Prayagraj Hatyakand: उमेश पाल को गवाही से रोकने की कोशिशें पहले भी हुई थीम, एक बार तो वो बाल-बाल बचे थे।
उमेश पाल का अपहरण कर गवाही ना देने के लिए धमकाया गया, उमेश नहीं माने। उन पर हमला हुआ लेकिन गवाही से पीछे नहीं हटे। आखिरकार शुक्रवार को हमलावर जीत गए और उमेश की किस्मत ने साथ नहीं दिया। प्रयागराज में उमेश की हत्या कर दी गई।
उमेश की हत्या का आरोप अतीक अहमद और उसके परिवार पर है। इस हत्या की वजह उनका प्रयागराज पश्चिम के विधायक रहे राजूपाल की हत्या में मुख्य गवाह होना माना जा रहा है। इस मामले में उमेश ही वह गवाह थे, जो बूते 18 साल से डटकर अतीक अहमद के सामने खड़े थे।
भाजपा से जुड़े थे उमेश पाल
प्रयागराज के सुलेमसराय में रहने वाले उमेश पाल पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रह चुके थे और फिलहाल भाजपा से जुड़े थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील उमेश इस समय चायल से सपा की विधायक पूजा पाल के बुआ के बेटे थे। पूजा की 2005 में राजूपाल से शादी हुई थी।
राजूपाल 2005 में प्रयागराज पश्चिम सीट से विधायक थे। राजूपाल और उमेश पाल की आपस में खूब बनती थी और दोनों में रिश्तेदारी के साथ-साथ दोस्ती का भी रिश्ता बन गया।
शादी के कुछ दिन बाद ही राजूपाल की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई। पूजा ने पूर्व सांसद और प्रयागराज के बाहुबली अतीक अहमद और उसके भाई को इस मामले में नामजद कराया। इस केस के मुख्य गवाह बने उमेश पाल।
18 साल तक लड़ी लड़ाई
अतीक अहमद के दबदबे के सामने राजूपाल मर्डर केस में गवाह रहना कोई आसान काम नहीं था। उमेश पाल को गवाही से रोकने के लिए कई प्रयास हुए। इस मामले में 2005 से अब तक पूजा पाल के साथ अगर कोई लगातार खड़ा रहा तो वो उमेश पाल ही थे।
कचहरी में हुआ हमला
उमेश का 18 फरवरी 2008 को अपहरण कर लिया गया और गवाही ना देने की धमकी दी गई। उनको छोड़ा गया तो उन्होंने अतीक और उसके भाई पर एफआईआर करा दी। इसने अतीक से उनकी दुश्मनी और ज्यादा बढ़ा दी।
11 जुलाई 2016 में गवाही के लिए कोर्ट आए उमेश पर कचहरी परिसर में ही हमला हुआ। गोलियां चलीं लेकिन उमेश बच गए। एक बार फिर उमेश ने अतीक और उसके भाई अशरफ पर हमले का आरोप लगाया।
2016 में ही उमेश का नाम एक हत्या में भी आया, हालांकि वो इसमें बरी हो गए। केस में नाम आने के पीछे भी उमेश ने अतीक और उसके गैंग का हाथ होने की बात कही थी। जिससे दबाव में आकर वो राजूपाल केस में गवाही ना दें।
उमेश ने 2022 में फिर से एक एफआईआर कराई, जिसमें उन्होंने अतीक पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने अतीक पर एक करोड़ की रंगदारी मांगने का मामला भी दर्ज कराया था।
सच हो गया उमेश पाल का अंदेशा
उमेश पाल की ओर से बीते सालों में लगातार ये अंदेशा जताया जा रहा था कि उनकी हत्या हो सकती है। उन्होंने कई बार सीनियर अफसरों को इस संबंध में चिट्ठियां भी लिखी थीं। उनकी अपील पर प्रशासन ने उनको दो गनर भी दे रखे थे लेकिन उमेश की जान ना बच सकी। उमेश पाल पर दिनदहाड़े उनके घर के सामने गोलियां बरसाई गईं, जिससे उनकी जान चली गई।