प्रयागराज

नोएडा में झुग्गी-झोपड़ी वालों को फ्लैट आवंटन का निर्देश

झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले पात्र लोगों को चरणबद्ध तरीके से मिलेंगे फ्लैट

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इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर नोएडा के सेक्टर- 4, 5, 8, 9 व अन्य सेक्टरों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को हटाकर उन्हें फ्लैट बनाकर देने की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर नोएडा अथारिटी को फ्लैट आवंटन का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले एवं न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने आदेश में कहा है कि अथारिटी सेक्टरवाइज धीरे-धीरे फ्लैट बना रही है, इस नाते झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले पात्र लोगों को चरणबद्ध तरीके से उन्हें फ्लैट आंवटित किये जायें।

नोएडा अथारिटी के अधिवक्ता ने अथारिटी की तरफ से कहा कि उन्हें झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले पात्र व्यक्तियों को फ्लैट आवंटन करने में कोई परेशानी नहीं। यह आदेश न्यायालय ने श्री राजीव निर्धन कल्याण समिति की जनहित याचिका पर दिया है। न्यायालय ने उक्त आदेश पारित कर याचिका निस्तारित कर दी।


नोएडा में पार्क पर अतिक्रमण के खिलाफ कोर्ट ने मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर नोएडा के सेक्टर 26 में पार्क की भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर अतिक्रमणकर्ताओं से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए दो सप्ताह पेश करने को कहा है। आरोपी अतिक्रमणकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने पार्क की जमीन कब्जा नहीं किया है बल्कि उनकी जमीन बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए अधिग्रहीत कर ली गयी है, इस कारण उनके जमीन का अधिग्रहण खत्म किया जाए।

कोर्ट ने उनकी यह बात नहीं मानी और कहा कि वहां विकास हो चुका है। सड़कें बन चुकी है, फ्लैट बन चुके हैं ऐसे में भूमि वापसी नहीं हो सकती। कहा गया कि मुआवजे की रकम न मिलने पर भूमि अधिग्रहण के नये कानून के अनुसार अधिग्रहण खत्म हो जायेगी। कोर्ट ने कहा कि यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट की वृहदपीठ के समक्ष लंबित है ऐसे में इस मुद्दे पर कोर्ट कोई आदेश नहीं करेगी।

मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले व न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने डॉ.सूर्यकांत शर्मा की जनहित याचिका पर दो हफ्ते बाद सुनवाई करने का आदेश दिया है परन्तु आरोपियों की उस याचिका पर जिसमें अधिग्रहण खत्म करने की मांग की गयी है, आदेश सुरक्षित कर लिया। नोएडा अथारिटी व सरकार ने जवाब दायर कर कहा था कि प्लॉट संख्या 312, 313, 314, 315 का अधिग्रहण 1985 में हो चुका है। सरकार ने कब्जा लेेकर जमीन को अथारिटी को दे दिया है और अथारिटी ने उस पर विकास कार्य कर लिया है। 1987 में अवार्ड भी पारित हो गया है तथा याचीगण का पैसा राजस्व डिपाजिट खाते में जमा है।

BY- Court Corrospondence

Published on:
20 Apr 2018 10:22 pm
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