कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए क्यों अड़े हैं Rahul Gandhi युवा कांग्रेसियों के सामने राहुल ने बताई वजह 'कांग्रेस के किसी वरिष्ठ ने नहीं ली हार की जिम्मेदारी'
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद बेशक Rahul Gandhi कांग्रेस की कमान किसी दूसरे को देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनको पार्टी के बयानवीरों को लेकर एक मलाल है। वो ये कि कार्यसमिति की बैठक में सबके सामने Congress president पद से इस्तीफे की पेशकश के बावजूद संगठन और कांग्रेस की सरकारों में बैठे नेताओं ने उनका अनुसरण नहीं किया। राहुल गांधी ने अपने मन की बात Indian Youth Congress के नेताओं से कही है।
बयानवीरों से दुखी राहुल गांधी
पार्टी अध्यक्ष को इस बात पर हैरानी है कि कांग्रेस के नेता कहने के लिए तो उनके एक आदेश या इशारे पर कुछ भी करने की बात करते हैं। इसके बाद भी जब उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की तो किसी मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या फिर किसी महासचिव ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की हिम्मत तक नहीं दिखाई।
बुजुर्ग नेताओं से खफा राहुल
सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष की सबसे ज्यादा नाराजगी उन बुजुर्ग नेताओं से है जो सामूहिक जिम्मेदारी लेने की बात तो करते हैं लेकिन अपने पद से हिलने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी वजह से वह अपना इस्तीफा वापस लेना नहीं चाहते।
राहुल गांधी ने मुलाकात करने वाले युवा कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष समेत संगठन के उच्च पदों पर बैठे नेता सामूहिक जिम्मेदारी की बात कहते हुए राहुल से इस्तीफा वापस करने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन इनमें से एक भी अपनी कुर्सी त्यागने के लिए तैयार नहीं है।
इस्तीफे के बाद क्या करेंगे राहुल गांधी
युवा कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बुधवार को राहुल गांधी के आवास के बाहर उनको मनाने के लिए जुटे थे। राहुल ने उन्हें बुला भी लिया। युवा कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कहा, राहुल जी ने हमें कहा कि आप चिंता मत करें, मैं कहीं जाने वाला नहीं। यहीं पार्टी में रहकर मेहतन करूंगा और संसद में भी सक्रिय रहूंगा। कुछ युवा नेताओं ने सामूहिक जिम्मेदारी की बात छेड़ी तो इसी पर राहुल ने पद पर बैठे नेताओं के कुर्सी नहीं छोड़ने की बात कही।
युवा बनाम बुजुर्ग का संघर्ष बढ़ा
असल बात है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने से सबसे ज्यादा डर युवा नेताओं को लग रहा है। वे सोच रहे है कि एक बार फिर उनकी आवाज संगठन में बुजुर्ग नेताओं द्वारा दबा दी जाएगी। इसलिए वह नहीं चाहते कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ें।
दूसरी तरफ राहुल गांधी के विकल्प के रूप में अभी तक जितने भी नाम आ रहे हैं। वे सभी बुजुर्ग नेताओं के है। ऐसे में पार्टी के अंदर युवा और बुजुर्ग लॉबी के बीच का संघर्ष बढ़ता दिख रहा है।