कई पीढियां करेंगी अटल बिहारी बाजपेयी को याद
इलाहाबाद:पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। यह खबर मिलते ही देशभर के साथ संगम नगरी के लोग भी बिलख पड़े ।अटल बिहारी वाजपेयी जनकवि, पत्रकार, बेबाक वक्ता थे। जिनको सुनने के लिए हमेशा इस शहर के लोग बेताब रहे और जब भी मौका मिला अटल जी का मन से स्वागत किया।अटल बिहारी बाजपेयी के साथ इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर रहे डॉ मुरली मनोहर जोशी भाजपा में सक्रिय हुए ।जनसंघ के बाद भारतीय जनता पार्टी के तीन प्रमुख चेहरे देश की जनता के सामने आए।जिसमें अटल आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी थे।और अटल बिहारी बाजपेयी से उनकी निकटता के चलते संगम नगरी हमेशा अटल जी के बेहद करीब रही।
अटल बिहारी बाजपेयी का राजनीतिक तौर पर इलाहाबाद से तो कोई सीधा नाता नहीं था। लेकिन मुरली मनोहर जोशी के नाते उनका सानिध्य और स्नेह इस शहर को मिलता रहा।जिसे आज याद करके भाजपा के कार्यकर्ता ही नही हर शहर वासी उनके हर एक मंच को याद कर रहा है। इस शहर से उनके प्रेम की बानगी इसी से मिलती है, की उन्होंने इस शहर को विकास के लिए अपनी पहली पंक्ति में रखा।उनके कार्यकाल में संगम नगरी को उत्तर मध्य रेलवे जोन के मुख्यालय की सौगात दी गई।तो वहीं करोड़ों की लागत से बना शहर की शान नैनी का पुल बनाया।शहर में स्थित मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज को राष्ट्रिय दर्जा मिला ।शहर को ट्रिपल आई टी सौगात दी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केन्द्रीय दर्जा दिया गया। जो आने वाली कई पीढियों के लिए बेहद मूल्यवान है ।
देश में अटल के नेतृत्व में भाजपा का कद बढ़ रहा था।उस दौरान यह शहर भी पार्टी की गतिविधियों का केंद्र था।भाजपा की मातृ संस्था राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक राजेन्द्र प्रसाद उर्फ़ रज्जू भैया घर होने के नाते यही उनका केंद्र रहा,तो वही राम मंदिर आन्दोलन विहिप मुखिया अशोक सिंघल ने यही से धार दी थी।उस समय मुरली मनोहर जोशी का सियासी कद देश भर में बढ़ रहा था । और जोशी भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष बनाये गये ।