Pratapgarh Big News : गत पांच वर्षों से डोडा चूरा का निस्तारण नहीं होने से किसानों के लिए गलफांस बना हुआ है।
प्रतापगढ़. गत पांच वर्षों से डोडा चूरा का निस्तारण नहीं होने से किसानों के लिए गलफांस बना हुआ है। वहीं आबकारी विभाग की ओर से किसानों को डोडा चूरा का नष्टीकरण के आदेश दिए जा रहे है। वहीं किसानों ने भी बिना मुआवजे के इसे नष्ट नहीं करना चाहते हैं।
गौरतलब है कि गत आठ वर्षों से डोडा चूरा नष्ट नहीं हो सका। सरकार की ओर से डोडा चूरा नष्ट करने के लिए आबकारी विभाग को नोडल एजेंसी बनाया था। इसके बाद विभाग की ओर से किसानों को डोडा चूरा नष्ट कराने के लिए प्रति वर्ष कहा जा रहा है। लेकिन किसानों की मांग है कि पहले के वर्षों में सरकार की ओर से डोडा चूरा खरीदा जाता था। जिससे किसानों को आय भी होती थी। लेकिन अब पांच वर्षों से बिना रुपए दिए डोडा चूरा नष्ट नहीं कराया जाएगा। इसेे लेकर अफीम किसानों और आबकारी विभाग के बीच फांस बनी हुई है। हालांकि किसानों की ओर से सरकार के नाम गत दिनों से ज्ञापन सौंपे जा रहे है। जिसमें डोडा चूरा के बदले मुआवजा की मांग की जा रही है।
गौरतलब है कि आबकारी विभाग की ओर से पन्द्रह जुलाई तक पिछले आठ सालों का डोडा चूरा तोल करवाने के लिए पाबंद किया है। तोल नहीं करवाने वालों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में कार्यवाही के लिए लिखा गया है। किसान केवल इसी वित्तीय वर्ष का डोडा चूरा भाव बढ़ा कर तुलवाने को तैयार हैं। पुराना डोडा चूरा तो खेतों में नष्ट कर दिया है।
उपखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों के अफीम किसानों ने मांगों को लेकर शुक्रवार को मुयमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी विमलेंद्रसिंह राणावत को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि उपखण्ड क्षेत्र अरनोद के सभी अफीम काश्तकार को उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक डोडा चूरा नष्टीकरण नहीं किया जाएगा। जबकि आबकारी विभाग की ओर से विगत वर्षों का तथा इस चालू वित्तीय वर्ष का डोडा चूरा नष्ट करने के लिए पाबंद किया जा रहा है। जबकि विगत वर्षों का डोडा चूरा खेतों में नष्ट किया जा चुका है। वहीं इस वर्ष का डोडा चूरा मुआवजा मिलने पर नष्ट करने को तैयार है। ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2013 में डोडा चूरा सरकार खरीद कर रही थी। उक्त समय डोडा चूरा 150 प्रति किलो के हिसाब से देती थी। महंगाई बढ़ चुकी है। इसलिए अब वर्तमान 500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मुआवजा दिलवाया जाए। उपखण्ड क्षेत्र के अफीम काश्तकारों ने सर्व सहमति से निर्णय लिया है कि किसानों को जब तक डोडा चूरा का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता है। तब तक किसान डोडा चूरा नष्टीकरण नहीं करेंगे।