
नई दिल्ली।जम्मू-कश्मीर में करीब तीन साल से ज्यादा समय तक साथ रहने के बाद भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया। समर्थन वापस लेने के बाद सरकार गिर गई और महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, यह किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिरकार भाजपा ने पीडीपी से अचानक क्यों समर्थन वापस लिया। लेकिन, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आखिरकार सच्चाई बता ही दी कि पीडीपी से समर्थन क्यों वापस लिया गया। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में महबूबा सरकार ने विकास का पूरा संतुलन बिगाड़ दिया था। जिसके कारण मजबूरन समर्थन वापस लेना पड़ा।
अमित शाह ने पीडीप से अलग होने का खोला राज
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के लिए सरकार मायने नहीं रखती, बल्कि जम्मू और कश्मीर का विकास और उसकी सुरक्षा एक मात्र उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि केंद्र की तरफ से जारी फंड में महबूबा सरकार ने जम्मू और लद्दाख से भेदभाव काफी किया। शाह ने यहां तक कहा कि जो पिछले 70 साल में जम्मू में नहीं हुआ, वहां मोदी सरकार ने विकास के लिए भरपूर काम किया। लेकिन राज्य की सरकार द्वारा कोई विकास का कार्य आगे नहीं बढ़ाया। इसलिए, वहां गठबंधन तोड़ना पड़ा।
कांग्रेस को दिया करारा जवाब
वहीं, कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के बयान पर पलटवार करते हुए शाह ने कहा कि भाजपा कभी जम्मू कश्मीर को भारत से अलग नहीं होने देगी। जम्मू कश्मीर हिंदुस्तान का अटूट हिस्सा है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इससे अपने खून से सींचा है। आज जम्मू और कश्मीर पूरे भारत के साथ जुड़ा है तो वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान के कारण जुड़ा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यहां तक कहा कि कोई भी अगर हमारे देश की सीमाओं से छेड़छाड़ करने का प्रयास करेगा तो हमारी देश की सेना उसे माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती सरकार गिरने के बाद बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य में तत्काल प्रभाव से राज्यपाल शासन लागू करने को मंजूरी दे दी। इसके बाद से वहां का माहौल काफी गरमा गया है।