शहर सहित जिले में खासकर औद्योगिक क्षेत्रों में बिना नंबर के वाहनों का आतंक बरप रहा है। ऐसे न तो इनकी प्रापर जांच हो रही है और नहीं इस पर कोई ठोस कार्रवाई फिलहाल हो रही है। बिना नंबर वाले वाहनों के संबंध में जब शहर के ट्रांसपोर्टरों से बात की गई तो उनका कहना था कि बिना नंबर के खदान में इंट्री ही नहीं मिलती है,
इसके अलावा जहां पर कांटा किया जाता है वहां भी नंबर आवश्यक होता है। इन हालात में बिना नंबर के तो इंट्री ही नहीं मिलती है। अब यह सवाल उठ रहा है कि जिस खदान से कोयला लोड करते हैं, या जिस उद्योग से ये माल की लोडिंग करते हैं वहां पर इनके नंबर होते हैं तो फिर यह सड़क पर गायब कैसे हो जाते हैं। यदि नियमों पर गौर करें तो ऐसी स्थिति दिख रही है। ये हालात शहर सहित जिले की सड़कों पर स्पष्ट रूप से देखे जा रहे हैं।
पत्रिका अभियान के तहत जहां पहले दिन रायगढ़ से घरघोडा मार्ग में चलने वाले ट्रेलरों और डंपरों की तस्वीर बिना नंबर के दिखाई गई थी वहीं बुधवार को शहर के छातामुड़ा चौक पर भी कई वाहनों को देखा गया जिनके नंबर निर्धारित स्थान पर अंकित नहीं थे, जबकि उनमें खनिज लोड था। ऐसे कई वाहन दिखे जिनके पीछे डाला पर नंबर नहीं थे, कुछ वाहन ऐसे भी देखे गए जिनके डाला पर नंबर तो थे पर वो मिटे हुए थे, इसके अलावा कुछ वाहनों पर मोटी धूल की परत चढ़ी हुई थी इसलिए नंबर दिख ही नहीं रहे थे।
इस मामले में पुलिस की ओर से कहा जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में कदम उठाया जाएगा।