भोपाल

स्कूलों की मनमानी फीस पर जल्द आएगा फैसला, कोर्ट ने सभी पक्षों को बुलाया

सोमवार 13 जुलाई को होगी जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई, अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ होगा फैसला....।
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Jul 07, 2020
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कार्यक्रम रविवार को प्रतिकूल कब्जा विषय पर यूट्यूब व फेसबुक पर शाम छः बजे लाइव हुआ, जिसे तमाम लोगों ने देखा।

भोपाल। निजी स्कूलों की मनमानी फीस को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में मंगलवार से सुनवाई (court hearing) शुरू हो गई। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल और जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ के समक्ष यह याचिका लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने अब सोमवार 13 जुलाई को सभी पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया है। गौरतलब है कि लॉकडाउन के चलते स्कूल बंद हैं और उसके बावजूद भी कई निजी स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं। यहां तक कि कई स्कूल वाहन शुल्क तक मांग रहे हैं।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल और जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ के समक्ष राज्य की निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली (privet school fees) के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई मंगलवार से शुरू हो गई। इसके अलावा अब फीस से जुड़े इंदौर और ग्वालियर बेंच में लगाई गई याचिकाओं को भी जबलपुर ट्रांसफर कर दिया गया है। अब अगली बार से सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी।

मध्यप्रदेश के निजी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली के खिलाफ दायर सभी जनहित याचिकाओं की सुनवाई अब हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में होगी। हाईकोर्ट की इंदौर बैंच के जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की सिंगल बेंच ने यह निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि स्कूल फीस पर हाईकोर्ट की दो बेंचों ने अलग-अलग आदेश दिए हैं। इंदौर बेंच ने निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस के अलावा अन्य शुल्क भी लेने की स्वतंत्रता देते हुए राज्य शासन के सिर्फ शिक्षण शुल्क वसूलने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी थी। जबकि हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर ने इसी तरह की एक याचिका पर शिक्षण शुल्क के अलावा अन्य शुल्क वसूले जाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी। ऐसे दो विरोधाभासी अंतरिम आदेश हुए हैं। इसके कारण अब निजी स्कूल की फीस संबंधी सभी याचिकाएं जबलपुर में ही सुनी जाएंगी।

यह है मामला

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डा. पीजी नाजपांडे व अन्य ने एक अंतरिम आवेदन के जरिए इंदौर बैंच के सिर्फ शिक्षण शुल्क वसूलने संबंधी अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। इंदौर बेंच ने विरोधाभासी दो आदेशों के कारण कोई आदेश पारित न करते हुए मामले को मुख्य पीठ ट्रांसफर करने का निर्देश दिया था।

Published on:
07 Jul 2020 04:57 pm