
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo - IANS)
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन जल्द ही जर्मनी में तैनात करीब 5 हजार अमेरिकी सैनिकों (US Withdraw 5,000 Troops in Germany) को वापस बुला रहा है। ईरान संकट के बीच अमेरिका और नाटो सदस्यीय देशों के बीच गहरे मतभेद सामने आने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने यह फैसला लिया है। दरअसल, ईरान अमेरिका युद्ध को लेकर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ ट्रंप प्रशासन की तीखी बहस हुई थी। मर्ज ने अमेरिकी नीतियों की आलोचना की थी।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के आदेश पर हो रही इस वापसी की प्रक्रिया अगले 6 से 12 महीनों में पूरी हो जाएगी। इसके बाद यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या उस स्तर पर आ जाएगी जो रूस के यूक्रेन पर आक्रमण से पहले थी। इसके तहत जर्मनी में तैनात एक ब्रिगेड कॉम्बैट टीम को पूरी तरह वापस बुला लिया जाएगा, साथ ही एक लॉन्ग-रेंज फायर बटालियन की प्रस्तावित तैनाती को रद्द कर दिया गया है। फिलहाल जर्मनी में करीब 35,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो यूरोप में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है।
यह निर्णय ईरान संघर्ष के दौरान नाटो सहयोगियों से मिल रहे समर्थन की कमी पर वाशिंगटन की बढ़ती निराशा को भी दर्शाता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर बार-बार आरोप लगाया है कि वे विश्व के प्रमुख तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में कोई मदद नहीं कर रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
जर्मन चांसलर मर्ज ने इसके जवाब में कहा कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने से पहले यूरोप से कोई परामर्श नहीं किया गया था। उन्होंने युद्ध की रणनीति पर भी संदेह व्यक्त किया। पेंटागन अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अपने सहयोगियों की बयानबाजी और अमेरिकी अभियानों को समर्थन देने में उनकी विफलता को लेकर बेहद स्पष्ट रहे हैं, जबकि उन अभियानों से यूरोपीय देशों को ही सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है।
अमेरिका के इस कदम पर विश्लेषकों का मानना है कि जर्मनी से सैनिकों की यह वापसी अमेरिका-यूरोप रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के इस दौर में अटलांटिक के दोनों किनारों के बीच संबंध और अधिक तनावपूर्ण होते दिख रहे हैं।
Published on:
02 May 2026 08:09 am
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