उत्तराखंड कांग्रेस में आए सियासी भूचाल को थामने के लिए हाई कमान ने सभी नेताओं से बात करने का निर्णय लिया है। गुरुवार की शाम यानि कि आज हरीश रावत (Harish Rawat) समेत उत्तराखंड कांग्रेस (Uttarakhand Congress) के सभी बड़े नेता आज दिल्ली (Delhi) पहुंचेंगे।
उत्तराखंड (Uttrakhand) में फ्री हैंड न मिलने और संगठन के लोगों से सहयोग न मिलने को लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) ने अपनी नाराजगी जताई। इस ट्वीट के बाद से उत्तराखंड कांग्रेस में भूचाल सा या गया है। इस बीच कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश के सभी बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया है। इसे हरीश रावत को मानने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
उत्तराखंड कांग्रेस में आए सियासी भूचाल को थामने के लिए हाई कमान ने सभी नेताओं से बात करने का निर्णय लिया है। गुरुवार की शाम यानि कि आज उत्तराखंड कांग्रेस (Uttarakhand Congress) के सभी बड़े नेता आज दिल्ली (Delhi) पहुंचेंगे और हाई कमान से विचार विमर्श करेंगे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat), नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल जैसे बड़े नेता आज शाम तक दिल्ली पहुंचेंगे। शुक्रवार को भी इस मुद्दे पर हाई कमान और अन्य नेताओं के बीच विचार विमर्श होगा। हो सकता इस दौरान हाई कमान वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी को दूर करने का प्रयास करे।
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पंजाब (Punjab) में पहले ही कांग्रेस पार्टी को अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) के जाने से बड़ा झटका लगा है। इस बीच उत्तराखंड में यदि हरीश रावत ने पार्टी का साथ छोड़ा तो ये आगामी चुनावों से पहले पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
बता दें कि बुधवार को ट्विटर पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री (Former Chief minister of Uttarakhand) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने सिलसिलेवार ट्वीट्स किये थे। इन ट्वीट्स में उन्होंने कॉंग्रेस की कार्यप्रणाली पर हमला किया था और पार्टी छोड़ने के संकेत दिए थे। उन्होंने अपने ट्वीट में इसके संकेत देते हुए लिखा था, "सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि #हरीश_रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!"
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अब देखना ये होगा कि कैसे कांग्रेस हाई कमान इस विवाद को सुलझाता है। यदि हरीश रावत को मनाने में पार्टी असफल रही तो वो दिन दूर नहीं होगा जब कैप्टन की तरह ही एक और बड़ा नेता कांग्रेस का साथ छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा।