित होकर यहां के कोतवाल कहलाने लगे।

Updated on:
26 Apr 2019 12:58 pm
Published on:
26 Apr 2019 12:42 pm
Also Read
View All