देश में तेजी के साथ साइबर क्राइम का ग्राफ बढ़ रहा है। आए दिन कोई न कोई व्यक्ति इस जाल में फस रहा है। मोबाइल मैसेज या फिर किसी ऑनलाइन वेबसाइट की वजह से फलक झपकते ही बैंक खाता खाली हो जा रहा है। साइबर अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा है लेकिन आप सावधानी से अपना पैसा सुरक्षित रख सकते हैं। आम तौर से उत्तरप्रदेश में 75 जिलों की बात करें तो लगातार यह घटनाएं सामने आ रही हैं। मोबाइल कॉल या फिर मैसेज द्वारा लुभावने स्कीम के माध्यम से जालसाजी की जा रही है।
प्रयागराज: देश में तेजी के साथ साइबर क्राइम का ग्राफ बढ़ रहा है। आए दिन कोई न कोई व्यक्ति इस जाल में फस रहा है। मोबाइल मैसेज या फिर किसी ऑनलाइन वेबसाइट की वजह से फलक झपकते ही बैंक खाता खाली हो जा रहा है। साइबर अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा है लेकिन आप सावधानी से अपना पैसा सुरक्षित रख सकते हैं। आम तौर से उत्तरप्रदेश में 75 जिलों की बात करें तो लगातार यह घटनाएं सामने आ रही हैं। मोबाइल कॉल या फिर मैसेज द्वारा लुभावने स्कीम के माध्यम से जालसाजी की जा रही है। अगर आप जाल में फसे तो बैंक खाली होने में थोड़ा भी टाइम नहीं लगेगा।
प्रयागराज के कुछ केस
केस-1 प्रयागराज की रहने वाली इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्टूडेंट्स के साथ अंजान नंबर से कॉल आया और क्रेडिट कार्ड का ऑफर जैसे स्कीम की जानकारी दी गई। बातों ही बातों में क्रेडिट कार्ड को एक्टिव करने के लिए डेविट कार्ड का डिटेल लिया और क्रेडिट कार्ड को एक्टिव करने के लिए otp नंबर की जानकारी लेते ही आप का बैंक खाता साफ हो जाता है। लड़की के बैंक खाते से कुल 40 हजार रुपए फ्रॉड कर लिया गया। बैंक से संपर्क करने बाद भी साइबर जालसाजों की जानकारी नहीं मिलती है।
केस-2- फाफामऊ विधानसभा के रहने वाले अमित यादव के एकाउंट से 53 हजार रुपए का फ्रॉड हुआ। मोबाइल नम्बर पर लोन पास कराने के मैसेज के माध्यम से बैंक खाते से 53 हजार रुपये उड़ा लिया गया। मैसेज में एक लिंक आता है, जैसे ही लिंक को ओपन किया वैसे ही बैंक सारा डिटेज जालसाजों के पास जाता है और मिनटों में बैंक खाली हो जाता है।
कैसे करते हैं फिशिंग
इलेक्ट्रॉनिक संचार में फ़िशिंग या इलेक्ट्रोनिक ठगी, जालसाजी, एक ऐसा कार्य है जिसमें हैकर्स द्वारा किसी विश्वसनीय इकाई का मुखौटा धारण कर उपयोगकर्ता का नाम, पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड का विवरण जैसी विभिन्न जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया जाता है। आशंकित यूजर्स को लुभाने के लिए इस तरह का संचार आमतौर पर लोकप्रिय सामाजिक वेबसाइटों, नीलामी साइटों, बैंकों, ऑनलाइन भुगतान प्रोसेसर या आइटी एडमिन के नाम पर किया जाता है।
आप फिशिंग से ऐसे बच सकते हैं
उस ईमेल के प्रति अधिक सतर्कता बरतें जो गोपनीय सूचनाओं की मांग करे, खासतौर पर वित्त से जुड़ी हुई। यदि बैंक की तरफ से भी ईमेल भेजा गया हो तो पहले फोन करके ईमेल भेजने वाले की पहचान और उस मेल की सत्यता की पुष्टि कर लें। अर्जेंट या बैंक अकाउंट बंद कर देने वाली सूचना या तकनीकी भाषा के दबाव में न आएं। ईमेल से जुड़े वेबपेज के जरिए वेबसाइट ओपन करने की कोशिश न करें। बैंक या किसी भी वेबसाइट पर जाने के लिए कम्प्यूटर ब्राउज़ के एड्रेस बार पर कंपनी की यूआरएल टाइप करके ही वेबसाइट ओपन करें। किसी वेबसाइट की शुरुआत एचटीटीपी से हो रही है तो यह जरूरी नहीं कि वेबसाइट लॉक्ड डाउन यानी सुरक्षित या प्रामाणिकता हो। कई फिशर यूआरएल से ही वेबसाइट की शुरुआत करते हैं ताकि आपको लगे कि वेबसाइट प्रामाणित है। कोई भी सूचना या जानकारी देने से पहले यूआरएल प्रामाणिकता की जांच करने के लिए ब्राउसर के लॉक्ड सिम्बल पर क्लिक करके देख लें।
अंजान वेबसाइट और ओटीपी नंबर को न करें शेयर
अगर आप को साइबर जालसाजों से बचना है तो अंजाम नंबर द्वारा आए कॉल से बात न करें। किसी लुभावने मैसेज वाले लिंक को क्लिक न करें और फोन कॉल पर किसी को ओटीपी नंबर शेयर न करें।