
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल और कांग्रेस विधायक नाना पटोले (Photo: IANS)
Chandrapur Municipal Corporation: महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में भाजपा नीत महायुति गठबंधन ने अधिकांश जगहों पर शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन विदर्भ के चंद्रपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बावजूद कांग्रेस अपने दम पर मेयर (महापौर) नहीं बना सकी। अब चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है, जिससे पार्टी में नए राजनीतिक संकट के संकेत मिल रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांसद प्रतिभा धानोरकर और वरिष्ठ कांग्रेस नेता व विधायक विजय वडेट्टीवार के गुटों के बीच चल रही खींचतान अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। धानोरकर समर्थक पार्षद महानगरपालिका में अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं और इस संबंध में मंगलवार को विभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
इसी साल जनवरी में हुए 66 सदस्यीय चंद्रपुर महानगरपालिका चुनावों में कांग्रेस ने सबसे अधिक 27 सीटें जीती थीं। भाजपा को 23, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 6, शेकाप को 3, वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) को 2, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे।
चूंकि राज्य के विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) का हिस्सा होने के कारण शिवसेना (UBT) के समर्थन से कांग्रेस के पास मेयर पद हासिल करने का सुनहरा मौका था, लेकिन पार्टी की आंतरिक कलह उस पर भारी पड़ गई। मेयर चुनाव में भाजपा की संगीता खांडेकर ने कांग्रेस उम्मीदवार सोनाली महाडूले को महज एक वोट से हराकर बाजी मार ली थी।
कांग्रेस एकजुट रहती तो चंद्रपुर में सत्ता उसके हाथ में होती। नगर निगम चुनाव परिणाम आने के बाद से ही कांग्रेस के नव-निर्वाचित पार्षद दो खेमों में बंट गए थे। एक ओर सांसद प्रतिभा धानोरकर का गुट है, जबकि दूसरी ओर विजय वडेट्टीवार समर्थक नेता सक्रिय हैं। सत्ता गठन के समय भी यह विवाद सामने आया था कि कांग्रेस का दल नेता किस गुट का होगा। उस समय प्रदेश नेतृत्व को हस्तक्षेप कर मामला शांत कराना पड़ा था, लेकिन अब वही विवाद फिर से उभर आया है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस के 27 में से 16 पार्षद वर्तमान दल नेता राजेश अडूर के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। बताया जा रहा है कि धानोरकर गुट ने समर्थक पार्षदों की बैठक में नया दल नेता चुनने का प्रस्ताव भी पारित कर दिया है। दरअसल राजेश अडूर को विजय वडेट्टीवार का समर्थक माना जाता है। इसलिए धानोरकर गुट उनके खिलाफ खड़ा है।
बहुमत का दावा करते हुए धानोरकर गुट अब आधिकारिक रूप से दल नेता बदलने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इसके लिए विभागीय आयुक्त से मुलाकात की तैयारी की गई है।
चंद्रपुर कांग्रेस में चल रहा यह शक्ति संघर्ष पार्टी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक तरफ भाजपा स्थानीय निकाय में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस अपने ही अंदरूनी विवादों में उलझी हुई नजर आ रही है। ऐसे में, अगर धानोरकर और वडेट्टीवार गुटों के बीच का मतभेद जल्द ही नहीं सुलझाया गया, तो इसका जिले में पार्टी संगठन पर बहुत बुरा असर पड़ना तय है।
Published on:
16 Jun 2026 03:02 pm
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