Chhattisgarh Naxalism: 6 अप्रैल 2026 को ताड़मेटला नक्सली हमले की 16वीं बरसी पर CRPF ने 76 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। 2010 में हुए इस भीषण हमले में दंतेवाड़ा (अब सुकमा) में सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला किया गया था।
Tadmetla Naxal Attack: 6 अप्रैल 2026 को देश के इतिहास में दर्ज एक बेहद दर्दनाक और अहम घटना—ताड़मेटला नक्सली हमला—की 16वीं बरसी मनाई जा रही है। इस अवसर पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) अपने वीर शहीद जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उनकी स्मृति को सहेजने के लिए बनाए गए शहीद स्मारक का लोकार्पण आज CRPF के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह द्वारा किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। यह हमला 6 अप्रैल 2010 को तत्कालीन दंतेवाड़ा (अब सुकमा जिला) के ताड़मेटला-चिंतागुफा क्षेत्र में हुआ था। यह इलाका लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है। उस दिन सुबह करीब 5:30 से 6 बजे के बीच सुरक्षा बलों की टीम एक ऑपरेशन से लौट रही थी, तभी पहले से घात लगाए बैठे करीब 1000 नक्सलियों ने सुनियोजित तरीके से हमला कर दिया।
हमले की शुरुआत एक शक्तिशाली आईईडी विस्फोट से हुई, जिसने जवानों को अचानक झटका दिया। इसके तुरंत बाद नक्सलियों ने चारों ओर से घेरकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। थके हुए जवानों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और देखते ही देखते हालात बेहद गंभीर हो गए।
यह मुठभेड़ करीब 7 घंटे तक चली, जिसमें दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई। इस भीषण हमले में CRPF के 74 और छत्तीसगढ़ पुलिस के 2 जवान शहीद हो गए— कुल 76 सुरक्षाकर्मियों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वहीं, सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 8 नक्सलियों के मारे जाने की भी जानकारी सामने आई थी।
Chhattisgarh Naxalism: हमले के बाद नक्सली जवानों के अत्याधुनिक हथियार और बख्तरबंद वाहन (APC) भी अपने साथ लूटकर ले गए। बताया जाता है कि करीब 80 आधुनिक हथियार उनके हाथ लगे थे, जिससे उनकी ताकत और बढ़ गई थी। उस समय यह हमला भारतीय सुरक्षा बलों पर नक्सलियों द्वारा किया गया सबसे बड़ा और सबसे घातक हमला माना गया।
इस हमले की साजिश कुख्यात माओवादी नेता पापाराव के नेतृत्व में रची गई थी। हालांकि, समय के साथ परिस्थितियाँ बदलीं और हाल ही में पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आज, इस 16वीं बरसी पर देश अपने उन वीर सपूतों को याद कर रहा है, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह दिन न केवल शोक का प्रतीक है, बल्कि सुरक्षा बलों के साहस, त्याग और देशभक्ति को नमन करने का अवसर भी है।