Opposition Parties Meeting Issue बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी पार्टियों की बैठक शुक्रवार 23 जून को होगी। इस बैठक क्या एजेंडा होगा। इस पर चर्चा गरम हैं। पर यह तो करीब-करीब तय है कि लीडरशिप और सीट शेयरिंग पर अभी कोई चर्चा नहीं होगी। हो सकता है कि मणिपुर हिंसा और दिल्ली विधेयक पर कुछ माहौल बन जाए। ऐसी स्थिति में देखना होगा कौन दल अपनी निजी महत्वाकांक्षा छोड़कर बड़ा दिल दिखाती है। इंतजार कीजिए कल तक......
आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों का एक महागठबंधन तैयार हो रहा है। इस गठबंधन की बैठक 23 जून को पटना में होने जा रही है। महबूबा मु्फ्ती, ममता बनर्जी पटना पहुंच गईं हैं। यहां तक एक र्शत पूरी न होने पर गठबंधन का बहिष्कार करने वाले आप के संयोजक व दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी पटना पहुंचकर सबको चौंक दिया है। शुक्रवार 23 जून को उम्मीद है गइबंधन के लगभग सभी नेता पटना बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक का मजमून संभवतः सीट बंटवारा और नेतृत्व कौन करेगा, यह न हो। पर बैठक में 450 लोकसभा सीटों पर वन टू वन फाइट पर चर्चा जरूर होगी। साथ ही हॉट मुद्दा दिल्ली विधेयक और मणिपुर हिंसा पर इस बैठक में शामिल नेताओं का क्या कदम होगा इस इंतजार 23 जून को ही खत्म होगा।
अलग-अलग पार्टियों से लोकल कोऑर्डिनेशन बड़ी चुनौती
विपक्षी दलों की इस पहली बैठक में की मेजबानी बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव कर रहे हैं। राजनीति के एक दिग्गज पंडित के अनुसार मौजूद वक्त चुनावी रणनीति, नेतृत्व संबंधी सवाल और सीटों के बंटवारे पर चर्चा होने की नहीं है। संभवतः इस बैठक में मुख्य एजेंडा भाजपा को घेरने वाले मुद्दों होंगे। इसमें मणिपुर हिंसा और केंद्र की कथित नाकामी पर चर्चा होने की संभावना है। साथ केजरीवाल की भारी मांग पर दिल्ली विधेयक पर भी मंथन हो सकता है। साथ ही सबसे बड़ी चुनौती अलग.अलग पार्टियों से लोकल कोऑर्डिनेशन की है।
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दिल्ली विधेयक पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर रहेगी नजर
अगर यह मुद्दा उठता है तो सबकी नजर कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर रहेगी। कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। केजरीवाल ने मंगलवार को उम्मीद जताई थी कि कांग्रेस 23 जून को होने वाली बैठक में केंद्र के अध्यादेश पर अपना रुख स्पष्ट कर सकती है।