मोहन भागवत के बयान का जदयू ने समर्थन करने से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को राम मंदिर को लेकर बड़ा दिया। भागवत ने कहा कि राम हमारे गौरव पुरुष हैं, इसलिए जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। भागवत ने कहा कि सरकार कानून बनाकर मंदिर बनाए। भागवत के इस बयान पर सियासत गरमा गई है। विपक्ष के हमलावर होने के बाद अब सहयोगी दल भी हमलावर हो गई है। जेडीयू ने साफ कहा कि वो मोहन भागवत के बयान से सहमत नहीं है।
भागवत के बयान के खिलाफ जदयू
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बाहर राम मंदिर कानून बनाने की किसी पहल के जेडीयू खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जब जेडीयू एनडीए का हिस्सा बनी थी तब साफ तय हुआ था कि सरकार के अंदर इन एजेंडों पर नहीं चला जाएगा। ऐसे में राम मंदिर पर फैसला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया जाना चाहिए। वहीं, जब केसी त्यागी से पूछा गया कि राम मंदिर से जुड़ा कानून अगर सरकार लाती है तो क्या जेडीयू एनडीए का हिस्सा बनी रहेगी या नहीं? इस पर केसी त्यागी ने कहा कि अभी ऐसी स्थिति नहीं है लेकिन यह तय है कि वह ऐसी पहल के खिलाफ रहेंगे। इस बयान के बाद एक बार फिर सियासत गरमा गई है। एक तो सीट बंटवारे को लेकर एनडीए में पहले से ही घमासान मचा हुआ है। ऐसे में इस बयान ने माहौल को और गरमा दिया है।
क्या कहा था भागवत ने?
आपको बता दें कि एआइएमआइएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भागवत के बयान पर कहा कि संघ और उनकी सरकार को ऐसा करने से कौन रोक रहा है? यह एक स्पष्ट उदाहरण है जब एक राष्ट्र को साम्राज्यवाद में परिवर्तित किया जाता है। ओवैसी ने कहा कि वे बहुलवाद या कानून के शासन में विश्वास नहीं करते हैं। गौरतलब है कि संघ प्रमुख ने कहा कि बाबर ने राम मंदिर को तोड़ा और अयोध्या में राम मंदिर के सबूत भी मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब यह मामला न्यायालय में चल रहा है लेकिन कितना लंबा चलेगा? भागवत ने कहा कि इस मामले में राजनीति आ गई इसलिए मामला लंबा हो गया। रामजन्मभूमि पर शीघ्रतापूर्वक राम मंदिर बनना चाहिए। इस प्रकरण को लंबा करने के लिए हुई राजनीति हुई को खत्म होना चाहिए। विजयदशमी उत्सव में अपने वार्षिक संबोधन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अगर जरूरत हो, तो सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए।